चुनाव में हमें कोई – अपने जाल में फंसाता है

Vimal Kumar

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तुम शराब पीते हो
और मैं उसे हाथ तक नहीं लगाता
आओ हम इस बात पर
एक दूसरे को नीचा दिखाएँ

तुम गाय का दूध पीते हो
और हम उबले अंडे खाते हैं
आओ इस बात पर
हम एक दूसरे को चाकू दिखाएँ

तुम रोमियो हो
इसलिए लफंगे हो
मैं कृष्ण हूँ
तो सच्चा प्रेमी हूँ

आओ उस बात पर
हम बात पर एक दूसरे को चिढाये

तुम हमारी कौम के नहीं हो
तो देशद्रोही हो
मैं इस मुल्क का हूँ
तो मैं देशभक्त हूँ
आओ इस बात पर
एक दूसरे के खिलाफ नफरत फैलाएं

क्या अब इस मुल्क में
सच बोलनेवाला कोई नहीं बचा है
जो यह कहे
तुम भी बेरोजगार हो
और हम भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं

तुम भी परेशान हो
हम भी परेशान हैं
तुम भी इस देश की धड़कन हो
हम भी इस देश की जान हैं.

तुम भी अब केवल मतदाता हो
हम भी केवल मतदाता हैं
हर बार
चुनाव में हमें कोई
अपने जाल में फंसाता है.

 

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