देश, समाज, मनुष्य व सामाजिक नेतृत्व :: स्त्री, जाति व सामाजिक विद्रूपता

Vivek “सामाजिक यायावर”यह लेख “मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर” पुस्तक का अंश है, जिसमें लेखक “सामाजिक यायावर” सामाजिक-नेतृत्व व सामाजिक-आविष्कारों की बात करता है। देश, समाज व मनुष्यनेतृत्वसामाजिक-नेतृत्व– जाति– स्त्री– शाब्दिक/कृत्रिम तार्किकता व प्रायोजित विद्वता बनाम कर्मकांड व संस्कृति — स्वयं के प्रति असंवेदनशीलता– स्वतः स्फूर्त सामाजिक-नेतृत्व की आवश्यकता देश, समाज व मनुष्यमनुष्य के बिना परिवार, समाज व देश नहीं हो सकता; जहां कहीं भी मनुष्य होगा वहाँ परिवार, समाज… Continue reading

सामाजिक यायावर के शिक्षा के प्रयोग (सन् 2004): उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले की बिलारी तहसील के एक गांव में एक विद्यालय

Vivek “सामाजिक यायावर” डा० राकेश सक्सेना “रफीक” से मेरी पहली मुलाकात आज से तकरीबन ग्यारह-बारह वर्ष पहले मेरे एक पत्रकार मित्र के घर में हुई थी। राकेश युवा-भारत से जुड़े हुए थे। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली से डाक्टरेट राकेश सक्सेना मुरादाबाद के किसी डिग्री कालेज में अतिथि-व्याख्याता के रूप में पढ़ाते थे। एक दिन लखनऊ में राकेश मुझसे कहते हैं कि वे और उनके एक स्थानीय स्तर के नेता मित्र… Continue reading

बस्तर, छत्तीसगढ़ पर आने वाली पुस्तक का प्रस्तावना अध्याय

[themify_hr color=”red” width=”5″] अभी इस विमर्श को छोड़ देते हैं कि बस्तर का माओवाद वहां के आदिवासी समाज के लिए प्रतिबद्ध, ईमानदार व कल्याणकारी है या नहीं, यह भी छोड़ देते हैं कि बस्तर का माओवाद बस्तर के आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व वास्तव में करता है या नहीं, सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण तथ्य कि बस्तर का माओवादी, माओवाद को जानता समझता भी है या नहीं इस विमर्श को भी छोड़… Continue reading

भ्रांतियों से मुक्त होकर रचनात्मक कान्फ्लिक्ट-रिजोलूशन की गतिमान प्रक्रियाओं को समझने से ही बस्तर में कल्लूरी जैसे पुलिस अधिकारियों की जरूरत व योगदान को समझना संभव हो सकता है

सामाजिक यायावर प्रस्तावना मेरा निवेदन स्वीकारें और खुले दिमाग से व्यवहारिकता के साथ इस लेख को पढ़ने का प्रयास कीजिए। लेख कुछ लंबा है इसलिए धैर्य की भी महती जरूरत है। यदि हम बस्तर क्षेत्र में कान्फ्लिक्ट रिजोलूशन में अपना योगदान देना चाहते हैं तो हमें बस्तर को वास्तविक धरातल से समझना पड़ेगा। बस्तर को समझने के लिए हमें पूर्वाग्रहों, पक्षपातों, पूर्वधारणाओं, भ्रांतियों व फ्रैबीकेटेड-तथ्यों आदि से मुक्त होना पड़ेगा।… Continue reading

खूबसूरत यादें लिए लौट चले शताब्दियों तक परित्यक्त रहे क्षेत्र अबुझमाड़, बस्तर के बच्चे अपनी दुनिया की ओर (फोटो लेख)

Vivek “सामाजिक यायावर” मेरे देश के सैकड़ों सालों से अछूते रहे आदिवासी क्षेत्र अबुझमाड़ के बच्चे बाहरी दुनिया को देखने जानने समझने आए। यदि मैं भारत में होता तो किसी भी कोने से इन बच्चों के स्वागत के लिए पहुंचता भले ही असुविधा का सामना करना पड़ता क्योंकि मामला बच्चों के स्वागत का था। उन बच्चों के स्वागत का जिनको हमारी दुनिया के बारे में पूर्वाग्रह से भर कर विद्रोही बना… Continue reading

आजाद भारत का अनोखा दिन – सैकड़ों वर्षों तक परित्यक्त रहे क्षेत्र अबुझमाड़ के बच्चों से भारत के राष्ट्रपति मिले और विशिष्ट अतिथियों जैसा आदर व स्नेह देते हुए स्वादिष्ट भोजन कराया

Vivek “सामाजिक यायावर” ढंके की चोट पर पूरी ताकत से कहना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह जी के दिशा निर्देशन में बस्तर में चल रहे कान्फ्लिक्ट रिजोलूशन की दिशा में किए जाने वाले दूरदर्शी व जमीनी रचनात्मक कार्यों ने बस्तर का वास्तविक चेहरा बहुत ही अधिक बदला है। इसी कड़ी में अबुझमाड़ जैसे सैकड़ों वर्षों से परित्यक्त क्षेत्र का विकास का युगकालीन इतिहास रचने वाली टामन सिंह सोनवानी… Continue reading

अबुझमाड़ में इतिहास रचती टामन सिंह सोनवानी IAS, की प्रशासनिक टोली

Vivek “सामाजिक यायावर”मुझसे बहुत लोग असहमत रहते हैं इसके बावजूद मेरा दृढ़ता पूर्वक मानना है कि बस्तर में रमण सिंह जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासन संघर्ष-समाधान के लिए दीर्घकालिक रचनात्मक समाधान-प्रयासों के साथ प्रयासरत है। समाधान के लिए किए गए प्रयासों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण यह होता है कि जो जमीन पर कार्य करने जा रहा है, वह व्यक्ति कैसा है, उसकी सोच, उसकी मानसिकता, उसकी क्षमता, उसका अपना… Continue reading