Ramesh Chand Sharma
झूठ झूठ झूठ,
झूठ पर फिर झूठ,
कितनी झूठ, कैसी झूठ,
रंग बदलती मेरी झूठ,
जितनी चाहो उतनी झूठ,
झूठ पर नहीं दूंगा छूट,
बनी झूठ, बनाई झूठ,
झूठी झूठ सच्ची झूठ,
लौटके वापिस आई झूठ,
मुफ्त में दे रहा झूठ,
जितनी लूटे, लूट ले झूठ,
झूठ ले लो झूठ,
बेच रहा मैं खुली झूठ,
कच्ची झूठ पक्की झूठ,
ये है पकी पकाई झूठ,
बासी झूठ ताजी झूठ,
तली तलाई सूखी झूठ,
खट्टी मिठी चरपरी झूठ,
जूते चप्पल खाई झूठ,
मेरी अपनी बनाई झूठ,
तोड मरोड बनाई झूठ,
गाली डण्डे खाई झूठ,
फिर भी समझ नहीं आई झूठ,
अभी नई बना दूं झूठ,
खरी खोटी छोटी झूठ,
पतली मोटी लम्बी झूठ,
जैसी चाहो वैसी झूठ,
नई और बना दूं झूठ,
समझी समझाई यह है झूठ,
तेरे समझ न आई झूठ,
तू रहेगा हरदम ठूंठ,
ले लो झूठ ले लो झूठ,
यह नफरत फैलाती झूठ,
बडे बडे को धूल चटाती झूठ,
छोटे को बडा बनाती झूठ,
नामर्द को मर्द बनाती झूठ,
यह वोट दिलाती झूठ,
किसी को नेता बनाती झूठ,
नोटों को कागज बनाती झूठ,
अपने को दूर हटाती झूठ,
भ्रष्टाचारी को गले लगाती झूठ,
गुण्डों को पास बुलाती झूठ,
स्वार्थी को गले लगाती झूठ,
पैट्रोल के दाम बढाती झूठ,
मंहगाई गले लगाती झूठ,
मंहगे को सस्ता बताती झूठ,
खूब विदेश घुमाती झूठ,
लूटेरों को विदेश भगाती झूठ,
बडे बडे भवन बनाती झूठ,
लोगों का खून पी जाती झूठ,
कभी नहीं शरमाती झूठ,
झूठों को गले लगाती झूठ,
सत्ता के लिए सबसे हाथ मिलाती झूठ,
सबको मूर्ख बनाती झूठ,
कहीं नजर नहीं आती झूठ,
सब जगह पहुंच जाती झूठ,
अपने को धर्म बताती झूठ,
कहीं धर्म स्थल गिराती झूठ,
कहीं धर्म स्थल बनवाएगी झूठ,
यहां झूठ, वहां झूठ,
सब जगह पहुंच जाना चाहती झूठ,
दंगा फसाद फैलाती झूठ,
उन्मादी लोग बनाती झूठ,
लोगों के गले कटाती झूठ,
रोजगार विहीन बनाती झूठ,
सच को झूठ बनाती झूठ,
कभी संसद में भी घुस जाती झूठ,
अपने को पाक साफ बताती झूठ,
विपक्ष से घबराती झूठ,
जोर जोर से चिल्लाती झूठ,
कभी घडियाली आंसू बहाती झूठ,
आश्वासन खूब देती झूठ,
कुर्सी के चिपकी है झूठ,
अपने को गरीब बताती झूठ,
लाखों का सूट पहनती झूठ,
पल पल रंग बदलती झूठ,
मंहगे कपडे सिलाती झूठ,
अपना पीछा कब छोडेंगी झूठ,
संगठित होकर तेजी से रूठ,
तभी पीछा छोडेंगी झूठ।

Ramesh Chand Sharma

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