आप सुन लें कि आज शाम मैं मनुष्यतर हुआ हूँ – आज वह प्रेम की शाम थी

Aman Tripathi

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आज शाम का वक्त मैंने
एक लड़की के साथ बिताया है
उसको मैं बहन कहता हूँ
पहले नहीं मिला था कभी उससे
जानता भी नहीं था कुछ महीने पहले
नहीं जानने को नहीं जानते हुए
जानने को जानने के बीच का
समय पाटते हुए मैंने
आज शाम का वक्त एक लड़की के साथ बिताया है

मैंने और उसने तमाम बातें की हैं
वह इस शहर में पहली बार आयी थी
मैं जो उससे थोड़ा पहले पहली बार इस शहर में आया था
उसे यह शहर अपने शहर की तरह घुमा रहा था
मैंने उसे शहर में नदी दिखायी और
शहर का सबसे पुराना कॉफी हाउस दिखाया
वह किसी भी और लड़की की तरह थी
उससे मिलना किसी भी और लड़की की तरह था
उसने भी किसी भी और लड़की की तरह
मेरे न बोलने या कम बोलने का इलज़ाम लगाया
जबकि मैं यह मानता हूँ कि मैं ठीक-ठाक बोलता हूँ

आप कहेंगे ऐसा क्या है
आप कहेंगे कोई किसी लड़की से मिलता है
जिसे वह बहन या कुछ भी कहता है
इसमें किसी की क्या रुचि हो सकती है

मैं बस यह बताना चाहता हूँ आपसे
आज शाम तमाम हत्याओं दुर्घटनाओं मौतों आत्महत्याओं निन्दाओं षड्यन्त्रों बलात्कारों बयानों और मज़ाकों और विदूषकों के बीच और अछूते रहते हुए
मैंने अपना समय एक लड़की उसकी बातों और किताबों और नदी के साथ बिताया है
आप सुन लें कि आज शाम मैं मनुष्यतर हुआ हूँ
आज वह प्रेम की शाम थी.

 

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