क्या वैवस्वत मनु के राज्याभिषेक से सप्तर्षि संवत प्रारम्भ हुआ? — Dr Surendra Bisht

Dr Surendra Bisht भारतीय परंपरा में उपलब्ध सबसे प्राचीन सप्तर्षि संवत है जो 6777 ईसा पूर्व (6777 BCE) से प्रारंभ होता है। इसकी जानकारी पुराणों में उपलब्ध है और पंडित चंद्रकांत बाली जी का निष्कर्ष है कि इसे यूनानी इतिहासकारों ने भी लिखकर सुरक्षित किया है। उन्नीसवीं सदी (1883) में ‘बुक ऑफ इंडियन इराज’ के लेखक कंनिंगघम ने भी इस 6777 ईसा पूर्व से प्रारंभ होने वाले सप्तर्षि संवत को… Continue reading

सरकारी नौकरी प्रतियोगी परीक्षा के छात्र की कहानी — Er Akhilesh Pradhan

Er Akhilesh Pradhan अगर पाठक भावुक कर देने वाले किसी लेख की उम्मीद में हैं तो आपको इस लेख का पहला पैराग्राफ ही निराश कर सकता है, इसलिए आप यहीं से पढ़ना बंद कर सकते हैं।एक प्रतियोगी परीक्षा का छात्र ग्रेजुएट होने के बाद जिस दिन सरकारी नौकरी की चाह में कोंचिग/ट्यूशन लेना शुरू करता है। पहले दिन से ही उसके भीतर की अभूतपूर्व संभावनाओं का ह्रास होना शुरू हो… Continue reading

कोरोना :: लाकडाउन बनाम प्रवासी महापलायन — Bimal Siddharth

Bimal Siddharth मज़दूरों का पलायन जब शुरू हुआ तो मुझे भी लगा कि उन्हें लॉक डाउन का पालन करना चाहिए। जहाँ हैं वहीं रुक कर करोना संक्रमण को रोकना चाहिए। लॉक डाउन का प्रधानमंत्री का फ़ैसला भी जायज़ लगा था। लगा कि सरकार करोना संकट के प्रति गम्भीर है और युद्ध स्तर पर योजनाएँ बनाते हुए कार्यवाई करेगी। किसी भी वाइरस संक्रमण को रोकने का पहला क़दम टेस्टिंग है। इसके… Continue reading

भारत में स्वास्थय सेवाओं का हाल — Prof Abhishek K Pandey

Abhishek Kumar PandeyAssistant ProfessorDepartment of Botany,Kalinga University, Raipur, Chhattisgarh पूरे विश्व के साथ- साथ भारत की लड़ाई भी कोरोना से चल रही है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और उनकी दूरदर्शिता के कारण भारत यूरोप जैसी विस्फोटक स्थिति का सामना नहीं कर रहा नहीं तो हालात बद से बदतर होते तथा किसी भी सरकार के लिए इसका सामना करना बिल्कुल असंभव हो जाता वर्तमान में इस लेख के लिखे… Continue reading

तुम अपने बच्चों से तुरंत क्षमा मांगो — Prof Puneet Shukla

Prof Puneet Shukla ​तुमअपने उन बच्चों सेतुरन्त क्षमा माँगोजिनको तुमनेकेवल इस बात पर पीट दियाक्योंकि उन्होंने तुम्हारी बात नहीं मानी। तुमअपने उन बच्चों सेतुरन्त क्षमा माँगोजिनको तुमनेकेवल इसलिए मार दिया या छोड़ दियाक्योंकि उन्होंने अपनी पसन्द का जीवनसाथी चुना। तुमअपने उन पड़ोसियों सेतुरन्त क्षमा माँगोजिनको तुमनेकेवल इसलिये नफ़रत कियाक्योंकि वे दूसरे धर्म, जाति या विचारधारा के व्यक्ति थे। तुमअपने उन पड़ोसियों सेतुरन्त क्षमा माँगोजिनको तुमनेकेवल इसलिये सज़ा दियाक्योंकि उनके पूर्वजों ने कुछ गलतियाँ… Continue reading

सौ से अधिक तालाबों के पुनरुद्धार व निर्माण कार्यों में भयंकर भ्रष्टाचार की जांच : जलपुरुष राजेंद्र सिंह राणा थे ब्रांड अम्बेसडर — Ashish Sagar

Ashish SagarEnvironment Representative,Ground Report India उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार में बुंदेलखंड के 101 तालाबों के पुनरुद्धार-खुदाई कार्यो की वर्तमान भाजपा सरकार ने स्थानीय लोगों द्वारा की गई अनियमितता की जांच की मांग को स्वीकार करते हुए जांच शुरू कराई। महोबा के चंदेलकालीन 56 बड़े तालाबों में 100 करोड़ रुपये से हुआ था मिट्टी निकासी का काम। जलनिगम /सिंचाई विभाग महोबा के अधिशाषी अभियंता समेत तीन अभियंताओं पर… Continue reading

जेनयू जैसे संस्थान कैसे सामंती मानसिकता, अवतारवाद के आवरण में नेतृत्व के नाम पर समाज को पीछे धकेलते है।

Nishant Rana​Director and Sub-Editor, ​Ground Report India (Hindi) जेएनयू विरोध के नाम पर मुख्यत: हमें जो सुनाई दिखाई पड़ता है वह यह है कि जेएनयू में लड़के लड़कियां सेक्स कर लेते है, कंडोम का प्रयोग किया जाता है, किसी खास राजनैतिक विचारधारा को ज्यादा सपोर्ट करते है, देश विरोधी गतिविधियां होती है आदि आदि बातों को आगे बढाते हुए करते है।ऐसा करने वाले अधिकतर लोग जो हमें दिखाई पड़ते है वह… Continue reading

नया राष्ट्रगान

Rajneesh SachanFounder, MadhyaMargEditor, Ground Report India (Hindi) अपने अतीत की महानता के मिथ्या गर्व में डूबा एक देश थाकिसी दूसरी आकाशगंगा मेंकिसी और ग्रह परकिसी और प्रजाति के लोगों का उनकी भाषा से हिंदी में भावानुवाद किया जाए तो कुछ यूँ होगा कि-वे खुद को विश्व गुरु मानते थे ख़ैरउनकी भाषा में उनका भी हमारी तरह एक राष्ट्रगान थाजैसे हमारा अपना ‘जन गण मन’उनका संविधान थासंसद थी समूचे लोकतंत्र जैसी कोई व्यवस्था थी तो… Continue reading

मानसिक बलात्कार

Nishant Rana​Director and Sub-Editor, ​Ground Report India (Hindi) बच्चें को पैदा होने के दिन से भारतीय समाज में बच्चों के साथ उनकी इच्छा के विरुद्ध कार्य करना शुरू कर देता है जाता है।जब बच्चे के किसी कार्य से माता-पिता शिक्षक आदि को यदि जरा भी तकलीफ या जरा भी जिम्मेदारी बढ़ी महसूस होती है केवल तब ही बच्चे से पूर्ण व्यक्ति होने के अंदाज में डांटा फटकारा जाता है। अन्यथा हर… Continue reading

संघ परिवार (RSS) पोषित आर्थिक नीतियों से देश में गहराता आर्थिक संकट — Dr Surendra Singh Bisht

Dr Surendra Singh Bisht​ ​सर्वप्रथम एक उद्घोषणायह लेख संघ परिवार की आलोचना करने के लिए नहीं लिखा है, बल्कि इस लेख का उद्देश्य समाज को चेताना है और संघ परिवार के विवेक को झकझोरना है। मोटे तौर पर इस विषय में दो लेख पिछले वर्ष लिख चुका हूँ, पर तब संघ परिवार को सीधे आरोपी के पिंजड़े में नहीं खड़ा किया था। वैसे संघ परिवार से जुड़े अनेक लोग लेखक… Continue reading