बिहार चुनाव 2015

सामाजिक यायावर

लगभग दो महीने पहले मेरी बातचीत दुनिया के एक प्रतिष्ठित देश के राजनैतिक राजयनिक उच्चाधिकारी से यूं ही बिहार चुनावों पर हल्की फुल्की चर्चा हो रही थी। राजनयिक जी ने मुझसे कहा कि बिहार में भाजपा व सहयोगी दल की सरकार आ रही है, बिहार के लोग लालू प्रसाद यादव जी के जंगल राज को पूरी ताकत से रोकेंगें भले ही इसके लिए लोगों को नितीश कुमार का विरोध करना पड़े। मैंने राजनयिक जी से कहा कि भारतीय मीडिया तो हवा से चलता है, हवा बनाता है और फिर अपनी ही बनाई हवा को फैलाते हुए चलता है।

मैंने राजयनिक जी से आगे कहा कि आप भारत की जाति व्यवस्था के जमीनी घिनौनेपन व शोषण को नहीं समझते हैं, तभी आपको लालू प्रसाद यादव का राज जंगलराज लगता है। जबकि लालू का राज शोषित जातियों के राजनैतिक जागरूकता का राज था। यदि लालू ने तथाकथित जंगलराज रूपी राजनैतिक जागरूकता की नींव न भरी होती तो नितीश कुमार विकास के काम नहीं कर पाते। बिहार के शोषित जातियों के लोग लालू व नितीश दोनो को पसंद करते हैं, दोनों की संयुक्त ताकत को हलके में नहीं लेना चाहिए।

राजनयिक जी को मेरी बात हास्यास्पद लगी, उनको लगा कि मैं वाहियात बात कर रहा हूं।

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मैं चुनावी राजनीति में कम से कम बोलता हूं, क्योंकि सीटों की संख्या में मुझसे त्रुटियां हो जातीं हैं। लेकिन सामाजिक व राजनैतिक विश्लेषण में त्रुटियां बहुत कम होतीं हैं। बिहार चुनाव के बारे में लोगों के फेसबुक अपडेट देखकर ऐसा लग रहा है कि राजनयिक जी से हुई बातचीत में मेरी बात में काफी दम था।

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