Abhimanyu Bhai
मोदी जी !
प्रेम को क्यो मार दिया है संसद मे बैठने
वालो ने !इसीलिए इनकी पगार और
सांसद निधि आप बढाते है !
मन कितने गंदे हो चुके है समाज मे !
मन दुखी है !
तो मन की बात लिख रहा हूं।
अब ऐसा आरक्षण का कार्यक्रम बनाइए जिसमे
हर जाति का दलित गरीबी की त्रासदी से बाहर निकले
और शोषण कारी अन्यायी गरीबी की रेखा की परिभाषा को बदलिए !सहभागिता आधारित योजना क्रियान्वयन को लागू कराइए!
सोचिए कि हिंसक आन्दोलन क्यो प्रभावी है ?
क्योकि सरकार हिंसा के बाद सुनती है !
चित्रकूट के कोल आदिवासी हिंसक आन्दोलन नही कर सके इसलिए आजादी के बाद से आज तक
उनकी नही सुनी गई!
चित्रकूट मे एक भी दलित आदिवासी गांव खुशहाल
नही है -उसे आपकी संसद के आरक्षण का
लाभ नही मिला !
यहां आदिवासी बच्चे स्कूल की
जगह भूख की जुगाड मे रहते है।
बुन्देलखण्ड मे दलित विकास का
काम करने वाली संस्था और नेताओ ने भी
केवल आरक्षण पर अपनी लाठी पीटी है !
और कोलो को कलम पकडाने की जगह
बन्दूक थमा दी।
यही हाल चमार भंगी पासी तथा गधालादो की जमात मे रहने वाले बच्चो का भी है वह स्कूल छोड के केवल पैसे खोज मे लगे रहते है !
दलित -हिंदू नेता अपनी अपनी
सरकारो मे मालामाल हो गये !
आज कुछ जेल मे है या सत्ता से दूर है!
जो सत्ता मे है वह केवल फेसबुक तक है !
उन्होने ने कुछ नही किया दलित विकास मे!
आपकी सरकार भी ऐसा कुछ नही पा कर रही
जिससे दलित चाहे जिस जाति का वह गरीबी की त्रासदी से ऊपर आजाए !
आज सरकार आप की है तो लाजिम है कि
कल जो कुछ देश /प्रदेश मे हुवा उसके जिम्मेदार आप तथा राज्य के मुख्यमंत्री जिलाधिकारी पुलिस
अधीक्षक सबसे पहले जिम्मेदार है!
जरुरत है
आज ऐसे आन्दोलन की जिनके हांथ मे तलवार
डंडे की जगह प्रेम की पुस्तक हो !
आन्दोलन कारियो
से ऐसे एग्रीमेंट होने चाहिए!
पहले तो सरकार को ऐसे
काम करना चाहिए कि लोग आंदोलित ही न हो !
देश विभाजन की नीव न पडे इसे रोकिए ।
दलित गरीब को
उसकी नदी जंगल हवा स्कूल
और उसकी जमीन लौटा दीजिए और इन जगहो से
सरकारी हस्ताक्षेप बंद करा दीजिए !
यह अपना आरक्षण
अपनी संसद के पास रखिए !
मान लीजिए सब आपस मे जीना सीख लेगे
और जंगल नदियो पशु पक्षी सब प्रेम सीखा देगे?
कल देखा कि दलित आदोलन मे
बेचारे भोले भाले युवाओ को -आंदोलन के नेताओ ने
बुद्ध की तस्वीर न देकर हांथो मे डण्डे
पकडा दिए जैसे हिन्दू -मुस्लिम संगठन
तलवार हांथ मे लेकर चलते है!
बेचारे न समझ उत्साही दलित गरीब निर्दोष युवाओ
की पिटाई तथा रास्ते चलते निर्दोष आम नागरिको के साथ आन्दोलन कारी उन्माद ने जो कृत्य किया यह सब
देख कर मन बहुत दुखी है व्याकुल है?
बेशरम राजनैतिको
मत बाटो समाज को
एक साथ लोग सहजता समरसता से रह सके
ऐसा माहौल दो।
क्यो एक दूसरे के आस्था पर जूते चलाते हो ।
जैसा बोया हो वैसा ही तुम पा रहे हो –
इसके बाद भी हाय कुर्सी हाय कुर्सी
लगी है !वोट लेने के बाद कभी पलट कर देखते हो
दलित गरीब किस हालत मे जीता है!
कौन सा न्याय तुम उसे दिलाते हो!
तुमने उसका शुद्ध निशुल्क पानी तक छीन लिया
उसका विचार छीना अब हवा भी छीन रहे हो
और लोगो को बीमार बना कर दवा कम्पनीयो को तैनात कर गरीब के घरो मे बडी डकैती डलवाते हो
तुम्हारा cmo से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक
गरीब को लूटता है –फिर अपना आलीशान मकान बनवाता है —स्कूल चलवाता है !
जब उसने हिस्सा सही नही दिया तब उसका स्थांतरण करा देते हो !
हर जाति- धर्म के अन्दर की गरीबी नौकरी सी नही
दूर होगी –उसकी गरीबी को भारत की गरीबी
रेखा की परिभाषा भी दूर नही कर सकती!
आज तक सबसे दलित जातियो के बच्चे स्कूल
मे ठहर नही पा रहे और देश की शिक्षा उन्हे
न तो आत्मनिर्भर बना रही है न प्रेम शिखा पा रही है केवल उन्माद और नशा शिखा रही है ।
विपक्ष तो केवल शाखंडी है।
सरकारो ने केवल वोटर को ठगा
है लडाया है?
चाहे वह किसी की सरकार रही हो
सबकी संस्कृति एक है ।
बुद्ध महावीर गुरुनानक गांधी अम्बेडकर के समाजिक प्रेम को
आज संसद के अन्दर बैठने वाले तथा संसद मे जाने की इच्छा रखने वालो ने क्यो मार दिया ?
आज मै बहुत दुखी हूं।

Abhimanyu Bhai


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