जामुन का भूत

Shayak Alok


किसी गाँव में जब गोबर नाम का गरीब मरा
तो भूत हो गया
तो वह भूत रहने लगा उसी गाँव के बँसवारी में
पहलेपहल तो यह बात गाँव की कानी बुढ़िया ने कही और
फिर किस्से शुरू हो गए

एक दिन जब गोबर ने उठा पटक मारा
पास वाले गाँव के सुखला साहूकार को
और उसका बटुआ भी छीन लिया तब तो बड़ा हंगामा हुआ
सुखला का गमछा पाया गया गाँव से दो कोस दूर
ऐसा बिछा हुआ जैसे गोबर ही उस पर सुस्ताने दो दम मारा हो

तो तय यह पाया गया कि हाथ पैर जोड़
कर बुला लिया जाय रामनारायण पंडित को
और खूब जोर से कच्चे धागे से बंधवा दिया जाय उस नासपीटे जामुन को
जामुन जो बँसवारी का अकेला ऐसा पेड़ था
जो बांस नहीं था

लेकिन उसी रोज रात में घटी एक और घटना
‘न देखा न सुना’ – कहते हैं गाँव के बड़े बुजुर्ग
बिशो सिंह के दरवाजे सत्तनारायण संपन्न करा
के लौट रहे रामनारायण पंडित को
बँसवारी के आगे धर दबोचा गोबर ने
और ऐसा भूत मन्त्र मारा कि गूंगे हो गए बेचारे
बोलते हैं तो सिर्फ चक्की के घिर्र घिर्र की आवाज़ आती है

कहते हैं कि गोबर के दोमुंहे पुराने घर थी ऐसी ही एक चक्की जो
उसके बाप ने अपने बाप के श्राद्ध में
रामनारायण को गिरवी बेचा था

खैर, जामुन के भूत को बाँध दिया गया और
गोबर से शांत रहने की प्रार्थना की गई

गोबर जो पूरी ज़िन्दगी दो जून की रोटी की फिक्र में रहा
उसका भूत
हर शनिवार को खाता है बताशे
कभी भूख बढ़ने पर जन्मते ही खा जाता है
मवेशियों के बच्चे
अपने साथी भूतों के भोज के लिए एक दिन जला डाला
मुर्गों का दड़बा
चबाई हड्डियाँ डोभे में फेंक दी

गोबर के भूत ने न्याय लाया है गाँव में
मुंह अँधेरे अब शौच जाने से नहीं डरती चंपा
हर महीने सरसतिया के जिस्म पर आने वाला भूत
अब नहीं आता
गुनगुनाते हुए बड़े दालान से गुजर लेती है अठोत्तरी

सुना है गोबर अन्य भूतों संग रोज रात को बँसवारी में करता है बैठकें
हंसने और जोर जोर से बतियाने की आवाज़ आती है

टीवीन्यूज़ पर जब से आई है गोबर की कहानी
सरकार फिक्रमंद है आम जान माल को लेकर
भूतों की सत्ता चुनौती है सरकार के लिए
और इसलिए सेना निपटेगी उनसे
लोकसभा चुनाव के पहले पहल

मज़े में जी रहे जामुन के भूत को दूसरा जामुन ढूंढना होगा.

जामुन के भूत के साथी

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