Nishant Rana
मैं खुद ही खुद का हौंसला हूँ
मैं अकेला ही खुद के लिए खड़ा हूँ
मैं शौक से लड़ा, मैं खौफ से लड़ा
मैं भूत से लड़ा मैं भविष्य से लड़ा
मैं दिन रात सुबहो शाम से लड़ा
मैं जात धर्म ऊंचनीच भेदभाव से लड़ा
भारी थी सबसे लड़ाई वो
जब मैं अपने आप से लड़ा
जरूरी नहीं इकरंगा हो अकेलापन
बीतने दो पतझड़ मैं रंग हज़ार हूँ
केवल न शौर्य की बात हो
न केवल गर्व की बात हो
प्रेम की भी बात हो
सहजता की भी बात हो
बीती जो लड़ाइयां
यह न मेरी पहचान हो
सुबह की लाली की बात हो
दमकती शाम की धूल की बात हो
पंछियों की बात हो, नदियों की बात हो
न हो लड़ाइयां इसकी भी बात हो
कैसे जिया जीवन
संबंधों की बात हो।
सब पहचान से परे
नितांत अकेले मरने की बात हो

Nishant Rana


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