समाजवादी बिल्लियों का बड़ा परिवार और फ्रैंक हुजूर

सामाजिक यायावर

जो गांवों के हैं उन्होंने अपने गावों में या अपने घरों में घरेलू बिल्लियां देखी होगीं। भारत में पाई जाने वाली घरेलू बिल्ली धारीदार व छीटदार खूबसूरत होती है। अपनी दादी, नानी, माता, बुआ, मौसी, बहन व पत्नी आदि को खाने का सामान बिल्लियों से बचाने की जुगत के साथ रखते देखा होगा। उनमें से बहुतों ने अपने घरों में अपनी दादी व नानी के द्वारा हाथ से बनाई गई मिट्टी की अलमारियां देखीं होगीं जिनमें बाहर से कड़ी भी लगती थी जिसमें छोटा सा ताला भी लगाया जा सकता था। यह जुगत बिल्ली से भोजन व दूध को सुरक्षित करने के लिए होती थी।

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frank-hujur-cat-008बीते दिनों में गांव के लोग पालतू पशुओं व पक्षियों के साथ परस्परता में जीवन जीते थे। कभी चूक हो जाने पर यदि बिल्ली दूध पी गई तो बिल्ली को जान से नहीं मारा जाता था। बिल्ली को घर से मार कर भगाया नहीं जाता था। जिन घरों में बिल्लियां होती थीं वे बिना पाली गई होने के बावजूद पालतू होती थीं। उन बिल्लियों के बच्चों के घर के बच्चों के साथ रिश्ते बनते थे। आज भी बहुत गावों में ऐसा होता है। शहरों में भी कभी कभार ऐसा देखने को मिलता है। लेकिन बिल्ली को घर के पारिवारिक सदस्य की तरह अधिकार देते हुए पालना, भारत में प्रचलन में नहीं है, कुछ लोग पालते हैं लेकिन प्रचलन में नहीं हैं। बिल्ली पालना आसान नहीं होता क्योंकि बिल्ली स्वतंत्र जीव होती है। 

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बिल्ली की आप कितनी भी देखभाल कीजिए वह कभी आपकी गुलाम नहीं बनती है। बिल्ली कुत्ते की तरह आपकी अनुगामी, भक्त या स्वामिभक्त नहीं बनती है। आप बिल्ली को रोज कई बार भोजन खिलाइए लेकिन वह कभी आपके सामने कुत्ते की तरह लार चुआते हुए आपके तलुवे नहीं चाटेगी, आपके आगे अपनी पूछ नहीं हिलाएगी। आपसे जुड़े होने के बावजूद वह अपना वजूद आपके वजूद से स्वतंत्र रखती है।

अपना वजूद स्वतंत्र रखते हुए, अपनी दृष्टि स्पष्ट रखते हुए भी आपसे जुड़े रहने की, आपके साथ मित्रवत रहने की खासियत के कारण ही शायद आत्मकथा लेखक व संपादक फ्रैंक हुजूर बिल्लियों को समाजवादी कहते हैं। फ्रैंक हुजूर कहते हैं कि उन्होंने बिल्लियों से समाजवाद के कई अध्याय सीखे हैं। फ्रैंक हुजूर ने विश्व की कई हस्तियों की आत्मकथाएँ लिखीं हैं। पाकिस्तान के विश्वप्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी इमरान खान के जीवन के ऊपर भी किताब लिखी है। सोशलिस्ट फैक्टर नामक अंग्रेजी मासिक पत्रिका के संपादक भी हैं। फ्रैंक हुजूर की जीवन संगिनी बालीवुड में अभिनेत्री हैं। टीवी सीरियल्स में काम करतीं हैं। उन्होंने भी फ्रैंक हुजूर की 40 से अधिक बिल्लियों को अपने बच्चों की तरह स्वीकार कर रखा है।

frank-hujur-cat-0010

frank-hujur-cat-001फ्रैंक हुजूर ने दुनिया के विभिन्न देशों की कई प्रजातियों की 40 से अधिक बिल्लियां पाली हुई हैं। सभी का भोजन, रहने की व्यवस्था व स्वास्थ्य आदि की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी फ्रैंक हुजूर पारिवारिक अभिभावक की तरह उठाते हैं। फ्रैंक हुजूर को अपनी प्रत्येक बिल्ली का नाम, उसके माता पिता, दादा दादी, नाना नानी, मौसी मौसा, बुआ फूफा, बहन भाई आदि सभी के नाम व इतिहास जुबानी याद रहता है। इनके घर में हर जगह बिल्लियां ही दिखाई देती हैं। आप फ्रैंक हुजूर से मिलने पहुंचिए तो मालूम पड़ा कि जिस कुर्सी पर या सोफे पर आप बैठने जा रहे हैं वहां पर पहले से ही एक बिल्ली आराम से पसरी हुई है। चिंता न कीजिए बिल्ली आपको देखने के कुछ देर बाद आपके लिए स्थान खाली करके अपने लिए कोई नई जगह जुगाड़ लेगी। कोई गिला शिकवा नहीं। कुर्सी के लिए कोई झगड़ा नहीं। 

frank-hujur-cat-002यदि आप रात में फ्रैंक हुजूर के अतिथि हैं और यदि बिल्लियों को आप पसंद आ गए तो सुबह जब आप जगते हैं तो आपको आपके साथ बिस्तर में कई बिल्लियां सोती मिलेंगीं। मैं इन सब बातों के जीवंत अनुभव उनके घर में अतिथि के रूप में ले चुका हूं। चूंकि सिडनी, आस्ट्रेलिया में हमारे घर में कई बिल्लियां पारिवारिक सदस्यों के रूप में रहीं हैं, इसलिए मुझे फ्रैंक हुजूर के घर में बिल्लियों के साथ बहुत ही अधिक अच्छा लगता है।

फ्रैंक हुजूर ने बिल्लियों के नाम दुनिया की हस्तियों के ऊपर रखे हैं। आपको विक्टोरिया, ब्रूटस, नेपोलियन, लेनिन, लोहिया, टीपू आदि ऐतिहासिक पात्रों के नाम इनकी बिल्लियों के नामों में मिल जाएंगें। बिल्लियों के समाजवादी दर्शन के बारे में फ्रैंक हुजूर ने एक बिल्ली “लार्ड बोका” जिसका देहांत हो चुका है के ऊपर काफी कुछ लिखा है। यदि आप इच्छुक हों तो आप http://lordboca.com और http://www.newskarnataka.com/india/man-who-built-a-shrine-in-the-memory-of-a-cat में जाकर A devine socialist cat के बारे में पढ़ सकते हैं।

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