नया राष्ट्रगान

Rajneesh Sachan

Founder, MadhyaMarg
Editor,
Ground Report India (Hindi)

अपने अतीत की महानता के मिथ्या गर्व में डूबा एक देश था
किसी दूसरी आकाशगंगा में
किसी और ग्रह पर
किसी और प्रजाति के लोगों का

उनकी भाषा से हिंदी में भावानुवाद किया जाए तो कुछ यूँ होगा कि-
वे खुद को विश्व गुरु मानते थे

ख़ैर
उनकी भाषा में उनका भी हमारी तरह एक राष्ट्रगान था
जैसे हमारा अपना ‘जन गण मन’
उनका संविधान था
संसद थी समूचे लोकतंत्र जैसी कोई व्यवस्था थी

तो वाक़या वहाँ का है
दूर किसी और आकाशगंगा के किसी ग्रह के किसी एलियन समाज का
सहूलियत के लिए हम हिंदी भावानुवाद कर लेते हैं
सहूलियत के लिए हम अपने देश के तंत्र के चश्मे से उनके तंत्र और उस लोक को देख लेते हैं
अंत में फिर यह तो याद रखना ही है कि यह कहीं और की बात है..

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नए राष्ट्र में जनता सारी राष्ट्रभक्त हो
राष्ट्र्गान भी नया हो
इसके साथ प्रधानमंत्री ने रखी
और एक इच्छा -
‘चारण-भाषा ‘
गूंज रही थीं दोनो सदनों
में मेज़ों की
थपथपाहटें

जन-गण-मन के
अधिनायक
विजयी रहे हैं हर मोर्चे पर
नए राष्ट्र के भाग्य विधाता तो हम हैं ही
इस पर नहीं
किसी को अब संदेह
लिहाज़ा
बेमतलब हैं ऐसी बातें
अश्वमेघ को थामे
चक्रवर्ती गृहमंत्री
ने ललकारा

फिर
विदेश मंत्री ने रखा
जान मारू सुझाव-हम विश्वगुरू हैं
क्यों हो फिर हमको मंज़ूर
वसुधैव कुटुम्बकम से
एक बालिश्त कम
राष्ट्र्गान में नाम हों अपने सभी पड़ोसी
मुल्क़ों के
आख़िर
गौरवशाली अतीत में वे सब इसी राष्ट्र का
हिस्सा थे और
सम्पूर्ण विश्व को एक दिन इसी राष्ट्र का हिस्सा होना ही है

खड़े हुए तब जाने-माने
पर्यावरणविद्
राज्यसभा की मिली थी कुर्सी
जिनको
पिछले साल
इन्होंने प्रदूषण में किसान और
मज़दूरों की साज़िश का पर्दाफ़ाश किया था
एक और पर्दाफ़ाश उन्होंने किया -
कि
नदियों का विकास में योगदान अब नहीं रहा
सो
नदियों के नाम न रखे जाएँ
राष्ट्र्गान में

रक्षा मंत्री ने समंदरों और पर्वतों की
घनघोर आलोचना कर डाली
वित्तमंत्री ने की
ताक़ीद कहीं नोटबंदी और जीएसटी
धोखे से भी छूट न जाएँ

सभी सदस्यों ने बारी बारी से
रखे अपने सुझाव
और
सबसे अंत में सबसे महत्वपूर्ण सुझाव
महामहिम राष्ट्रपति ने भिजवाया -
राष्ट्रगान में केवल मंगलवार नहीं सातो दिन रखवाए जाएँ.

राष्ट्रगान फिर लिखा गया कवियों की भीड़ में
और हज़ारों पत्रकार एंकर
टेलीवीजन
और अख़बारों में बता रहे थे
दुनिया में सबसे बेहतर
अपना राष्ट्रगान है
अनगिनत कट्टर राष्ट्रभक्त नायक नायिकाओं ने फिर
भव्य राममंदिर के विशाल प्रांगण में
इस नए राष्ट्र के नए राष्ट्रगान को
पंचम स्वर में गाया

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मगर यह तो भूलने वाली बात नहीं है कि
यह तो करोड़ों अरबों प्रकाश वर्ष दूर की बात है

Rajneesh Sachan

He is an engineer, social thinker, writer and journalist.

He is a founder of MadhyaMarg and an editor of the Ground Report India (Hindi).