Pooja Priyamvada[divider style=’right’]
मैं वो अजीब औरत हूँ
जिसे दुनिया में सबसे पहले इश्क़ हुआ
अपनी भूरी आँखों से
जिसने ज़रूरी नहीं समझा कभी भी
छुपाना अपने जिस्म या रूह को
या उन दोनों की चाहनाओं को
मैं वो अजीब औरत हूँ
जिसे कभी पसंद नहीं था अपना नाम
लेकिन उसने कभी बदला नहीं
जिसने चूमीं दरवेशों की चौखटें
रूह के नरम लबों से बिना छुए ही
और हर बच्चे में एक बुद्ध देखा
मैं वो अजीब औरत हूँ
जिसने कभी नहीं रखी
रिश्तों में शर्तें,कसमें
और हर बार लौट जाने दिया
हर महबूब को
दोबारा लौटने के वायदे के बगैर
मैं वो अजीब औरत हूँ
जिसने अपने दिल की सारी सुर्ख नरमी
और अपनी रूह की तमाम ख्वाहिशें
लिख दी एक अनलिखी वसीयत में
उसके नाम जिसने भी मोहब्बत से
मेरा नाम लिया मैं वो अजीब औरत हूँ
जिसने हमसफ़र होना कबूल किया
और फिर चलती रही अकेले ही
बिना पीछे मुड़े उसे देखने के लिए
जो राह बदल चुका

मैं वो अजीब औरत हूँ
जिसने माफ़ कर दिया
अपने उन अजन्मी औलादों को भी
जिन्होंने इंकार कर दिया मेरी कोख को
बख्शना अपनी मुस्कराहट
और फिर भी बिना माँ होने के अहम् के
उनकी नन्ही हथेलियों में रख दी
अपनी सारी दुआएँ मैं वो अजीब औरत हूँ
जो मर कर भी ज़िन्दा रही
दर्द जितना बढ़ा बढ़ाती रही उसका हौंसला
उतनी बड़ी मुस्कराहट से
जिसने नदियों के घिसे हुए
गोल पत्थरों में क़ायनात देख ली
अपने ग़म पर कभी न बहाये दो अश्क़ लेकिन
किसी अजनबी के अनजान दुःख के लिए
महबूब-ए -इलाही से शिकायतें हज़ार कीं
मैं वो अजीब औरत हूँ
जो चाहती है किसी समंदर केआगोश में दफ़न होना
कि जो मंदिरों में पूजी जाती हैं
या कब्रों में दफ़्न हैं
जिनके लिए घर बनाये हैं
शायरी लिखी है दुनिया ने
वो तो आम अच्छी औरतें हैं
मैं एक अजीब औरत हूँ

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