विटामिनों, उपचार आदि के नाम पर ठगी

Skand Shukla

इंटरनेट पर आजकल झोलाछपई चल रही है। उसे अँगरेज़ी में परोसा जा रहा है। लोग फँस रहे हैं। उन्हें अँगरेज़ी में कहा गया कुछ भी अर्थपूर्ण लगता है।

कैंसर से वे बहुत डरते हैं। इसलिए अँगरेज़ी देवी की शरण में जाते हैं। यह ग़लत इष्ट की उपासना का मूर्खतापूर्ण उद्यम है। कैंसर से लड़ने के लिए इष्ट विज्ञान है। विज्ञान के मूल में तर्क की सोच है। तर्क के लिए अफवाहों को जाँचना ज़रूरी है। कौवे जिनके कान ले जाते हैं , वे हिंसक वनैले जानवरों से न लड़े हैं , न लड़ पाएँगे।

आपको मुझे कुछ बेचना है तो मैं उसे विटामिन कह दूँगा। और फिर यह जोड़ दूँगा कि इससे कैंसर ठीक होता है। एक साल में मैं आपको टोपी पहनाकर अरबपति हो जाऊँगा।

एमिग्डालिन आज-कल चर्चा में है। नाम नहीं सुना आपने ? जी , बिलकुल न सुना होगा। सच्चे नाम नीरस होते हैं और क्लिष्ट भी। आपके कानों को मुलायम झूठों की आदत जो है। इसी को आजकल बी 17 विटामिन बताकर इंटरनेट पर धुआँधार प्रचारित किया जा रहा है। और दावे किये जा रहे हैं कि इससे कैंसर ठीक हो जाता है।

एमिग्डालिन की कहानी आज से नहीं चल रही ; यह 1950 से प्रचलन में है। इससे कोई कैंसर-वैंसर ठीक नहीं होता। बल्कि इसमें वह सायनाइड पाया जाता है , जिसके बारे में आपने सुन रखा होगा। हाँ , यह इतना ज़हरीला नहीं कि इसे चखने भर से आपका दम निकल जाए : लेकिन इसे महीनों खाने से सायनाइड की विषाक्तता आपको निश्चय ही हो सकती है।

सेबों , खुमानियों और आडुओं के बीजों में भी एमिग्डालिन पाया जाता है। आप कहेंगे कि फिर हम सेब का बीज खाकर मरते क्यों नहीं। सायनाइड भी अनेक तत्त्वों से जुड़ा रहता है और हर बार वह इस तरह नहीं मौजूद होता कि लिट्टे वालों की तरह आपने जीभ पर सेब का बीज धरा और प्राण निकले। हाँ , फिर वही बात कि लगातार महीनों-सालों सेब के बीज-ही-बीज खाने पर यह सायनाइड आप पर अपना ज़हरीला असर ज़रूर दिखाएगा।

एमिग्डालिन के कैंसर-उपचार पर ख़ूब काम हो चुका। अमेरिका-यूरोप में शोधपत्र छपे , कुछ सकारात्मक नहीं निकला। उलटा इसमें सायनाइड होने के कारण पश्चिम के बहुत से देशों में इसे प्रतिबन्धित कर दिया गया।

Skand Shukla

भोलापन , मूर्खता और मूढ़ता एक ही स्पेक्ट्रम पर पायी जाने वाली तीन मनोदशाएँ हैं। भोले पर आप स्नेह बरसाते हैं क्योंकि उसमें बचपन दिखता है। मूर्खता पर चिढ़न के साथ हँसते हैं। मूढ़ता पर आपकी आँखें चढ़ जाती हैं क्योंकि वह आपकी सही बात पर भी कुतर्क करता है।

लेकिन आप भारतवासी भोलू हैं। विटामिन , हर्बल और कैंसर तीनों एक जगह जमा करके मैं आपको उल्लू बनाना जानता हूँ। अरे अभी आप हिन्दू-मुसलमान से ऊपर नहीं उठ पाये , एमिग्डालिन और सायनाइड तक क्या ख़ाक पहुँचेंगे ! मैं आपकी जेब काटता रहूँगा , मुनाफ़ा बनाता रहूँगा। मुझे बाज़ार का रुख़ पता है , आप केवल धर्म-धर्म जपिए और जेबें ढीली करिए।

सुकरात होना सहज-सुलभ नहीं। उन्होंने अज्ञान को ही विकार माना। अज्ञान ही बुरा है। और कुछ बुरा है ही नहीं। और अगर आप सुकरात से भी ऊपर उठ पाएँगे तो सम्भवतः आपको बहुत सी मूर्खताएँ और मूढ़ताएँ भोलापन बनती जान पड़ें।

सबसे बड़ा ईश्वर पैसा है संसार में। यह सच मैं बाज़ार का लुटेरा उद्योगपति जानता हूँ। आप अपने ईश्वरों को लिए मर-खपिए। मैंने आपकी जेबों में सुराख बना दिये हैं।

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