जेनयू जैसे संस्थान कैसे सामंती मानसिकता, अवतारवाद के आवरण में नेतृत्व के नाम पर समाज को पीछे धकेलते है।

Nishant Rana​Director and Sub-Editor, ​Ground Report India (Hindi) जेएनयू विरोध के नाम पर मुख्यत: हमें जो सुनाई दिखाई पड़ता है वह यह है कि जेएनयू में लड़के लड़कियां सेक्स कर लेते है, कंडोम का प्रयोग किया जाता है, किसी खास राजनैतिक विचारधारा को ज्यादा सपोर्ट करते है, देश विरोधी गतिविधियां होती है आदि आदि बातों को आगे बढाते हुए करते है।ऐसा करने वाले अधिकतर लोग जो हमें दिखाई पड़ते है वह… Continue reading

नया राष्ट्रगान

Rajneesh Sachan Founder, MadhyaMargEditor, Ground Report India (Hindi) अपने अतीत की महानता के मिथ्या गर्व में डूबा एक देश थाकिसी दूसरी आकाशगंगा मेंकिसी और ग्रह परकिसी और प्रजाति के लोगों का उनकी भाषा से हिंदी में भावानुवाद किया जाए तो कुछ यूँ होगा कि-वे खुद को विश्व गुरु मानते थे ख़ैरउनकी भाषा में उनका भी हमारी तरह एक राष्ट्रगान थाजैसे हमारा अपना ‘जन गण मन’उनका संविधान थासंसद थी समूचे लोकतंत्र जैसी… Continue reading

मानसिक बलात्कार

Nishant Rana​Director and Sub-Editor, ​Ground Report India (Hindi) बच्चें को पैदा होने के दिन से भारतीय समाज में बच्चों के साथ उनकी इच्छा के विरुद्ध कार्य करना शुरू कर देता है जाता है।जब बच्चे के किसी कार्य से माता-पिता शिक्षक आदि को यदि जरा भी तकलीफ या जरा भी जिम्मेदारी बढ़ी महसूस होती है केवल तब ही बच्चे से पूर्ण व्यक्ति होने के अंदाज में डांटा फटकारा जाता है। अन्यथा हर… Continue reading

दुभाषिया

Kumar Vikram वो दो घरों में नहींएक ही घर के दो कमरों में एक साथ रहता है या यूँ भी कह सकते हैं कि यदि माता व पिता दो अलग अलग भाषाएँ हैं तो बच्चा दुभाषिया है या दुभाषिया होना चाहिए वह सिरफ एक की भाषा नहीं बोल सकता अच्छा बच्चा अच्छा दुभाषिया ही होता हैवो लफ़्ज़ों की जड़ता छोड़ सकता हैवो बर्लिन की दीवार तोड़ सकता हैहलांकि वो दोनों… Continue reading

दिल्ली विश्वविधालय की छात्र राजनीति के चरित्र में आमूलचूल परिवर्तन होना चाहिए — Ramanand Sharma

Ramanand Sharma जाति से शुरू होकर जाति पर खत्म होने वाली राजनीति यानी डूसू दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन, भारत में छात्र राजनीति को सबसे बड़ा मंच देने वाली संस्था है। जहां से अरुण जेटली विजय गोयल और न जाने कितने छात्र नेता निकलें जो आगे चलकर मुख्यधारा की राजनीति से जुड़े। भारत में छात्र राजनीति का इतिहास करीब 170 साल पुराना है, 1848 में दादाभाई नैरोजी जी ने ‘द स्टूडेंट… Continue reading

चारुस्मिता

​Rajeshwar Vashistha [tcb-script async=”” src=”//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js”][/tcb-script][tcb-script](adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});[/tcb-script] मैं किसी पेड़ की तरह उगना चाहता हूँ! मेरे पास मजबूत जड़ है, तना भी और पत्ते भी पर मुझे नहीं मालूम कि मैं पीपल बनूँ, नीम बनूँ, बुरूँस बनूँ या देवदार?बस मैं एक ऐसा जादुई पेड़ बनना चाहता हूँजिस पर चिड़िएँ, गिलहरियाँ, तितलिएँ और कोयल सब दिन-रात आएँ। चारुस्मिता ने कहा – सुनो पेड़, मुझे तुमसे प्रेम हो गया है।… Continue reading

विवशता के क्षणों में

​Rajeshwar ​Vashistha [tcb-script async=”” src=”//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js”][/tcb-script][tcb-script](adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});[/tcb-script] पिता चाहते थे जब वह शाम को थक हार कर घर लौटें मैं बिना सहारे अपने पावों पर चल करदरवाज़े तक आऊँ और वह मुझे गोद में उठा लें।पर बहुत दिनों तक ऐसा हो नहीं पाया। निराश पिता कुछ देर मुझे सहारा देकर चलातेमाँ की गोद में डालते और फिर मुँह-हाथ धोकर चौंके में भोजन के लिए बैठ जाते। पंखा झलते… Continue reading

बदमाश डायरी — Gourang

Gourang “कौन हो तुम?””वही तो खुद से पूछ रही हूँ।””मतलब?” “मतलब! क्या मतलब?” “क्या क्या मतलब? शक्ल से तो मेंटल नहीं लगते, कपड़े भी तो दुरस्त ही हैं।””चलो, यही सवाल मैं तुमसे करती हूँ, कौन हो तुम?” “मैं! मैं शरत हूँ।” “तो महज एक नाम हो बस?” “क्या नाम? पढ़ा लिखा हूँ, नौकरी करता हूँ, अच्छा कमाता हूँ, इसी शहर का हूँ, यार दोस्त हैं, मौज मस्ती करता हूँ। इसी से तो पहचान है।” “बस इतनी… Continue reading

बच्चे चाहिए हमें — Nishant Rana

Nishant Rana​Director and Sub-Editor, ​Ground Report India (Hindi) बच्चें हम पैदा करते हैक्योंकि हमें करने होते है समाज में अपना पुरुषत्व साबित करने कोअपना स्त्रीत्व साबित करने कोबच्चे चाहिए होते है हमेंक्योकिं खोजते है अपनी मुक्तिपैदा हुए बच्चे से दिखता है बहुत कोमल नाजुक सा मस्तिष्क जिसमें बींध सके अपने सपनेनिकाल सके अपनी खीज, गुस्सा , झुंझलाहटेएक तो ऐसा हो जिस पर समझे अपना पूर्ण अधिकारजिसको सुधारा जा सके मारा जा सके जो… Continue reading