मानवाधिकार का वर्तमान संदर्भ और पुलिस-प्रशासन की भूमिका —— Ashok Kumar Verma

Ashok Kumar Verma IPS (Rtd)WriterMA (Philosophy), Allahabad University पुलिस द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन के प्रकरण आजकल प्रायः रोज़ ही देखने, सुनने और पढ़ने को मिलते रहते हैं। जनसामान्य के साथ पुलिस के दुर्व्यवहार, मारपीट, उत्पीड़न, यातना  आदि के प्रकरण समाचार-पत्रों की अक्सर सुर्खियाँ बनते रहते हैं। मारपीट और यातना के कुछ प्रकरणों में पीड़ित की मृत्यु तक हो जाती है। मृत्युवाले प्रकरणों में कुछ दिन अख़बार और मीडिया में चर्चा होता… Continue reading

रक्षाबंधन — Er Brij Umrao

Er Brij Umrao भाई बहन का प्यार,यह राखी का त्योहार।बहना दूर से चलकर आई,कम न हो अपना प्यार।।प्रेम प्यार सुचिता का संगम, न हो मलाल मन में जड़ जंगम। भ्रात प्रेम की धारा बहती, मन में न साल न कोई गम।। नहीं कामना कुछ पाने की, भैया तू निश्चिंत रहे। प्रेम दिवस पर मिल तेरे से, हर पलछिन आनंद रहे।। स्नेह प्रेम की यह गंगा, अविरल बहती रहे सदा। मिल… Continue reading

संस्कार — Er Brij Umrao

Er Brij Umrao जन्म प्रक्रिया से शूदक हो,संस्कार से होता पावन।प्रेम प्यार स्नेह समर्पण, अन्तर्मन होता उत्प्लावन।। संस्कार से सेवित शिशु की, अपनी छटा निराली। तीक्ष्ण बुद्धि कौशल की मूरत, पुण्य पल्लवित डाली।। तीन ऋणों को साथ ले चले, देव पित्र अरु गुरु का कर्ज। सेवा में तीनों के तत्पर, सदा निभाता अपना फर्ज।। पुष्पित पोषण स्वस्थ संरक्षण, शिशु को करे प्रभावित। आदर्श संस्कृति से पोषित, प्रेम रस रहे प्रवाहित।।… Continue reading

आजादी — Hukum Singh Rajput

Hukum Singh Rajput भागीग्यो उ अंगरेज जणीने धरती गेणे राखी थी! चांदी सोनो घणो लुटायो फिर भी खन्दी बाकी थी!!शहीदों के बलिदान से या धरती अपणी वयीगी रे! आजादी की रक्षा करलो या जवान वयीगी रे!!मंगल पांडे का बलिदान था बलिदान झांसी की राणी का! लाखों ने दिया था बलिदान उनकी याद बाकी रयीगी रे!! आजादपूरब में सुबास चन्द्र था पश्चिम में बापू प्यारा! भगत सिंह का काम था था… Continue reading

जनता को मूर्ख बनाते हैं — Ramesh Chand Sharma

Ramesh Chand Sharma सावधान जनता समझ रही है स्वदेशी के गीत गाते थे, स्वदेशी नाम से ललचाते थे, स्वदेशी आन्दोलन चलाते थे, सड़कों पर नजर आते थे, अफवाह, झूठ खूब फैलाते है, अब क्या कर रहे हो भाई।।बिना बुलाए आते थे,झूठा संवाद चलाते थे, झूठी कसमें खाते थे, नारे खूब लगाते थे, सत्ता के लिए छटपटाते थे, सत्ता कैसे भी पाते है।।जनता को मूर्ख बनाते है, ढोंग खूब रचाते है,… Continue reading

शाम ए गम की कसम, आज ग़मगीन है हम.. : दिलीप कुमार को श्रद्धांजलि — Vidya Bhushan Rawat

Vidya Bhushan Rawat 1922-12-11 to 2021-07-07दिलीप कुमार हिनुद्स्तानी सिनेमा का सबसे बड़ा नाम जिसे देख कर हम बड़े हुए और सिनेमा के रुपहले परदे पर जो नायको का नायक था. दिलीप कुमार उस युग का प्रतीक भी है जिसकी नीव आज़ादी के आन्दोलन के दौरान पडी और जिसे अपनी वैचारिक निष्ठा से प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने सींचा. किसी भी देश काल का सिनेमा उस देश की समकालीन राजनैतिक परिद्रश्य… Continue reading

क्या वैवस्वत मनु के राज्याभिषेक से सप्तर्षि संवत प्रारम्भ हुआ? — Dr Surendra Bisht

Dr Surendra Bisht भारतीय परंपरा में उपलब्ध सबसे प्राचीन सप्तर्षि संवत है जो 6777 ईसा पूर्व (6777 BCE) से प्रारंभ होता है। इसकी जानकारी पुराणों में उपलब्ध है और पंडित चंद्रकांत बाली जी का निष्कर्ष है कि इसे यूनानी इतिहासकारों ने भी लिखकर सुरक्षित किया है। उन्नीसवीं सदी (1883) में ‘बुक ऑफ इंडियन इराज’ के लेखक कंनिंगघम ने भी इस 6777 ईसा पूर्व से प्रारंभ होने वाले सप्तर्षि संवत को… Continue reading

सरकारी नौकरी प्रतियोगी परीक्षा के छात्र की कहानी — Er Akhilesh Pradhan

Er Akhilesh Pradhan अगर पाठक भावुक कर देने वाले किसी लेख की उम्मीद में हैं तो आपको इस लेख का पहला पैराग्राफ ही निराश कर सकता है, इसलिए आप यहीं से पढ़ना बंद कर सकते हैं।एक प्रतियोगी परीक्षा का छात्र ग्रेजुएट होने के बाद जिस दिन सरकारी नौकरी की चाह में कोंचिग/ट्यूशन लेना शुरू करता है। पहले दिन से ही उसके भीतर की अभूतपूर्व संभावनाओं का ह्रास होना शुरू हो… Continue reading

कोरोना :: लाकडाउन बनाम प्रवासी महापलायन — Bimal Siddharth

Bimal Siddharth मज़दूरों का पलायन जब शुरू हुआ तो मुझे भी लगा कि उन्हें लॉक डाउन का पालन करना चाहिए। जहाँ हैं वहीं रुक कर करोना संक्रमण को रोकना चाहिए। लॉक डाउन का प्रधानमंत्री का फ़ैसला भी जायज़ लगा था। लगा कि सरकार करोना संकट के प्रति गम्भीर है और युद्ध स्तर पर योजनाएँ बनाते हुए कार्यवाई करेगी। किसी भी वाइरस संक्रमण को रोकने का पहला क़दम टेस्टिंग है। इसके… Continue reading

भारत में स्वास्थय सेवाओं का हाल — Prof Abhishek K Pandey

Abhishek Kumar PandeyAssistant ProfessorDepartment of Botany,Kalinga University, Raipur, Chhattisgarh पूरे विश्व के साथ- साथ भारत की लड़ाई भी कोरोना से चल रही है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और उनकी दूरदर्शिता के कारण भारत यूरोप जैसी विस्फोटक स्थिति का सामना नहीं कर रहा नहीं तो हालात बद से बदतर होते तथा किसी भी सरकार के लिए इसका सामना करना बिल्कुल असंभव हो जाता वर्तमान में इस लेख के लिखे… Continue reading