नौ का पहाड़ा

Nishant Rana
Director and Sub-Editor, 

Ground Report India (Hindi)

वह बच्चा पतली सी न टूटने वाली डंडी की मार से जमीन पर नीचे पड़ा था।

मम्मी, जो स्कूल में जा कर उस बच्चे की मैम हो जाती थी, ने नौ का पहाड़ा घर से याद करने को कहा था। नौ का पहाड़ा उसके लिए अभी खेल है वह नौ का पहाड़ा दोहराए जा रहा है नौ ई कना नौ, नौ दूनी अट्ठारह, नौ तिया सत्ताईस… मम्मी देखो मेरे को तो एक दम याद हो गया, सुनो नौ ई कना नौ, नौ दूनी अट्ठारह नौ तिया सत्ताईस, नौ चौक छत्तीस… नौ दहाई नब्बे। मैंने तो अभी ही सुना दिया तुम कुछ कहोगी तो नहीं मैं भूल गया तो!

– नहीं!

“पहाड़ा दिया था सुनने को चलो तुम सुनाओ।” सबको ताजा कर दे ऐसी मुस्कान लिए बच्चा पहाड़ा सुनाना शुरू करता है नौ ई कना नौ, नौ दूनी अट्ठारह, नौ तिया सत्ताईस, नौ चौक…. नौ चौक…. मैम जी मैंने घर पर तो सुनाया था, मैंने याद किया था।

डंडी उठती है और उस बच्चे पर जमीन पर चीखते-चिल्लाते पड़े होने पर भी पड़ती रहती है।

वह बच्चा पतली सी न टूटने वाली डंडी की मार से जमीन पर नीचे पड़ा था, शारीरिक चोट उसके लिए नई नहीं थी लेकिन ठगे जाने, विश्वास टूटे जाने को महसूस करने का उसका यह पहला अनुभव था।

Nishant Rana

Nishant Rana

Social thinker, writer and journalist. 

Devoted to the perpetual process of learning and exploring through various ventures implementing his understanding on social, economical, educational, rural-journalism and local governance. 


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