संदीप वर्मा : एक आम आदमी की वैचारिक-यात्रा की बेतरतीब कहानी

Vivek "Samajik Yayavar"

संदीप वर्मा के पिता के बचपन में ही उनकी माता का देहांत हो चुका था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कभी इस रिश्तेदार के यहां, कभी उस रिश्तेदार के यहां भटकते हुए बिन माता के बालक संदीप के पिता का बचपन से किशोरावस्था का समय किसी तरह व्यतीत हुआ। किसी तरह दिल्ली पहुंचे, वहां जिन मुस्लिम व्यक्ति के यहां घड़ी सुधारने का काम सीखा, ताकि जीवन की गुजर बसर हो सके, आजीवन उनको अपना गुरू मानते रहे, पैर छूकर आदर देते रहे, गुरू शिष्य की परंपरा का निर्वाह करते रहे। सर्वधर्म सौहार्द का भाव व विनम्रता संदीप को उनके पिता से ही प्राप्त हुए।

संदीप ने लखनऊ विश्वविद्यालय से विज्ञान की पढ़ाई की है। संदीप वर्मा की पढ़ाई उनके गांव व लखनऊ शहर के सस्ते सरकारी स्कूलों व लखनऊ विश्वविद्यालय में हुई। संदीप को पत्रिकाएं पढ़ने का बहुत शौक था लेकिन खरीदने के लिए पैसे नहीं होते थे। इसलिए यहां वहां से उधार मांग कर जुगाड़ करते थे।

पिछड़े जाति के होने का दंश भोगने व बचपन से ही शोषण व व्यवस्था की खामियां भोगते रहने के कारण भ्रष्टाचार के विरुद्ध खड़े होना है, करना है; कुछ ऐसी सोच बनी। संभवतः पत्रिकाएं व पुस्तकें पढ़ने की प्रवृत्ति के कारण जो ढोंग है, जो प्रायोजित है, उससे इतर भेद कर देखने की दृष्टि भी बननी शुरू हुई। 

Sandeep Verma

संदीप वर्मा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के प्रति विशेष अनुराग व आदर का भाव रखते हैं। इसका कारण वीपी सिंह के द्वारा राजनैतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाना तथा मंडल कमीशन जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक न्याय के कार्य इत्यादि हैं। उस समय किशोरावस्था से युवावस्था की ओर बढ़ रहे संदीप वर्मा राजनैतिक भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वीपी सिंह के आवाहन के साथ जमकर, परिश्रम करते हुए भरपूर सक्रियता के साथ जुटे पड़े थे।

भारत में आम आदमी वह भी जो सरल आदमी हो, उसके लिए संभावनाएं नहीं रहतीं हैं, उल्टे शोषण तिरस्कार अपमान ही मिलता है। लेकिन मन के अंदर सामाजिक न्याय के लिए करते रहने की भावना कुछ न कुछ किसी न किसी मार्ग से करवाती रही। इसी प्रक्रिया में लगभग छः वर्ष पहले फेसबुक में आने के बाद संदीप वर्मा को महसूस हुआ कि सोशल मीडिया का सामाजिक न्याय व राजनैतिक चेतना के लिए बेहतर प्रयोग किया जा सकता है। संदीप लग गए वीपी सिंह की दलितों पिछड़ों व सामाजिक न्याय के प्रति सोच को लेकर। 

सामाजिक न्याय व चेतना के प्रयासों को विस्तार देने के लिए लगभग तीन वर्ष पहले "जमावाड़ा" के नाम से सामाजिक चर्चाओं की सभाओं के आयोजन में। तीन लोगों से आरंभ हुआ जमावाड़ा आज पचास से अधिक लोगों का मंच है जो वैचारिक चर्चाएं करता है तथा घृणा की प्रचलित राजनीति के विपरीत जाकर प्रेम, सद्भाव और सहयोग के लिए प्रयास करता है। 

मेरी मुलाकात:

मैं लखनऊ गया हुआ था। फेसबुक से सूचना पाकर संदीप वर्मा मुझसे मिलने आए। शिक्षक हैं, लेकिन केवल मेरे साथ दिन बिताने के लिए अपना काम-काज छोड़कर साथ रहे, जबकि इनकी परिस्थिति रोज कुआं खोदना व रोज पानी पीने जैसी है। उनकी इच्छा थी कि मैं उनके घर चलकर रूखा-सूखा जो है वह भोजन करने चलूं, लेकिन उस दिन मेरी इतनी व्यस्तता थी कि संभव नहीं था। फिर भी संदीप भाई के ऊपर भोजन उधार है, जब भी भारत में कुछ दिनों के लिए पहुंचूंगा तब उधार वसूला जाएगा।

बेहद विनम्र व सरलमना व्यक्ति। मेरी पहली मुलाकात थी। सोशल मीडिया में बहुत बार ऐसा होता है कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का ठीक से अनुमान नहीं हो पाता। पूरा दिन साथ रहने के बाद मेरे अनुभव संदीप भाई के साथ बहुत अच्छे रहे। मुझे स्पष्ट महसूस हुआ कि एक आम आदमी जो सरलमना है, दांवपेच नहीं खेलता, मन में जो भाव हुआ उस आधार पर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखता है। तब से मैंने संदीप भाई की फेसबुक पोस्टों व टिप्पणियों को अलग भाव व दृष्टि से देखना समझना शुरू किया, मुझे यह महसूस होना शुरू हुआ कि संदीप भाई संवेदनशीलता के साथ लिखते हैं।

फेसबुक के माध्यम से मालूम हुआ कि संदीप भाई को कांग्रेस ने लखनऊ का विचार विभाग का दायित्व सौंपा है। संदीप जैसे आम आदमी, सरल आदमी जिसे राजनैतिक दांवपेच का ककहरा भी नहीं आता; कांग्रेस ने ऐसे बेहद सामान्य आदमी को लखनऊ जैसे आधुनिक शहर व उत्तर प्रदेश की राजधानी का विचार विभाग का दायित्व देकर, छोटा सा ही सही लेकिन कम से कम बदलाव का एक संदेश तो दिया ही है। 

Vivek Umrao Glendenning "SAMAJIK YAYAVAR"

He is an Indian citizen & permanent resident of Australia and a scholar, an author, a social-policy critic, a frequent social wayfarer, a social entrepreneur and a journalist;He has been exploring, understanding and implementing the ideas of social-economy, participatory local governance, education, citizen-media, ground-journalism, rural-journalism, freedom of expression, bureaucratic accountability, tribal development, village development, reliefs & rehabilitation, village revival and other.

For Ground Report India editions, Vivek had been organising national or semi-national tours for exploring ground realities covering 5000 to 15000 kilometres in one or two months to establish Ground Report India, a constructive ground journalism platform with social accountability.

He has written a book “मानसिक, सामाजिक, आर्थिक स्वराज्य की ओर” on various social issues, development community practices, water, agriculture, his groundworks & efforts and conditioning of thoughts & mind. Reviewers say it is a practical book which answers “What” “Why” “How” practically for the development and social solution in India. 

About the author

.

1comment

Leave a comment: