स्वराज यूनिवर्सिटी व स्वपथगामी नेटवर्क द्वारा आयोजित उदयपुर, राजस्थान में जीवन विद्या शिविर 5 – 12 मार्च 2017

Swaraj University

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शिविर के बारे में:

जीवन विद्या शिविर (करीब 40 घंटे की अवधि की) एक गहरे अध्ययन की प्रक्रिया है, जिसमे जीवन के मौलिक परन्तु प्रायः उपेक्षित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। आपसी सम्बन्ध, शिक्षा, समाज, प्रकृति, लक्ष्य, सफलता आदि पर एक गहरा संवाद होता है जिसके द्वारा प्रतिभागियों को ज़िन्दगी के भिन्न प्रतीत होने वाले पहलुओं के बीच की कड़ियाँ पहचानने व समझने का अवसर मिलता है। कोई प्रवचन या उपदेश नही होता। प्रबोधक द्वारा कुछ प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाते हैं, और प्रतिभागियों को उनके आतंरिक विचारों, भयों, सम्भ्राँतियों, आकांक्षाओं आदि को जांचने में सहयोग किया जाता है।  क्रमशः ढेर सारी छिपी मान्यताएं उजागर होने लगती हैं और व्यक्ति को ज़िन्दगी के सूक्ष्म ताने बाने का एक नयी स्पष्टता से दर्शन होने लगता है; मानव में सकारात्मक सृजनशक्ति की नयी संभावनाओं का बोध होने लगता है।  एक सशक्त चिंतन-यात्रा का शिविर में प्रारम्भ तो होता है पर अंत नही …

यह 8-दिवसीय पूर्णकालिक आवासीय शिविर है। उदयपुर, राजस्थान में आयोजित इस शिविर में कुल 30 प्रतिभागियों के लिए स्थान हैं, इस लिए पूर्व पंजीकरण करें।  शिविर में पूर्णकालिक प्रतिभागिता अनिवार्य है, आंशिक प्रतिभागिता की अनुमति नही है। शिविर के दौरान स्वैच्छिक श्रमदान करने का व व्यक्तिगत हुनरों के आदान-प्रदान का भी अवसर रहेगा।

प्रबोधक:

Vinish Gupta

इस शिविर में प्रबोधन श्री विनीश गुप्ता करेंगे। वे लम्बे समय से विभिन्न सामाजिक व पर्यावरणीय अभियानों से जुड़े रहे हैं। करीब दस वर्ष तक वे बौद्ध परंपरा में भिक्षु भी रहे, जिस दौरान उन्हें भारतीय विचारधाराओं व तौर तरीकों को समझने का अवसर मिला। विनीश को उनके कार्यों में सहयोग मिलता है उनकी पत्नी करुणा मुरारजी से। शिक्षा का मानव संभावनाओं व विकास के साथ सम्बन्ध समझने में लम्बे समय से करुणा की रूचि रही है। अन्य विषय जिनके अध्ययन में वे रूचि रखती हैं: आहार, फ़िल्में, प्रक्रिया/इतिहास विश्लेषण, और सीखने-सिखाने व जीने के सामूहिक तौर तरीके।

साथ लाएं:

ओढ़ने व बिछाने की चादरें, तकिये का गिलाफ, कंबल/स्लीपिंग-बैग, निजी वस्त्र, पानी की बोतल, टॉर्च, तौलिया, साबुन आदि निजी उपयोग का सामान, आपके संस्था / कार्य से सम्बंधित सामग्री, व कुछ भी रचनात्मक जो आप को दूसरों के साथ करना / बांटना अच्छा लगता है।

यह शिविर ‘उपहार संस्कृति’ पर आधारित है। यानि इस शिविर के लिए कोई निश्चित अनिवार्य शुल्क नही है।  हर प्रतिभागी पर करीब रुपए 3700 का खर्च आता है।  जिन्हे आवश्यकता हो उनके लिए छात्रवृत्तियां/सहयोग उपलब्ध हैं।  आप अधिक योगदान का सामर्थ्य रखते हों तो आपके योगदान से अन्य लोगों की प्रतिभागिता सुनिश्चित होने में सहयोग रहेगा।

आर्थिक असमर्थता के कारण किसी की प्रतिभागिता बाधित नही होने दी जाएगी।  इस शिविर में भाग लेने के लिए यह ऑनलाइन फॉर्म भरें। या हमसे संपर्क करें <swarajuni.events@gmail.com>

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