बिहार के लोकप्रिय युवा नेताओं की स्कूली शिक्षा का लफड़ा

सामाजिक यायावर

मैं आज तक लालू प्रसाद यादव से नहीं मिला, उनकी संतानों से मिलना तो बहुत दूर की बात है। मेरी औकात ही नहीं जो मैं समाजवादी सोच के राजनेताओं से मिल पाऊं, क्योंकि शायद मेरी सोच समाजवादी नहीं। किंतु मुझे लालू प्रसाद यादव के पुत्रों के मंत्री बनने से कोई आपत्ति नहीं। उनके पुत्रों को बिहार के लोगों ने अपना जन प्रतिनिधि बनाया है। राष्ट्रीय जनता दल को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में विजयी बनाते समय बिहार के लोगों को साफ साफ पता था कि लालू प्रसाद यादव की संताने मंत्री बनेगीं।

अब रही बात कि लालू प्रसाद यादव की संतानों के पास विश्वविद्यालयी डिग्रियां नहीं हैं, तो इस वाहियात बात पर मुझे सिर्फ इतना कहना है कि आजादी के बाद देश को तथाकथित पढ़े लिखे लोग ही तो चलाते आए हैं, उन्होंने देश को घिनौना बना दिया।

IIT के पढ़े लिखे व भारत के जल संसाधन विभागों के राष्ट्रीय अधिकारियों को तो इतनी भी समझ नहीं कि गंगा नदी की ड्रेजिंग करने से उसकी बची खुची सांसे भी खतम हो जाएंगीं।

देश के मानव संसाधन व विकास मंत्रालय जिसके अधीन भारत का संपूर्ण शिक्षा का ढांचा है, उसकी केंद्रीय मंत्री की डिग्रियों पर सवाल खड़े होते रहे हैं, लेकिन मंत्री महोदया पिछले डेढ़ वर्षों से देश की शिक्षा को ऐतिहासिक गति दे रही हैं। देश के तकनीकी व व्यवसायिक संस्थानों से बेकार के लोगों को त्यागपत्र देने से मजबूर किया ताकि देश को तरक्की के रास्ते पर भरपूर गति से दौड़ाया जा सके।

देश के माननीय प्रधानमंत्री भी देश के लाखों करोड़ों युवाओं की तरह डिग्रीधारी नहीं हैं लेकिन विदेशों में भारत का नाम ऊंचा किए हुए हैं, सुर्खियों में बने हुए हैं। देश के लाखों करोड़ों पढ़े लिखे लोग रात दिन अपना काम धंधा छोड़ कर प्रधानमंत्री जी की शान में कसीदे पढ़ते रहते हैं।

देश के अधिकतर डिग्री धारी लोग उन सेठों के यहां नौकरी करते हैं जो सेठ पांचवी भी पास नहीं हैं। देश में बहुत IAS सिर्फ BA या BSc हैं लेकिन उनके अंडर में B.Tech, M.Tech, MBBS, MD, MS, PhD, Post Doc आदि एक टांग में खड़े जी हुजूरी करते रहते हैं।

देश में ऐसे हजारों डिग्री कालेज व विश्वविद्यालय हैं जहां कुछ हजार रुपए देकर बिना एक भी दिन कक्षा में जाए मनचाही श्रेणी के साथ BSc व MSc तक की डिग्री प्राप्त की जाती है। जब गली मुहल्लों के लौंडे व लौंडियाएं ऐसी डिग्री लेकर जुगाड़ से सरकारी नौकरी करते हुए घूम सकते हैं तो जिनके माता व पिता दोनों ही देश के दूसरे सबसे ताकतवर राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हों, वे जब चाहते जैसी चाहते वैसी मनचाही डिग्री ले सकते थे। लेकिन उनके द्वारा ऐसा न करना ही उनकी स्कूली पढ़ाई के प्रति ईमानदारी का सबूत है इसलिए मैं व्यक्तिगत रूप से डिग्री के मुद्दे पर लालू प्रसाद यादव की संतानों को अपना समर्थन देना चाहता हूं।

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