भारत के लोगों व राजनीतिक दलों के लिए दो बातें क्रिस्टल क्लियर साफ हैं। या तो आप सच में मानते हैं कि ईवीएम में छेड़खानी की जाती है या आप नहीं मानते हैं कि ईवीएम में छेड़खानी की जाती है। ईवीएम में छेड़खानी की जा सकती है या नहीं, यह चर्चा का वास्तविक मुद्दा बिलकुल भी नहीं हो सकता है क्योंकि दुनिया की कोई भी मशीन परफेक्ट नहीं। मुद्दा सिर्फ यह हो सकता है कि आप ईवीएम में छेड़खानी की जाती है, ऐसा मानते हैं या नहीं मानते हैं।
यदि आप ईवीएम में छेड़खानी नहीं मानते हैं:
यदि आप मानते हैं कि ईवीएम में छेड़खानी नहीं की जाती है तो चुनाव प्रक्रिया होते समय व चुनाव परिणाम आने के बाद ईवीएम को दोष देना बिलकुल भी उचित नहीं। चुनाव प्रक्रिया के समय व चुनाव परिणाम आने के बाद ईवीएम ईवीएम चिल्लाना बिलकुल ही गलत है।
यदि आप ईवीएम में छेड़खानी मानते हैं:
लेकिन यदि आप मानते हैं कि ईवीएम में छेड़खानी की जाती है तो सारे कामकाज छोड़कर केवल और केवल ईवीएम के विरोध में बहुआयामी व्यापक अभियान तब तक चलाया जाना चाहिए जब तक ईवीएम का प्रयोग पूरी तरह से हमेशा के लिए बंद न हो जाए।
ईवीएम का विरोध करने के लिए फेसबुक व व्हाट्सअप इत्यादि में फर्जी क्रांतिकारी बनने, फर्जी क्रांतिकारिता का ढोंग करने, गाली बकने, लाइक करने, शेयर करने, कमेंट करने से कुछ भी नहीं होने वाला। आपको अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आना होगा, आपको वास्तविक धरातल पर आना होगा, आपको वास्तविक लोगों के बीच वास्तविकता में जाकर वास्तव में खतरे उठाते हुए संघर्ष करना होगा।
यदि आपको शून्य दशमलव शून्य एक (0.01) प्रतिशत भी लगता है कि ईवीएम में छेड़खानी की जाती है तो आपको सारे कामकाज रोक कर सबसे पहले ईवीएम के प्रयोग के खिलाफ अनवरत अनथक अभियान चलाना चाहिए।
जो जो राजनैतिक दल व मतदातागण वास्तव में ईवीएम के प्रयोग के विरोध के प्रति गंभीर हैं तो आपको बिना किसी नानुकुर व किंतु परंतु के प्रारंभिक चरण में निम्न कार्यक्रम तत्काल प्रभाव से करने ही चाहिए –
- जिन जिन राज्यों में आपकी सरकारें हैं, वहां से स्तीफा दीजिए।
- राजनैतिक दलों के सभी सासंदों व विधायकों को पूरे देश में एक साथ त्यागपत्र देना चाहिए, बिना किसी ढोंग या नौटंकी के।
- ईवीएम के प्रयोग बंद होने तक किसी भी चुनाव में भागीदारी बिलकुल बंद कर देनी चाहिए।
- चुनाव होने के समय स्थानीय स्तर व व्यापक स्तर पर असहयोग आंदोलन व जेल भरो आंदोलन चलाए जाने चाहिए, बिना किसी ढोंग या नौटंकी के।
- ईवीएम के मुद्दे के अतिरिक्त किसी भी चुनावी मुद्दे पर कोई मीडिया चर्चा नहीं, मीडिया में चुनाव से संबंधित अन्य किसी मुद्दे पर चर्चा का पूरी तरह से बहिष्कार।
- जिन मतदाताओं का मानना है कि ईवीएम में छेड़खानी होती है उनको भी चुनाव प्रक्रिया में असहयोग आंदोलन करना चाहिए।
- जब तक ईवीएम का प्रयोग पूरी तरह से बंद न हो जाए तबतक किसी भी मनोविज्ञान व रणनीति के जाल से अप्रभावित रहना चाहिए।
यदि आप बहानेबाजी करने की बजाय सच में ही यह मानते हैं कि ईवीएम में छेड़खानी की जाती है तो केवल यही लोकतांत्रिक व समाधान का रास्ता है, ईवीएम के प्रयोग को बंद करवाने का।
रास्ता मुश्किल है, गंभीर त्याग व संघर्ष भी मांगता है, लेकिन यदि इच्छाशक्ति से चले तो विजय सुनिश्चित है। रास्ता मुश्किल है लेकिन बहुत जल्द समाधान मिलेगा। कोई और रास्ता भी नहीं। सोशल नेटवर्किंग साइट पर क्रांति की नौटंकी तो बिलकुल ही बेबुनियाद व दिशाहीन रास्ता है।

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