अंधेरा

Dhiraj Kumar


अंधेरा .....
अत्यंत उदार और लचीला होता है
प्रकाश को अपने सीने से
आर पार जाने देने मे
कोई तकलीफ नही होती उसे
वो न तो प्रकाश को 
पथ भ्रष्ट करता है
और न ही दूषित......

अंधेरा एक गहन चिन्तक की तरह
अपने धुन मे मगन रहता है
वो अचल है ,शाश्वत है ,निराकार है....
उसे कोई फर्क नही पड़ता कि
प्रकाश उसके बारे मे क्या सोचता है
या उसके के साथ क्या सलूक 
करने वाला है

अलबत्ता.....
प्रकाश हमेशा खुराफाती होता है
अंधेरे का अकेलापन और शांति
उसे अच्छा नही लगता 
किसी भी तरीके से
कोई न कोई चेहरा ढूंढ ही लेता है
ताकि उपर पड़ कर 
चेहरे को रौशन कर दे 
......और अंधेरे को तंग तबाह

Dhiraj Kumar

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