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उद्योगपतियों की नौटंकी, मानव विकास सूचकांक और हमारा वाला विकास — Rajneesh Sachan

Rajneesh Sachan

Founder, MadhyaMarg
Editor,
Ground Report India (Hindi)

लोगों की जिस सोच, इच्छा, उम्मीद और मांग के साथ भाजपा सत्ता में आई थी, भाजपा सरकार वही कर रही है। लोगों ने भाजपा को वोट न तो नौकरियों के लिए दिया था, न जीवन स्तर बेहतर करने के लिए दिया था, और न ही भारत को कोई आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए दिया था।

हमने भाजपा को वोट दिया था देश को विश्वगुरु बनाने के लिए, देश को हिन्दूराष्ट्र बनाने के लिए, मुल्लों को औक़ात में रखने के लिए, स्मार्ट सिटी और बुलेट ट्रेन वाला विकास करने लिए, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे छोटे पड़ोसियों पर धौंस जमाकर रखने के लिए (ताकि अमेरिका और चीन की चाटुकारिता करने में अहम् को जो चोट पहुँचती है उसकी भरपाई की जा सके), पुराने गौरवशाली भारतवर्ष की पुनर्थापना के लिए, राम राज के लिए .... आदि आदि। असली कारण यही और इसी तरह के थे। बाकी बोला और सुना बहुत कुछ गया है मगर वह सब सिर्फ बोलने और सुनने के लिए था। बोलने वाला भी और सुनने वाला भी दोनों जानते हैं इसमें सच क्या है और लफ़्फ़ाज़ी कितनी है।

लोकसभा चुनावों में विभिन्न दलों को कुल कॉर्पोरेट फंडिंग लगभग 1100 करोड़ हुई। इसमें 1000 करोड़ के आसपास भाजपा के लिए हुई और 100 करोड़ में बाकी सारी पार्टियां। तो जाहिर है व्यापारियों और पूंजीपतियों ने इकतरफा भाजपा को चुना था। आगे फिर चुनेंगे इसलिए जो दो- चार बिज़नेसमैन हल्ला मचा रहे हैं वह सब नौटंकी है। जिसे सीधा नुकसान हुआ है सिर्फ उसी को तकलीफ है बाकी सब खुश हैं। लेकिन ऐसा तो पूरे समाज का ही हाल है। जिसने सीधा सीधा कोई नुकसान झेला है बस वही विरोध कर रहा है बाकी सब खुश हैं। परोक्ष नुकसान के लिए दूसरे कई कारण उन्हें समझा दिए गए हैं या खुद उन्होंने गढ़ लिए हैं।

सरकारी आंकड़ों में कश्मीर, मानव विकास सूचकांक के हर मामले में गुजरात से कहीं आगे है। आखिर फिर कौन सा विकास हम कश्मीर में देखना, करना चाहते हैं? तो असली बात यह है कि भारतीय समाज के लिए विकास का अर्थ मानव विकास सूचकांक जैसा कोई भी विकास कभी रहा ही नहीं है। भारतीय समाज के लिए विकास का अर्थ है गाड़ियां,  बंगले, पुल, मॉल, ऊँची ऊँची बिल्डिंगें, बड़े बड़े उद्योगपति जो दुनिया के टॉप 10 में आते हों.... आदि ।

भले ही यह सब भोगने वाले 2-4 % लोग ही हों। बाकी इस उम्मीद में इस विकास का समर्थन करते जाते हैं कि कभी कोई चमत्कार होगा और हम नहीं तो हमारे बच्चे इन गाड़ियों में घूमेंगे, ऐसे उद्योगपति बनेंगे, ऐसे बंगलों में रहेंगे ..आदि आदि। इसीलिए बचपन से हम अपने बच्चों के दिमाग में यही सब भरते जाते हैं।

तो कश्मीर में भी अब यही विकास होगा। मानव विकास सूचकांक में तो बांग्लादेश और श्रीलंका ने भी हाल फ़िलहाल हमें पीछे छोड़ दिया है। लेकिन कुछ अपवाद को छोड़कर किसी भारतीय को इससे कोई समस्या हुई क्या? हमें तो चीन बनना है, अमेरिका बनना है यहाँ तक कि इज़राइल बनना है ... वह भी कोरी लफ़्फ़ाजी और ढकोसले के बूते ।भूटान के बारे में आप सर्वे करा लीजिए, कुछ अपवाद छोड़कर हर भारतीय उसे बहुत गरीब और पिछड़ा देश कहेगा।

इसका सीधा अर्थ है कि हम इंसानों के जीवन और जीवन स्तर को कतई प्राथमिकता नहीं देते। और जो समाज जीवन स्तर को प्राथमिकता नहीं देता वह निहायत ढोंगी,क्रूर,सामंती और अलोकतांत्रिक होता है। और ये सारे गुण हममे हैं। और एक ढोंगी, क्रूर और सामंती समाज अपने में से सबसे बड़े ढोंगी, सबसे ज़्यादा क्रूर और सबसे अधिक सामंती प्रवृत्ति के व्यक्तियों को ही अपने नेता के रूप में चुनेगा।

यह सच है कि कोई सरकार, कोई नेता जादू करके देश में सब कुछ अचानक ठीक नहीं कर सकता वैसे ही सच यह भी है कि कोई नेता या सरकार अचानक जादू से सबकुछ बरबाद भी नहीं कर सकती। मोदी या भाजपा पर ही सारा दोष मढ़ देना देना असली समस्याओं से मुँह चुराना है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि ये लक्षण समाज के अंदर कहीं गहरे बैठे हुए थे जो माकूल वातावरण पाकर मुखर रूप में बाहर आ गए। यह देश यह समाज सही अर्थों में विकास तभी कर सकेगा जब लोग ढोंग की बजाय ईमानदारी से जीवन मूल्यों को अहमियत देना शुरू करेंगे। वर्ना हम जिधर जा रहे हैं वहां आगे ब्राज़ील है अफगानिस्तान है सीरिया है।

Rajneesh Sachan

He is an engineer, social thinker, writer and journalist.

He is a founder of MadhyaMarg and an editor of the Ground Report India (Hindi).



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