संबंधों में उक्ताहट

Pratima Jaiswal[divider style=’right’]

कड़ाके की ठंड में घर में एक ही छोटा-सा पलंग था. वो रात में बीच-बीच में उठकर देखता रहता था कि कहीं उसे पैर तो नहीं लग रहा है, कहीं उसकी चादर तो नीचे नहीं गिर गई है. वो खुद ये बातें जब बताती थी, तो लगता था कि कितना प्यार करता है इसका पति. लेकिन उस वक्त मुझे झटका लगा जब मैंने उसे किसी दूसरे लड़के के साथ मेट्रो स्टेशन पर दूसरे अंदाज में देखा. लड़के के जाने के बाद मैंने उससे धोखे की वजह पूछी तो बोली ‘मुझे उसके प्यार में पिता वाली फीलिंग आती है, फैंटेसी चाहिए मुझे, जो उसे देखकर नहीं आती.’

ये बेतुकी बात सुनकर मैंने उसे कोई ज्ञान नहीं दिया और अपना रास्ता नापने में ही भलाई समझी. अपने आसपास कई बार ऐसी कहानियां देखती हूं जिन्हें देखकर लगता है कि समाज, परिवार तो प्रेम के दुश्मन बाद में हैं. पहले तो ये लोग प्रेम के सबसे बड़े दुश्मन हैं.

एक और दोस्त है, जिन महाशय ने अपनी प्रेमिका को इसलिए छोड़ दिया क्योंकि वो मां की तरह उसका ख्याल रखती है. हमेशा उससे प्रेम के इजहार का कोई मौका नहीं छोड़ती. उनके मुताबिक वो वैसी अट्रैक्टिव लड़की नहीं है, जैसी उसे चाहिए थी. उसका मन और नजरें इसलिए काबू नहीं रह पाती. प्रेमिका वैसी हो, जिसके सामने आते ही सारी दुनिया को भूलकर उसके साथ दिन बिताने का मन करने लगे.

उसकी बातें सुनकर ऐसा लगा जैसे किसी टीनएजर से बात कर रही हूं. जबकि उसकी उम्र 30 साल के आसपास है. कभी हमें लगता था कि मन का भटकाव और नायक-नायिका पूजा, फैंटेसी दुनिया एक उम्र का पड़ाव है. एक उम्र बाद प्रेम की गंभीरता समझ आने लगेगी.

लेकिन मैंने तो ऐसे लोगों को भी देखा है जो सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और दुनिया भर को ज्ञान देते हैं, लेकिन खुद कई लड़कियों को एक-साथ शादी के भ्रम में रखे हुए हैं. शादी अपने प्रेम से नहीं बल्कि अपने भविष्य से करेंगे. जिसके साथ पैसों की तंगहाली वगैरह जैसी दिक्कतें नहीं आए. लाभ-हानि के बही खाते को खोलकर अपने लिए आदर्श प्रेम चुनते हैं. कोई प्रेम से इतना ऊब चुका है कि जीवनसाथी के प्रेम की न ही परवाह है न ही उसकी मौजूदगी का महत्व. https://karensingermd.com/ उन्हें बस अटेंशन चाहिए. उनके लिए किसी एक को छोड़कर सब महत्व रखते हैं. उन्हें कोई एक नहीं सब चाहिए.

वहीं कुछ लोग ऐसे हैं, जो भूतकाल में जी रहे हैं, जबकि जीवन में नए प्यार को स्वीकार कर चुके हैं फिर भी उन प्रेम कहानियों में जी रहे हैं, जिसके किरदारों ने उन्हें कभी महत्व नहीं दिया. नया प्यार क्योंकि मिल चुका है इसलिए खोने का कोई डर नहीं है. कई जोड़े ऐसे भी हैं, जिनमें एक प्रेम में डूबा और तो दूसरा प्रेम से ऊबा हुआ है. जिंदगी में परेशानियां किसे नहीं आती लेकिन उनके लिए प्रेम भटकाव है और सारी परेशानियों का मूल प्रेम या उनका पार्टनर ही है. ऐसा कुछ वक्त बाद महसूस करने लगते हैं.

Pratima Jaiswal

कुछ प्रेम कहानियों में किसी तीसरे को एंट्री दे दी जाती है. कहने को दोस्त है खास है लेकिन हर पल किसी दूसरे का हक मारे बैठा है. दो के बीच में कोई तीसरा आ जाए, तो दो रह सकते हैं क्या? ऐसे लोग खुद अपना घर तोड़ते हैं. इतिहास के पन्ने पलट लीजिए.

कुल मिलाकर समाज, परिवार से लड़ना तो बाद में है, पहले खुद साथ रहना और दोनों तरफ से प्रेम बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है. आधुनिकता का एक घाटा ये भी है कि लोग प्रेम से ऊबने लगे हैं. उसपर भी अगर किसी में प्रेम बचा भी है, तो साथी की बेरूखी, अनदेखापन उसे भी प्रेम से एक दिन ऊबा देगा. धीरे-धीरे सब खत्म हो जाएगा. प्रेम कहानियां और किरदार हर रोज थोड़ा-थोड़ा मर रहे हैं.

इन सब बातों से अलग अगर आपके पास कोई ऐसा साथी, ऐसा प्यार है, जिसके लिए आप दुनिया में सबसे ज्यादा महत्व रखते हैं. आपको देखते ही सारी थकान, परेशानियां भूलकर चेहरे पर मुस्कुराहट आ  जाती है या आपको स्पेशल फील कराने या मुस्कुराने के मौके तलाशता रहता है, तो उसके महत्व को समझिए. जाने मत दीजिए संभालकर रखिए उसे. आप सच में खुशकिस्मत है. प्यार है तो प्रेम बना रहना चाहिए और अगर नहीं है तो किसी कहानी के किरदार मत बनिए, न कभी किसी के प्रेम का तिरस्कार कीजिए और न कभी खुद को तिरस्कृत होने दीजिए.

बाकी आपका नजरिया है.

Comments

One response to “संबंधों में उक्ताहट”

  1. Sarita bharat

    प्रेम बनाये रखना किसी चुनोंति से कम नही हं लेखिका ने व्यंग और कटाक्स और प्रेम के प्रति हो रही उदासीनता व ढोंग को बखूबी प्रयास किया हं साथ ही प्रेम पर हो रहे हमलों की निंदा अपने शब्दों में की हं बधाई।

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