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कन्यादान टीम की ग्यारहवीं बिटोली जाएगी ससुराल

Ashish Sagar Ashish

2 जून,2019,बाँदा :-

* कालिंजर की तलहटी में वाल्मीकि समुदाय के बीच प्रकृति सम्यक होगा विवाह। यूपी बुंदेलखंड के बाँदा में एक बार पुनः आगामी 15 जून को प्राकृतिक संसाधनों के बीच कन्यादान टीम अपने वार्षिक अभियान की ग्यारहवीं बिटिया का ब्याह करेगी। उल्लेखनीय है बाँदा की नरैनी तहसील के मोहनपुर खलारी प्रधान सुमनलता पटेल पत्नी अध्यापक यशवंत पटेल और उनके साथी हर वर्ष किसी एक कन्या का विवाह करते है। इस सामाजिक सरोकारी कार्यक्रम में हमेशा जातिवाद, धर्म,रंग-भेद की मिथक दीवारों को तोड़ा जाता है। प्रधान सुमनलता और उनके पति सहित सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर ने बताया कि हमने कभी बेटियों के कन्यादान में मजहब और जाति का ख्याल नहीं किया है। ऐसा किसी भी सरोकारी को करना भी नहीं चाहिए। संकल्प के मुताबिक इस वर्ष कालिंजर गांव के महादलित वाल्मीकि परिवार की बेटी रेखा पुत्री बाबू समुद्रे का की वैवाहिक रस्में गढ़ा-गंगापुरवा के किशन पुत्र कारेलाल मतेल के साथ सम्पन्न की जाएगी। सामाजिक समरसता के संदेश देने की मुहिम ऐसे आयोजन का हिस्सा होता है। बतलाते चले बीते शनिवार कन्यापक्ष के गांव जाकर कन्यादान टीम साथियों ने गंवई चौपाल में इस प्रकृति सहपूरक विवाह की मंत्रणा की। शादी को देशी गंवई अंदाज में वैकल्पिक प्राकृतिक साधनों के साथ आयोजित करने निर्णय किया गया है। पेशे से अध्यापक खुद किसान परिवार से आते है और उन्होंने अपनी भतीजी का ब्याह भी इस अभियान की कड़ी में बीते 26 जून 2018 को बैलगाड़ियों से बारात की अगवानी करके किया था। समाज मे इस ब्याह की खासी चर्चा रही थी। इसके पूर्व निषाद समाज की गरीब मैकी देवी की शादी भी गंगापुरवा में बीते 7 जून 2017 को बैलगाड़ियों से की थी।....15 जून को होने वाली रेखा परिणय किशन के ब्याह में भी पर्यावरण का ख्याल रखते हुए ग्रामीण परंपरा के अनुरूप कार्बन उत्सर्जन करने वाले साधनों को परहेज रखा जाएगा। मसलन डीजे,आतिशबाजी और फूहड़ता से दूरी बनाते हुए बारात की अगवानी में छियूल की लकड़ी से बने फूलों,बांस,कांस के मंडप के बीच बिटिया के पैर पूजे जाएंगे। साथ ही वरपक्ष के स्वागत में दोना-पत्तल की पंगत में शुद्ध ईंधन में पका भोजन परोसा जाएगा। मिट्टी के कुल्हड़ में जलपान होगा तो आम और जामुन के पत्तों से बना हाथी दरवाजा,पुराने वाद्य यंत्र से ग्रामीण महिलाओं के मंगल गीत दुहला-दुल्हन आशीर्वाद देते दिखलाई पड़ेंगे। कन्यादान टीम रेखा के परिवार के साथ विवाह की तैयारियों में जुट गई है। अयोजन कर्ता सदस्यों ने बताया कि बिना किसी चमक-दमक के गांव की जीवनशैली को सहेजने की दिशा में यह ग्याहरवीं लड़की की शादी है। वह यह आयोजन व्यक्तिगत साधनों से करते है । जिसमें समाज की दुआएं शामिल होकर आयोजन को सफल बनाती है। 

11 जून :- 

पंद्रह जून को होने वाले प्रकृति सम्यक विवाह के आयोजन पूर्व आज कन्यापक्ष द्वारा ' छुई-माटी ' की रश्म ( मिट्टी के बर्तन मसलन चुहला निर्माण व घर की चूना, गोबर,गंवई रंग से लिपाई-पुताई / रंग रोगन का कार्यक्रम शुरू हुआ ) सम्पन्न हो गई। इन मिट्टी के बर्तनों को मंडप के पास रखा जाता है। फ़ोटो में मिट्टी के चुहले बनाती कन्या रेखा वाल्मीकि के पारिवारिक जन, रिश्तेदार व पड़ोसीजन। आज से अलग- अलग वैवाहिक रीति रिवाजों के पड़ाव शुरू होंगे। यथा माईंन, तेल, हल्दी-उपटन,मंडप आदि महिलाओं को बुलौआ लगाकर आयोजित होते है। न्योता देने आदि का कार्य नाउन दाई करती है। वहीं वरपक्ष में भीखी,जनेऊ यदि यग्योपवीत अलग से नहीं किया तो होता है । जैसा ग्रामीण परिवेश में ब्याह के वक्त बिटिया के घर होता है। आज बिटिया रेखा के घर खलारी प्रधान पति अध्यापक यशवंत पटेल ने उपस्थिति बनाये रखी । 

Ashish Sagar Ashish        

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