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मुहम्मद अकबर हुसैन पांचो वक्त नमाजी हैं, शाकाहारी हैं, हिंदू श्रद्धालुओं को पानी पिलाते हैं, मंदिरों को दान देते हैं, गाएं पालते हैं

अकबर हुसैन (बाएं) सामाजिक यायावर (दाएं)

अकबर हुसैन (बाएं) सामाजिक यायावर (दाएं)

आप हैं जनाब मुहम्मद अकबर हुसैन। आप पांचो वक्त के नमाजी हैं। रोज कुरान पढ़ते हैं। जरूरतमंदों को जकात देते हैं। दशकों तक हर वर्ष पवित्र रमजान माह में बिना नागा रोजा रखते रहे हैं। आजकल व्यापार में दौड़-धूप बहुत होने के कारण रमजान में सीमित रोजा रखते हैं।

अकबर हुसैन मुसलमान होते हुए भी शाकाहारी हैं, मांस नहीं खाते हैं, केवल अंडे खाते हैं। गाय पाल कर डेयरी चलाते हैं, बकरी पालते हैं। आजकल डेयरी व बकरी पालन को स्वावलंबित करने के लिए जोरशोर से प्रयास में लगे हुए हैं। आठवीं पास अकबर हुसैन स्मार्ट फोन रखते हैं, इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। रोज रात में यूट्यूब देखते हैं जिनमें गाय व बकरियों व खेती आदि के बारे में वीडियो होते हैं।

आपके पूर्वज उत्तर प्रदेश राज्य से थे लेकिन अकबर साहब की पैदाइश छत्तीसगढ़ राज्य के जगदलपुर शहर में हुई। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अकबर साहब को नौवीं कक्षा से पढाई छोड़नी पड़ी। अकबर हुसैन कहते हैं कि भारत में हिंदू व मुसलमान सभी एक हैं, अंतर केवल यह है कि लोग अलग-अलग ईश्वर को मानते हैं। इनका मानना है कि अलग-अलग ईश्वर को मानने के बावजूद प्रेम से रहना भारतीय समाज की खासियत है।

पांचो वक्त के नमाजी अकबर हुसैन रोज कुरान पढ़ने के बावजूद मंदिरों को दान देते हैं। प्रतिवर्ष नवरात्रों में मंदिर के दर्शन करने आने वाले हजारों लोगों को पेयजल खरीद कर उपलब्ध कराते हैं। कभी कभार तो इनके द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले पानी की पाउचों की संख्या दस हजार भी पार कर जाती है। अर्थात नवरात्रों में दसियों हजार रुपए मंदिर में ईश्वर के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पानी का इंतजाम करने में खर्च करते हैं।

दंतेवाड़ा जिले मे स्थित माँ दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ का सबसे प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में फुल पैंट पहन कर जाना प्रतिबंधित है। इसलिए मंदिर फुल पैंट वाले दर्शनाभिलाषियों को लुंगी उपलब्ध कराता है। अकबर हुसैन मंदिर को सैकड़ों अच्छी गुणचत्ता की पीली लुंगियाँ दान देते हैं, जिनको पहन कर श्रद्धालु लोग माता दंतेश्वरी के दर्शन करते हैं।

अकबर हुसैन कहते हैं कि डेयरी को स्वावलंबित करने के लिए बाजार से दाना खरीदना बंद करना पड़ेगा। गायों को हरा व खेती करके उगाया जाने वाला चारा उगा कर देना पड़ेगा। इससे गायों स्वस्थ रहती हैं, पुष्ट होती हैं और उनका दूध भी बढ़ता है।

अकबर हुसैन की डेयरी में कई प्रजातियों की गाएं हैं लेकिन उनकी योजना है कि भविष्य में केवल अच्छी जाति की देशी गाएं हों।

बकरी-घर :

मुहम्मद अकबर हुसैन का बकरी-घर

मुहम्मद अकबर हुसैन का बकरी-घर

अकबर हुसैन बकरियां भी पालते हैं। बकरियों के लिए इन्होंने बकरी-घर बनावाया है। बकरी-घर में गर्भवती व छोटे बच्चों वाली बकरियों के लिए अलग व्यवस्था है ताकि बच्चों के साथ बड़ी बकरियां मारपीट न करें। बकरियों की लेड़ी अपने आप नीचे गिरती है जिसको एकत्र करके बेच देते हैं या खाद के लिए प्रयोग कर लेते हैं। बकरियों के लिए पत्तियों वाले पौधो का रोपड़ कर रहे हैं ताकि बकरियों को बेहतर, स्वादिष्ट व पौष्टिक भोजन मिल सके।

अकबर हुसैन जब गायों व बकरियों की बातें करते हैं तो इनका चेहरा चमक जाता है। घंटों बाते करते रहते हैं। गायों के रहने का इंतजाम साफ सुथरा रहता है। रोज सुबह शाम सफाई होती है। कई बार नहलाते हैं। शाम व सुबह खुले में टहलने के लिए छोड़ते हैं।

अकबर हुसैन व सामाजिक यायावर

अकबर हुसैन व सामाजिक यायावर

गायों व बकरियों की देखभाल अपने परिवार की तरह करते हैं। सामाजिक मुद्दों पर तार्किक समझ रखते हैं। मुझे इनकी डेयरी व बकरी-घर को देखने का अवसर मिला, पूरा दिन साथ रहकर चर्चाएं करने का भी अवसर मिला।

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