मैं तुम हूँ

Puneet Shukla

मैं तुम्हें जानता हूँ
मैं उसे भी जानता हूँ
मैं सबको जानता हूँ।

तुम उसे जानते हो
तुम मुझे नहीं जानते
तुम मुझे जान ही नहीं सकते।

तुम मुझे नहीं जानते, 
इसका मतलब यह नहीं कि तुम असमर्थ हो
दरअसल मुझे जाना ही नहीं जा सकता।

मुझे देखना
तुम्हें देखना है
तुम तुमको नहीं देख सकते।

जो न देखा जा सके
जो न जाना जा सके
वह मैं हूँ।

जहाँ शब्द मौन हो जाएँ
जहाँ इन्द्रियाँ जवाब दे जाएँ
वहाँ मैं हूँ।

तुम 
अपने तक पहुँच जाओ
तो मुझ तक भी पहुँच जाओगे।

मैं 
वह सुगन्ध हूँ
जो पुष्प के अन्तर में है।

मैं 
तुम 
हूँ।

Puneet Shukla