
तमिलनाडु राज्य के एक गांव में एक आम किसान परिवार में पैदा हुए ‘के० सी० देवासेनापथि’, IAS हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य में कौशल विकास प्राधिकरण के राज्य निदेशक हैं और कृषि कार्य को कौशल के रूप में स्वीकृत कराने के लिए प्रयासरत हैं। अभी हाल तक ही छत्तीसगढ़ राज्य के दंतेवाड़ा जिले में लगभग 3 वर्ष तक जिलाधिकारी रहे।
इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि इनके पूर्वजों व पूरे परिवार में इनके पिता पहले व एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जो स्कूल गए थे। देवासेनापथि उन संसाधन-विहीन सरकारी स्कूलों के पढ़े हुए हैं जिनमें एक पैसा भी फीस नहीं पड़ती थी। स्कूल के दिनों में कई वर्षों तक पेड़ों के नीचे बैठ कर शिक्षा प्राप्त करते रहे।
संभवतः पारिवारिक पृष्ठभूमि कृषक व ग्रामीण होने के कारण देवासेनापथि एक संवेदनशील IAS अधिकारी हैं और ऊर्जा के साथ दंतेवाड़ा में जिलाधिकारी के रूप में पानी, दूध व कृषि के लिए दूरदर्शी काम किए। इन्हीं के प्रयासों का नतीजा है कि दंतेवाड़ा 2020 तक 100% आर्गैनिक कृषि जिला हो जाएगा और रासायनिक खेती इस जिले में प्रतिबंधित हो जाएगी।
इन्होंने किसानों के लिए दूरदर्शी व गहरी सोच के साथ “क्षीरसागर” जैसी योजनाओं की कल्पना करते हुए धरातल में उतारने के कई दूरदर्शी परिवर्तनकारी काम किए हैं जिनकी चर्चा मैं अपनी आने वाली पुस्तकों में विस्तार से करूंगा।
मेरी मुलाकातें
चार वर्ष से कुछ अधिक समय पहले की बात है। मैं बस्तर संभाग छत्तीसगढ़ में स्वावलंबन व ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए स्थानीय आदिवासी समाज को अपने स्तर से सहयोग दे रहा था। इसी प्रक्रिया में बस्तर संभाग के कई जिलों में सप्ताहों भ्रमण कर रहा था।
नारायणपुर, सुकमा व दंतेवाड़ा जिलों के साथ-साथ बीजापुर जिले के भी बीहड़ आदिवासी गावों में आना-जाना हो रहा था। एक दिन जब मैं बीजापुर जिला मुख्यालय गया हुआ था, तब मेरी इच्छा हुई कि बीजापुर जिला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी व जिलाधिकारी से मिलूं। उस दिन जिलाधिकारी उपलब्ध नहीं थे। जिला कार्यकारी कार्यालय से मालूम पड़ा कि जिला कार्यकारी अधिकारी शाम को लगभग 5 बजे कार्यालय में उपलब्ध होगें। छत्तीसगढ़ में जिसे जिला पंचायत मुख्य कार्यकारी अधिकारी कहते हैं वह कई राज्यों में मुख्य विकास अधिकारी के नाम से जाना जाता है।
के० सी० देवासेनापथि उस समय बीजापुर जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। मैंने अपना विजिटिंग कार्ड भेजा। लगभग 20-25 मिनट इंतजार के बाद मुझे बुलावा आया। कमरे में घुसते ही देवासेनापथि की बात कि आपको इतना इंतजार इसलिए करवाया कि आराम से बात हो सके। काफी व चाय का प्रस्ताव दिया गया, मैंने काफी पीना स्वीकार किया।
देवासेनापथि की एक खासियत है कि वे AC का प्रयोग बहुत कम करते हैं। मई जून की गर्मी में भी आफिस में AC का प्रयोग कम ही करते हैं। इसलिए कार्यालय की खिड़कियां खुली हुईं थीं और AC बंद था। बोले कि प्राकृतिक हवा का आनंद ही अलग होता है।
महज 15 मिनट की सौजन्य मुलाकात, बस इतना ही। इसके बाद कभी टेलीफोन से बात नहीं हुई, कभी मुलाकात नहीं हुई। मैंने देवासेनापथि जी के बारे में कभी कोई अध्याय नहीं लिखा। मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य नामक किताब में मैंने बहुत लोगों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया लेकिन इनके बारे में कोई अध्याय नहीं।
देवासेनापथि जी जब दंतेवाड़ा जिलाधिकारी थे तब इनके हाथ मेरी किताब “मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर” लगी। इनको मेरी किताब अच्छी लगी और जो काम ये कर रहे थे, करना चाहते हैं उसके नजदीक लगी।
मैं पिछले एक महीने से छत्तीसगढ़ में भ्रमण कर रहा हूं। इसी दौरान दंतेवाड़ा भी जाना हुआ, वहां मालूम हुआ कि गावों के हजारों आदिवासी किसान देवासेनापथि के ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कार्यों की प्रशंसा करते हैं।
मेरी इच्छा हुई कि मैं देवासेनापथि जी से मुलाकात करूं। रायपुर के अपने प्रवास के दौरान मैं एक दिन बिना पूर्व सूचना के इनके कार्यालय पहुंच गया। मजेदार बात यह हुई कि जब मैं इनके कार्यालय की पार्किंग में पहुंचा तब यह नया रायपुर मंत्रालय में किसी मीटिंग में जाने के लिए अपनी कार में बैठ रहे थे।
मुझे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि देवासेनापथि मुझे याद रखे होगें। मुझे बहुत ताज्जुब तब हुआ जब इन्होंने मुझे पहचाना और अपनी कार से ही हाथ हिला कर अपनी ओर से मुझसे अभिवादन किया जबकि मैं अपनी कार के अंदर बैठा हुआ था। मुझे महुसूस हुआ जो IAS होते हुए भी इतना सहज है, IAS होने का अहंकार नहीं है, उससे मिलकर आनंद आएगा।
तय हुआ कि अगले दिन मुलाकात होगी। अगले दिन मैंने फोन किया तो देवासेनापथि ने कहा कि वे मेरे साथ लंबी व तसल्ली भरी मुलाकात चाहते हैं इसलिए शाम को मुलाकात होगी। मैं अगले दिन कार्यालय पहुंचा और देवासेनापथि जी के साथ लगभग 2 घंटे लंबी मुलाकात चली। इस दौरान वे किसी और से नहीं मिले। शायद उन्होंने मुझसे मुलाकात के लिए समय खाली रखा था।
सहज, सारगर्भित व दूरदर्शी सोच से ओतप्रोत मित्रवत मुलाकात। मुझे लगा कि मैं IAS जैसी सबसे ताकतवर संस्था के नौकरशाह से नहीं बल्कि सामाजिक विकास के लिए प्रतिबद्ध जमीनी कार्यकर्ता से चर्चा कर रहा हूं। आनंद ऐसे ही IAS अधिकारियों से मिलकर आता है। ऐसे ही IAS अधिकारियों से मिलकर लगता है कि वर्तमान ढांचे में भी कुछ IAS आम लोगों के प्रति जवाबदेही महसूस करते हैं।
यदि कभी मेरी मुलाकात छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जी से हुई तो मैं उनसे दर्ख्वास्त करूंगा कि इनको ऐसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में भेजा जाए जहां विकास की जरूरत है। ऐसे विभागों में भेजा जाए जहां ये कृषि को उद्योग व कृषक को उद्योगपति बनाने के अपने विचारों को धरातल में उतारने के लिए प्रयास कर पावें।
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