दलाई लामा बनाम तिब्बत –Sanjay Jothe

Sanjay Jothe


Dalai Lama

दलाई लामा जैसे लोग अपने देश और संस्कृति को बर्बाद करके विकसित और सभ्य देशों को सभ्यता और धर्म सिखाते हैं तो बड़ा मजा आता है. ये बिलकुल भारतीय बाबाओं जैसी लीला है. अपने खुद के घर में सडांध और बीमारियाँ फ़ैली है और दूसरों के साफ़ सुथरे घर में जाकर सुगंध, स्वच्छता और सौन्दर्य पर भाषण देते हैं.

इनका अपना ज्ञान पिछली कई सदियों से तिब्बत को लगातार खोखला करता गया. भयानक अंधविश्वास, शोषण और अशिक्षा ने वहां के आम जन को जानवरों जैसी जिल्लत में बनाये रखा. महिलाओं और गरीबों सहित बच्चों के अधिकारों को कुचला गया.

चीन का आक्रमण बहुत बाद में हो रहा है. चीन के आने के पहले ही वहां पुनर्जन्म पर आधारित दलाई लामा नाम की संस्था ने इतना शोषण किया है जिसका कोई हिसाब नहीं. एक पूरा देश और संस्कृति धीरे धीरे बर्बाद की गयी है इन महाशय के द्वारा. ये कहते हैं ये पहले वाले लामा जी के पुनर्जन्म हैं. अगर इनकी बात मान भी लें तो ये और बड़े अपराधी सिद्ध होते हैं.

ये पहले दुसरे या दसवें बारहवें के पुनर्जन्म हैं, इसका अर्थ ये हुआ कि तिब्बत के समाज और संस्कृति को गर्त में पहुंचाने के लिए उन्होंने एक व्यक्ति या एक संस्था के रूप में हर पीढी में खुद ही जरुरी निर्णय लिए हैं.

इसका क्या मतलब हुआ?

यही मतलब हुआ कि आज तिब्बत जो कुछ है वह इन्हीं महाशय की देन है. कोई राष्ट्र या समाज जब इतना लचर और दकियानूसी हो जाए तो अडोस पड़ोस के देश उसपर चढ़ाई कर सकते हैं. चीन ने यही किया. चीन दलाई लामा द्वारा बनाई परिस्थितियों का अपने हित में शोषण कर रहा है.

दलाई लामा से आज तक सही प्रश्न नहीं पूछे गए हैं. उनसे पूछा जाना चाहिए कि तिब्बत की संस्कृति और समाज को नष्ट होने से बचाने के लिए अतीत में क्या किया जा सकता था? फिर उनके चेहरे का रंग देखिये. उनसे ध्यान समाधी, सुख दुःख स्वर्ग नरक या अध्यात्म के चलताऊ सवाल करने से कुछ नहीं होता. ऐसे सवालों का जवाब देना सभी को आता है. उन जवाबों से न आज तक कुछ हुआ है न आगे कुछ होगा.

अब ये सज्जन अपने समाज और संस्कृति की होली जलाकर दुनिया भर में ज्ञान बाँट रहे हैं. ये अच्छा मजाक है. अमेरिकी राजनीति को अगर चीन के खिलाफ एक मोहरे की जरूरत न हो तो ये इन महाशय की महानता अभी तुरंत खो जायेगी.

कम से कम भारतीय ओबीसी, दलितों और स्त्रीयों को इन महाशय से बचकर रहना चाहिए. ये जब भी मिलें इनसे अध्यात्म के नहीं बल्कि तिब्बत के समाज के योजनाबद्ध विनाश के संबंध में सवाल पूछिए. तब देखिये इनका सारा चमत्कार धरा रह जाएगा.

 

Comments

5 responses to “दलाई लामा बनाम तिब्बत –Sanjay Jothe”

  1. सचिन भंडारी

    सटीक, शानदार

    1. धन्यवाद

  2. Siddharth Vimal

    सौ टके की एक बात!

    1. धन्यवाद

  3. harish

    शायद आप तिब्बती दर्शन के पुनर्जन्म को हिन्दू अवतारों के अनुसार देख रहे हैं।
    तिब्बती दलाई लामा के पुनर्जन्म की अवधारणा किसी सर्वशक्तिमान ईश्वर के अस्तित्व के अनुसार न हो कर ,, मानवीय चेतना के विकास अनुरूप मानी जाती है,।
    जहां तक मेरा अध्ययन है , तिब्बती दर्शन के अनुसार चेतना को विकसित कर अपने अगले जन्म का आभास मात्र या कुछ हद तक मां पिता का चुनाव किया जा सकता है।।

    आप सही हो सकते हैं , किंतु लेख की शब्दावली , विश्लेषणात्मक न होकर , आरोपात्मक अधिक है,।

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