देशभक्त

Vimal Kumar

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सुबह सुबह वे तुम्हारे मोहल्ले में
एक तिरंगा लहराते आयेंगे
फिर तुम्हारे घर को आग लगायेंगे
क्या तब भी तुम उन्हें कहोगे
— देशभक्त !

एक दिन बीच सड़क पर
घोंप देंगे पीछे से
तुम्हारी पीठ में वे चाकू
क्या तब भी तुम कहोगे उन्हें
-देशभक्त!

बहस होगी जब उनसे तुम्हारी
किसी बात पर
तुम्हारे बालों को खींच कर
कर देंगें तुम्हे निर्बस्त्र
भारत माता की जय कहते हुए
क्या तब भी तुम कहोगे उन्हें
-देशभक्त !

खतरे में था तब भी यह देश
जब एक भ्रष्ट्रचारी को बता रहे थे
लोग परम धर्म निरपेक्ष
लूटेरे को माफ़ किया जा रहा था
क्योंकि वह समाजवादी था .

भूखमरी और बेरोजगारी का
चारों तरफ आलम था
चुनाव में दिखाए जा रहे थे
केवल सपने ..

अपने ही देश के
अब हम नागरिक नहीं थे
हर बार छले गए मतदाता थे
अपने अधिकारों से बंचित थे
सच पहले भी कहते थे
लेकिन देश द्रोही नहीं ..थे..

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