चाय या दोस्ती की मिठास

ख़त्म हो चुके चाय के कप के
तलों में बची कुछ बूँद चाय
अब ऐसी ही मित्रता है
कुछ बेहतरीन शख्सियतों की
‘मेरे लिए’
कभी ये दोस्ती की चाय का कप
था लबालब,
गर्मजोशी ऐसी, जैसे भाप उगलता कप
हर पल सुगंध ऐसे जैसे
चाय के साथ इलायची की अलबेली सुगन्ध
मित्रता में रिश्ते का छौंक व
जिंदादिली से भरपूर मिठास
हर सिप को जिया है !!
खैर ! कप के चाय की अंतिम बून्द
शायद सूख चुकी या सूखने वाली है
पंखा भी तो पांच पर चल रहा !
फिर भी
दोस्ती जिंदाबाद के नारे के साथ
ऐसे लिखते हुए भी
उम्मीद कर रहा है
फिर से एक और चाय का कप ।
मौसम की आद्रता बचाये रखेगी
चाय या दोस्ती की मिठास
समझे न !
उम्मीद ही अहमियत है ! https://karensingermd.com

Comments

One response to “चाय या दोस्ती की मिठास”

  1. मुकेश कुमार सिन्हा

    शुक्रिया सर …….. 🙂

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