जनता को मूर्ख बनाते हैं — Ramesh Chand Sharma

Ramesh Chand Sharma सावधान जनता समझ रही है स्वदेशी के गीत गाते थे, स्वदेशी नाम से ललचाते थे, स्वदेशी आन्दोलन चलाते थे, सड़कों पर नजर आते थे, अफवाह, झूठ खूब फैलाते है, अब क्या कर रहे हो भाई।।बिना बुलाए आते थे,झूठा संवाद चलाते थे, झूठी कसमें खाते थे, नारे खूब लगाते थे, सत्ता के लिए छटपटाते थे, सत्ता कैसे भी पाते है।।जनता को मूर्ख बनाते है, ढोंग खूब रचाते है,… Continue reading

झूठ झूठ झूठ –Ramesh Chand Sharma

Ramesh Chand Sharma झूठ झूठ झूठ, झूठ पर फिर झूठ, कितनी झूठ, कैसी झूठ, रंग बदलती मेरी झूठ,जितनी चाहो उतनी झूठ, झूठ पर नहीं दूंगा छूट,बनी झूठ, बनाई झूठ, झूठी झूठ सच्ची झूठ, लौटके वापिस आई झूठ,मुफ्त में दे रहा झूठ,जितनी लूटे, लूट ले झूठ,झूठ ले लो झूठ, बेच रहा मैं खुली झूठ,कच्ची झूठ पक्की झूठ,ये है पकी पकाई झूठ, बासी झूठ ताजी झूठ, तली तलाई सूखी झूठ, खट्टी मिठी चरपरी झूठ,जूते चप्पल खाई झूठ, मेरी अपनी बनाई झूठ, तोड मरोड… Continue reading