जागरूक युवा बनाम उदासीन युवा

Sachin Raj Singh Chauhan[divider style=’right’]

जब बच्चा जन्म लेता है तो कई उम्मीदें भी जन्म लेती है, कई सपने भी देखे जाते है और आगे चलकर जब बच्चा युवा होता है तो वह सारी जिम्मेदारियों को अपने विशाल कंधो पर धारण कर लेता है ठीक उसी तरह माँ भारती को भी अपने बच्चों से पूरी उम्मीदें है देखना यह है कि आप कितने ईमानदार है और अपने कर्तव्य के प्रति कितने सजग है |

मन व्यथित होता है जब देखता हूँ कि आज के युवा जातिवाद, साम्प्रदायिकता, तथाकथित राष्ट्रवाद जैसे निरर्थक शब्दों के मायाजाल में अपना बहुमूल्य समय नष्ट ही नहीं अपितु लोककल्याण जैसी भावनाओं का समूल नष्ट कर रहे है | आने बाले दिनों में इसके बड़े घातक और दुष्परिणाम हमें झेलने पड़ेंगे |

आज जब इस देश को अवतारवाद, रूढ़िवाद, जातिवाद और सम्प्रदायवाद को ख़त्म करने के लिए युवाओं की जरूरत है तब यही युवा दृष्टिहीन और विवेकहीन होकर देश में अपनी सत्ता और प्रभाव बरकरार रखने बाले ठेकेदारों के छलावे में आकर अपने अस्तित्व और जिम्मेदारिओं को ही भूल चुके है |

[pullquote align=”normal”]आज देश की एकता, अखंडता, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिकता को बचाने की सख्त जरूरत है हम सभी युवाओं को साथ आकर लोककल्याण, विकास, समृद्धि, जागरूकता, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के लिए एक बड़े संघर्ष की जरूरत है | आप अपने स्तर पर शुरू कर सकते है | यह विकल्प आपका है कि आप देश की अखंडता के साथ खड़े है या फिर तथाकथित राष्ट्रवाद के साथ | [/pullquote]

सनद रहे राष्ट्रवादी वही है जो एक समृद्ध, खुशहाल और प्रगतिशील राष्ट्र का निर्माण करना चाहते हैं और राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब लोक का निर्माण हो क्योंकि राष्ट्र लोक से बनता है न कि लोक राष्ट्र से और लोक का निर्माण तभी संभव है जब हम सभी लोग आपस में सौहार्द, विश्वास और बिना किसी भय के साथ रहें और एक दूसरे की संस्कृति का, मान और सम्मान का आदर और सुरक्षा करे |

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