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फ़तेहसागर की पाल पर वह सुबह-सुबह कहने लगा : देश भर में “पद्मावती” फिल्म को देखेे बिना ही भारी विरोध हो रहा है। यह भी समझ नहीं आता कि रत्नसिंह की पत्नी का नाम पद्मिनी था तो पद्मावती का विरोध क्यों हो रहा है? नाम ही बदल गया तो विरोध का आधार ही क्या रह जाता है? आख़िर आप अख़बारों में लिखते ही हैं कि “बदला हुआ नाम!”
कहते हैं, 1303 में अलाउद्दीन ख़िलजी ने पद्मिनी को हासिल करने की कोशिश की थी। उसने चित्तौड़ के दुर्ग पर हमला किया था। महीनों किले की घेराबंदी किए रखी। समझ नहीं आता कि कोई शासक इतना सनकी हो सकता है कि वह किसी दूसरे की पत्नी को हासिल करने के लिए इतना कुछ क्यों करेगा? ऐसा होगा तो वह पागल ही हो जाएगा।
उसका तर्क था : दरअसल यह घटना 714 साल पुरानी है। अलाउद्दीन छू भी न ले, इसलिए रानी पद्मिनी ने जौहर कर लिया था। उस समय तो कोई इतिहास भी नहीं लिखता था। किसी के पास कोई रिकॉर्ड भी नहीं था। आप कल्पना कीजिए, आज जिस समय हिन्दुस्तान में एक नेता किसी दूसरे के बारे में कहता है कि मशीन में आलू इधर से डालो तो उधर से सोने का लड्डू निकलेगा, उसे ही तोड़मेरोड़ कर पेश किया जा सकता है और 90 प्रतिशत से अधिक सुशिक्षितों के दिमाग़ में एक बेबुनियाद झूठ बिठा दिया जाता है तो उस काल में तो लाेगों ने क्या ही किया होगा।
उसने कहा : और जो देश 714 साल पहले की एक रानी के एक काल्पनिक नृत्य के एक काल्पनिक दृश्य पर इतना आंदाेलित है, वही देश चीन की सान्या सिटी में देश की एक छोरी मानुषी छिल्लर के मिस वर्ल्ड बनने पर बधाइयां दे रहा है। ग़ज़ब देश है। और प्रसन्नता से फूलकर कुप्पा हुआ जा रहा है। विचित्र लोग हैं। लेकिन साथ ही यह पद्मावती मामले में भंसाली को कोसते हुए अपने-अपने सेलफोन्स के वाट्सऐप पर मानुषी छिल्लर की आने वाली गरमागरम तसवीरों और विडियो क्लिपिंग्स पर इतना लहालोट होते हैं कि उसके स्त्री मर्यादा के पाखंड पर हंसी आ जाती है।
उसने मेरी आंखों में आंखें डालकर कहा : मुझे नहीं मालूम कि मिस वर्ल्ड का ख़िताब किसी लड़की के सिर पर इस तरह की अश्लील शारीरिक मुद्राएं दिखाने के बाद सिर पर आकर टिकता है। संजय लीला भंसाली तो फिर भी कुछ हदों में रहते हैं, लेकिन ब्रिटेन में छोटे पर्दे पर सेक्स बेचने वाला एरिक मॉरले तो रीता फारिया से लेकर मानुषी छिल्लर तक छह वर्जिन तरुणियों को सेक्स का तड़का लगाकर सौंदर्य के पुजारी बने बैठे कार्पोरेटिया पैजेंट्स को नहला चुका है। लेकिन यह सब हमें अच्छा लगता है। बहुत बधाई वाला मंगल काम। जैसे ही किसी तरुण के विश्व सुंदरी बनने की ख़बर आती है, चारों तरफ से बधाइयां बरसने लगती हैं। यहां हमारी सनातन संस्कृति वात्स्यायन के मूड और माइंड में आ बसती है।
उसने फ़ोन का वाट्स ऐप चेक किया और कहने लगा : मैं देखता हूं, हमारे यहां कुछ लोग सारा दिन मुस्लिमों के खिलाफ वाट्स ऐप चलाते हैं, लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि दुनिया की एक चौथाई यानी लगभग 23 प्रतिशत आबादी मुसलिम होने के बावजूद उनकी शायद ही कोई छोरी ऐसे किसी नग्न कार्यक्रम में शामिल होती हो। आैर एक हमारा देश है कि सारा दिन मर्यादा-मर्यादा करते हुए अपनी संस्कृति का ढोल पीट पीटकर थकथकाकर चूर हो सो जाता है। और अगली सुबह पता चलता है कि अपनी मर्यादा तो चीन में जाकर अपनी सेक्सुअल ब्यूटी का परचम कार्पोरेट पैजेंट्स के दरबार में फहरा आई है। और हम अचानक पिछला गाना भूलकर उसके गीत गाने लगते हैं।
वह बोला : काल्पनिक पद्मावती के नृत्य पर जिनकी भृकुटियां तनी हुई हैं, उन्हें होश है कि नहीं!!! स्त्री गरिमा स्त्री गरिमा ही होती है। वह चाहे पद्मावती की हो या फूलनदेवी की।
उसका कहना था : आखिर क्या कारण है कि हम पद्मिनी भी हमीं चाहते हैं और सनी लियोन को भी हमीं हिट करते हैं? हम किसी सामान्य दलित महिला पर इतना अत्याचार करते हैं कि वह फूलन देवी बन जाती है और हम आए दिन इतने अमानुषिक होते हैं कि हमारे देश में महिलाओं से बलात्कार के मुकदमे सारी हदें तोड़ जाते हैं। हम स्त्रियों की मर्यादा के इतने रक्षक हैं कि दहेज, भ्रूण हत्या आैर घरेलू हिंसा के लिए विशेष कानून बनाए जाते हैं, क्योंकि सामान्य कानूनों से हल ही नहीं निकलता।
वह मुझे बहुत नाराज़ लग रहा था। कहने लगा : हम सुबह-शाम चीन-चीन-चीन चिल्लाते हैं! मत खरीदो चीन का सामान। बहिष्कार चीनी सामान। और पता लगा कि हमारी मर्यादाओं की नथ उतरवाई तो एरिक मॉर्ले का प्रेत चीन में ही करता है और हम प्रसन्न होते हैं कि हमें 17 साल बाद यह मौक़ा मिला है!
अंतत: वह दोनों हाथ जोड़कर खड़े हो गया और बोला : मैं विनम्रता से जानना चाहता हूं कि आज मेरे भारत का असली सच क्या है? पद्मिनी के गौरव पर मर मिटने वाला या चीन में मर्यादा की नथ उतरवाई करवाने वाला?
हम जा कहां रहे हैं? -बुदबुदाते हुए वह चला गया!
मैं अवाक् था।
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Credits: Tribhuvan’s facebook.

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