नीलम बसंत नंदिनी, उनकी बच्चियां व घरेलू शिक्षा –Vivek Umrao Glendenning

Vivek "सामाजिक यायावर"

नीलम बसंत नंदिनी का फेसबुक में प्रोफाइल है। मध्यवर्गीय-समाज की ग्रहिणी हैं। शहरी जीवन जीती हैं। घर में रहकर बच्चियों की देखभाल करतीं हैं। दो बच्चियां हैं, बड़ी बच्ची की आयु दस वर्ष व छोटी बच्ची की आयु चार वर्ष। पति NTPC में इंजीनियर हैं, इसलिए NTPC की कालोनी में आवास मिला हुआ है।

प्रयोगशील महिला हैं। फेसबुक में बिना फालतू की विद्वता झाड़े, सरलता से लिखती हैं। जागरूक महिला हैं, विवाह के पश्चात भी पति का सरनेम नहीं लगती हैं। दो बच्चियों की माता होकर संतुष्ट व खुश हैं। जागरूक होने के बावजूद पुरुष के प्रति द्वेषभाव से ग्रस्त होकर या पूर्वाग्रह से पोस्ट नहीं लिखतीं हैं। विभिन्न कोणों से सेल्फी लेते हुए, "कैसी लग रही हूँ" टाइप की फोटो लगाकर लाइक पाने का प्रयास नहीं करती हैं, न ही ऐसी फोटो डालती हैं जिससे स्वयं को तथाकथित रूप से महिला-जागरूक-क्रांतिकारी प्रमाणित कर सकें।

करते हुए सीखने समझने की प्रक्रिया में गतिमान हैं। इस तरह गतिमान होने में गौरव महसूस करना मनुष्य की स्वाभाविक स्थिति-गति है, इसको अहंकार की श्रेणी में रखना बेमानी है।

नीलम बसंत नंदिनी अपनी बच्चियों को बचपन से ही पर्यावरण के प्रति क्रियात्मक-जागरूक बना रही हैं। ये अपनी बच्चियों को पानी बचाएं के साथ-साथ पानी जंगल व जीव चक्र से संबंधित अन्य बातें भी प्रयोग के रूप में बताती समझाती हैं।

इनकी बच्चियों ने नदी, तालाब व जीवों का संबंध समझते हुए स्वयं घर की बागवानी में छोटा नाला व तालाब बनाया, असली। असली तालाब का तात्पर्य हमेशा दस-बीस एकड़ का तालाब ही नहीं होता। तालाब तालाब है, भले ही वह छोटा हो।

बच्चियों ने तालाब बनाया, तालाब में पानी भरने के लिए नाला बनाया। तालाब में व तालाब के आसपास जीवों के खिलौने रखे और वाइल्ड-लाइफ का चक्र बना दिया। फोटो में जानवर पानी के आसपास आनंद लेते हुए देखे जा सकते हैं। तालाब में कछुआ भी है। इस तालाब का बागवानी में पौधो के लिए प्रयोग भी है।

ऐसे ही छोटे-छोटे जीवंत खेलों के द्वारा समझदार माता-पिता अपने बच्चों से मित्रवत रिश्तों का आनंद उठाते हुए जीते है तथा खेल-खेल में ही बच्चों को वास्तविक रूप से पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों के प्रति जागरूक भी कर रहे होते हैं।

यह बच्चियां बड़े होकर भले ही तालाब न बनाएं, लेकिन तालाबों को पाटकर मकान व संपत्तियां भी नहीं खड़े करेंगीं। पानी जंगल व पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होंगी।

यही शिक्षा है, स्कूलों में शिक्षा का माध्यम ऐसा ही होना चाहिए।

About author: 
Vivek Umrao Glendenning "SAMAJIK YAYAVAR"

He is an Indian citizen & permanent resident of Australia and a scholar, an author, a social-policy critic, a frequent social wayfarer, a social entrepreneur and a journalist;He has been exploring, understanding and implementing the ideas of social-economy, participatory local governance, education, citizen-media, ground-journalism, rural-journalism, freedom of expression, bureaucratic accountability, tribal development, village development, reliefs & rehabilitation, village revival and other.

For Ground Report India editions, Vivek had been organising national or semi-national tours for exploring ground realities covering 5000 to 15000 kilometres in one or two months to establish Ground Report India, a constructive ground journalism platform with social accountability.

He has written a book “मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर” on various social issues, development community practices, water, agriculture, his groundworks & efforts and conditioning of thoughts & mind. Reviewers say it is a practical book which answers “What” “Why” “How” practically for the development and social solution in India. 

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