बेसन पूड़ी, इमली की चटनी व खुली कड़ाही सब्जी

Vivek "सामाजिक यायावर"

बेसन पूड़ी:

बेसन व बेसन की मात्रा की दुगुनी मात्रा में गेहूं का आटा अलग-अलग ले लीजिए। जीरा, सौफ, खड़ी धनिया व अजवाइन को इतनी मात्रा में तवे पर भून कर ओखली में पीस लीजिए कि बेसन व गेहूं के आटे दोनो के लिए बराबर मात्रा में हो जाए। जीरा, सौफ आदि कि भूनने के बाद आग बंद करके गर्म तवे पर हल्दी पाउडर, सोंठ पाउडर, हींग पाउडर को भून लीजिए। इनकी मात्रा भी उतनी हो कि बेसन व गेहूं के आटे दोनो के लिए हो जाए।

एक कड़ाही में थोड़े से तेल में बेसन को हल्का भूरा होने तक भूनिए। जब बेसन हल्का भूरा होने लगे तब इसमें ओखली में पिसी हुई सौंफ, जीरा, धनिया व अजवाइन तथा हल्दी, सोंठ व हींग मिला दीजिए। स्वादानुसार नमक भी मिला लीजिए। जब बेसन हल्का होने तक भुन जाए तब इसको किसी खुले पात्र में रख कर ठंडा होने के लिए रख दीजिए।

गेहूं के आटे में ओखली में पिसी हुई सौंफ, जीरा, धनिया व अजवाइन तथा हल्दी, सोंठ व हींग मिलाकर गूंथिए। ठीक से गूंथने के बाद कपड़े से ढककर रख दीजिए।

ठंडे हो चुके बेसन में तेल मिलाइए फिर थोड़ा-थोड़ा पानी डाल कर गूंथिए। गेहूं के आटे से जितनी लोइयां बन सकती हों उतनी लोइयां बेसन की भी बना लीजिए।

गेहूं के गुंथे हुए आटे की लोइयां बनाइए। आटे की लोई को हाथों से बड़ा करके उसके बीच में बेसन की लोई रखकर आटे की लोई को चारों ओर से अच्छी तरह बंद कर बेलिए। 

कड़ाही में तेल गर्म कीजिए और मध्यम आंच में इन पूड़ियों को तलिए। यदि आटे व बेसन की गुथाई अच्छी तरह से हुई होगी तो आपकी पूड़ी दोनो ओर से फूलेगी।

बेसन पूड़ी जैसे ही आप सत्तू पूड़ी भी बना सकते है। सत्तू पूड़ी थोड़ी आसान रहती है क्योंकि सत्तू पहले से ही भुना होता है इसलिए उसको भूनने की जरूरत नहीं रहती, चाहें तो कड़ाही में थोड़ा गर्म कर सकते हैं। शेष बेसन पूड़ी जैसे ही।

इमली व गुड़ की चटनी:

इमली को गर्म पानी में डालकर दो मिनट तक गर्म करते रहें। फिर 15-20 मिनट के लिए ठंडा होने के लिए छोड़ दीजिए। खूब अच्छी तरह मसल दीजिए।

जीरा भून व ओखली में कूट लीजिए, सोंठ का पाउडर, पिसी लाल मिर्च, कुटी हुई खड़ी धनिया, खुशबू के लिए कुछ देर तक भुनी हुई फिर ओखली में कुटी हुई थोड़ी सी सौंफ, हींग मिलाकर रख लीजिए।

जितनी इमली ली, उसका आधा गुड़ ले लीजिए। इमली में नमक डालकर फिर से धीमी आंच में गर्म करिए, गुड़ डाल दीजिये और गुड़ के पिघल कर मिलने तक चलाते रहिए। पिघलने तक गुड़ को टुकड़ों को चम्मच से तोड़ते व मसलते रहिए। गुड़ पिघलने के बाद आंच बंद कर दीजिए तथा मसाले अच्छी तरह मिलाने के बाद ठंडा होने तक रख दीजिए।

इस चटनी को खाते ही आप समोसा के साथ होटलों में मिलने वाली इमली चटनी को भूल जाएंगे।

बेसन पूड़ी, इमली-गुड़ चटनी व खुली कड़ाही सब्जी

खुली कड़ाही में पकाई गई सब्जी:

फोटो में जो सब्जी (आलू, प्याज, लहसुन, फली, मटर इत्यादि) है उसकी भी खासियत है। खासियत यह है कि लोहे की कड़ाही में पकाई गई है वह भी लगातार तेज आंच में बिना ढके हुए खुली कड़ाही में पकाई गई है। इस पद्धति में सब्जी को लगातार चलाते रहना पड़ता है। थोड़ा अटपटा है लेकिन सब्जी में स्वाद बहुत रहता है।

About author: 
Vivek Umrao Glendenning "SAMAJIK YAYAVAR"

He is an Indian citizen & permanent resident of Australia and a scholar, an author, a social-policy critic, a frequent social wayfarer, a social entrepreneur and a journalist;He has been exploring, understanding and implementing the ideas of social-economy, participatory local governance, education, citizen-media, ground-journalism, rural-journalism, freedom of expression, bureaucratic accountability, tribal development, village development, reliefs & rehabilitation, village revival and other.

For Ground Report India editions, Vivek had been organising national or semi-national tours for exploring ground realities covering 5000 to 15000 kilometres in one or two months to establish Ground Report India, a constructive ground journalism platform with social accountability.

He has written a book “मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर” on various social issues, development community practices, water, agriculture, his groundworks & efforts and conditioning of thoughts & mind. Reviewers say it is a practical book which answers “What” “Why” “How” practically for the development and social solution in India. 

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