Ashish Pithiya
हमारे समाज मे मनुष्य सस्ती लोकप्रियता पाने के चक्कर में इतना स्वार्थी होता जा रहा जा रहा हैं कि जीवन जीने की मुलभुल चीजों का विनाश करने पर आ गया हैं और समाज व पर्यावरण के हित-अहित की चिंता किये बीना ही जीवन जीने के मूलभूत स्त्रोतों से नाश करने लगा हैं
“लौटना होगा हमें भी”
लौटना होगा हमें भी,
उन मछुआरों की तरह,
जो खाना ढूंढने जाते हैं, अपने घर से बीच समुन्दर,
और लौट आते हैं वापिस, अपने घर खाना खाने को।
लौटना होगा हमें भी,
उन साँपो की तरह,
जो गर्मी से बचने चले आते हैं, अपने बिलो से बाहर,
और लौट जाते हैं वापिस, अपने बिलो में गर्मी से बचने को।
लौटना होगा हमें भी,
उन साइबेरियन पक्षियों की तरह,
जो अपना अस्तित्व बचाने मिलों दूर से आते हैं,
और लौट जाते हैं वापिस, अपना अस्तित्व बचाने को।
बिलकुल वैसे ही,
लौटना होगा हमें भी।
ठीक उसी जगह जहाँ से ये सब शुरू हुआ था।
साँस लेने के लिए, जंगलों की ओर
पेट भरने के लिए, खेतों की ओर
प्यास बुझाने के लिए, नदियों की ओर
पर उससे भी पहले
उन सारी नदियों को जिंदा करना होगा, जो मर गयी हैं।
वे सारे जंगल फिर से लगाने होंगे, जिनको काटा गया है।
उन सारे खेतों में फिर से फसल लगानी होगी, जो बंजर हो गये हैं।
पर उससे भी पहले
हमें मरना होगा इन जहरीली हवाओं में,
हमें भूखा रहना होगा, आलिशान बड़ी बड़ी इमारतों में
हमें प्यासा रहना होगा, इन चकाचौंध वाली दुनिया में
पर उससे भी पहले
हमें जीना होगा झूठमूठ के सारे ख्वाबों को,
जिसके होने न होने से जीवन में कोई फर्क नही पड़ता।
हमें खाना होगा सारे पैसे को
जिसका भूख से कोई वास्ता नहीं।
हमें तृप्त होना होगा उन सारी प्यासों से
जिसका पानी से कोई रिश्ता नहीं।
फिर लौटना होगा हमें भी।

Ashish Pithiya ‘Farmer’

Comments
13 responses to “लौटना होगा हमें भी − Ashish Pithiya ‘Farmer’”
शानदार लिखा आपने
Nicely wrote about today’s need.
बेहतरीन कविता आशीष जी। साधुवाद आपको इस रचना के लिए।
शानदार लेख
सरल शब्दों में बेहतरीन बात!बधाई आशीष जी।
ऐसा लगा जैसे मैं जो करना और कहना समझना समझाना चाह रहा था वो यही तो था।भाई आशीष की कलम से निकली मेरी ही आवाज है।
Nice
शानदार
बेहतरीन कविता और बहुत ही सुंदर शब्दों का प्रयोग किया है- आशीष
Real pain and feeling of today’s need felt by patriotic man and have been expressed in words.
Nice wordings
Great
बहुत खूब आशीष जी। सरल शब्दों में इतनी सारगर्भित कविता के लिये साधुवाद।शुक्रिया।।धन्यवाद।।मुबारक।।।
बहोत ही उम्दा बात कही आपने आशिष जी