बहुजन नायकों और ब्राह्मणवादी गुरुओं का भेद –Sanjay Jothe

Sanjay Jotheगौतम बुद्ध को पता चल चुका था कि उनकी मृत्यु तय हो चुकी है. एक गरीब लोहार के घर जहरीला भोजन खाने से उनके शरीर में जहर फैलने लगा था. गौतम बुद्ध जहर को अपने शरीर में फैलता हुआ अनुभव कर रहे थे. उन्होंने तुरंत घोषणा करवाइ कि वे अब विलीन होने वाले हैं और यह गरीब लोहार भाग्यशाली है कि इसके घर अंतिम भोजन करके मैं विलीन हो… Continue reading

ओशो रजनीश और भारत के बहुजनों का भविष्य –Sanjay Jothe

Sanjay Jotheओशो रजनीश पर जो नयी डॉक्युमेंट्री आई है उसे गौर से देखिये. शीला एक नादान किशोरी की तरह रजनीश से मिलती है. शीला के पिता रजनीश से प्रभावित हैं. शीला को उनके पिता कहते हैं कि ये व्यक्ति अगर लंबा जी सका तो ये दुसरा बुद्ध साबित होगा. हर किशोरी लड़की की तरह शीला भी अपने पिता के इन बाबाजी के प्रति समर्पण से स्वयं भी प्रभावित होती हैं. कुछ… Continue reading

“भारत की घृणा आधारित संस्कृति” –Sanjay Jothe

Sanjay Jothe एक अफ़गान मित्र जो कि वरिष्ठ एन्थ्रोपोलोजिस्ट (मानव-विज्ञानी/समाजशास्त्री) हैं और जो राजनीतिक शरणार्थी की तरह यूरोप में रह रही हैं शाम होते ही कसरत करने लगीं, दौड़ने लगीं, वे अकेली नहीं थीं उनके साथ स्थानीय यूरोपीय लड़कियां और दो अमेरिकी अधेड़ प्रोफेसर भी कसरत कर रहे थे. होटल से लगे मैदान में वे हँसते मुस्कुराते हुए वर्जिश कर रहे थे. ये सब अगले दिन से शुरू होने वाली… Continue reading

आज सावित्री बाई फुले का स्मृति दिवस है। आइये इस महान विभूति को नमन करें -Sanjay Jothe

Sanjay Jothe​​​​​​ आज सावित्री बाई फुले का स्मृति दिवस है। आइये इस महान विभूति को नमन करें। यह दिन भारत की महिलाओं और विशेष रूप से दलितों, ओबीसी, और आदिवासी, मुसलमान महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत के इतिहास में पहली बार किसी स्त्री ने शुद्रातिशूद्र लड़कियों के लिए स्कूल खोले और उन्हें पढ़ाने के लिए संघर्ष किया। सावित्री बाई जब अपने स्कूल में पढ़ाने जातीं थी तब उस दौर के… Continue reading

स्त्री यौनिकता को राष्ट्रवाद या आदर्श समाज की कल्पना से जोड़ने के कारक एवं प्रभाव –Sanjay Jothe

Sanjay Sharman Jothe[divider style=’right’] स्त्री यौनिकता पर सत्र था, मौक़ा था यूरोप, एशिया और अफ्रीका में परिवार व्यवस्था में आ रहे बदलाव पर एक कार्यशाला. यूरोप, खासकर सेन्ट्रल यूरोप में परिवार में बढ़ते आजादी के सेन्स और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता के बीच एक सीधा संबंध है – डेवेलपमेंट स्टडीज, मनोविज्ञान और सोशियोलोजी ने यह स्थापित कर दिया है. यह एक आधुनिक लेकिन स्थापित सच्चाई है. लेकिन क्या महिलाओं की… Continue reading

पश्चिमी दार्शनिक और भारतीय पोंगा पंडित, एक नजर में –Sanjay Jothe

Sanjay Jotheमानव इतिहास की महान विदुषी एरियल ड्यूरेंट जब अपने पति विल ड्यूरेंट के साथ मिलकर विश्व इतिहास और सभ्यता सहित दर्शन के विकास का अत्यंत विस्तृत लेखा जोखा लिख रही थीं, उसी दौर में बर्ट्रेंड रसल भी दर्शन का इतिहास लिख रहे थे. फ्रायड मनोविज्ञान के रहस्य खोल रहे थे, फ्रेडरिक नीत्शे मूल्यों को और ईश्वर को चुनौती दे रहे थे, लुडविन वित्गिस्तीन पूरे तर्कशास्त्र को ही नया रूप… Continue reading

भारत का नैतिक पतन और ब्राह्मणवाद –Sanjay Jothe

Sanjay Jotheभारत का दार्शनिक और नैतिक पतन आश्चर्यचकित करता है. भारतीय दर्शन के आदिपुरुषों को देखें तो लगता है कि उन्होंने ठीक वहीं से शुरुआत की थी जहां आधुनिक पश्चिमी दर्शन ने अपनी यात्रा समाप्त की है. हालाँकि इसे पश्चिमी दर्शन की समाप्ति नहीं बल्कि अभी तक का शिखर कहना ज्यादा ठीक होगा.  कपिल कणाद और पतंजली भी एक नास्तिक दर्शन की भाषा में आरंभ करते हैं, महावीर की परम्परा… Continue reading

महात्मा ज्योतिबा फुले स्मृति दिवस पर ज्योतिबा और डॉ. अंबेडकर में एक समानता और एक स्वाभाविक प्रवाह को देखने की आवश्यकता –Sanjay Jothe

संजय जोठे महात्मा ज्योतिबा फुले और आम्बेडकर का जीवन और कर्तृत्व बहुत ही बारीकी से समझे जाने योग्य है. आज जिस तरह की परिस्थितियाँ हैं उनमे ये आवश्यकता और अधिक मुखर और बहुरंगी बन पडी है. दलित आन्दोलन या दलित अस्मिता को स्थापित करने के विचार में भी एक “क्रोनोलाजिकल” प्रवृत्ति है, समय के क्रम में उसमे एक से दूसरे पायदान तक विक्सित होने का एक पैटर्न है और एक सोपान… Continue reading

ओशो रजनीश और उनकी ब्राह्मणी तकनीकें –Sanjay Jothe

Sanjay Jothe “….पश्चिमी दार्शनिकों और विचारकों ने भारतीय दर्शन पर एक गंभीर टिप्पणी की है कि भारतीय दर्शन या विचार में विचार के स्तर पर हर विरोधी बात का एकीकरण या संश्लेषण हो जाता है लेकिन सामाजिक या व्यक्तिगत जीवन में एकीकरण एकदम असंभव है…” एक बार ओशो रजनीश से किसी ने बुद्ध के बारे में प्रश्न किया. बात अनत्ता अर्थात अनात्मा की हो रही थी, रजनीश ने सनातनी ब्राह्मणी… Continue reading