पुलिस-सुधार

police-reform-04
भारत में जब भी पुलिस-सुधार की बात होती है तो इसका मतलब सिर्फ उनके अधिकारों व सुविधाओं में बढ़ोत्तरी तथा उनको उन्नत तकनीक के खतरनाक हथियार उपलब्ध कराने तक ही सीमित रहता है। पुलिस को आम आदमी के लिए जवाबदेह बनाने का प्रयास कभी नहीं किया जाता।
 
police-reform-02यह हमेशा भुला दिया जाता है कि पुलिस का ढांचा अभी तक अंग्रेजो के जमाने का ही है जिसका मकसद आम आदमी को अवारा जानवर समझना है। पुलिस को जमाने से अनाप-शनाप अधिकार प्राप्त हैं, जिनके कारण आम आदमी की हैसियत पुलिस के सामने सड़कछाप अवारा जानवर जैसी होती है।
 
पुलिस को प्राप्त अधिकारों के कारण ही लाखों निर्दोष लोग जेलों में वर्षों से सड़ रहे हैं। पुलिस द्वारा प्रतिवर्ष हजारों निर्दोष लोगों की हत्या की जाती है। अपराधी व पुलिस का नेक्सस बनता है, जिसके कारण अपराधों की संख्या व तासीर लगातार बढ़ती चली जाती है।
 
police_reform-01किसी भी देश व समाज में अपराधियों की संख्या कम होती है। शांतिप्रिय लोगों की संख्य अधिक होती है। कुछ लोगों के कारण पूरे लोगों के ऊपर शासन करने के लिए प्रताणित करने के स्तर के अनाप-शनाप अधिकार दे देना सुधार नहीं होता है, सुधार से विपरीत दिशा में चलना होता है।
 
भारत में पुलिस सुधार केवल और केवल तभी संभव है जब पुलिस को आम आदमी के प्रति जवाबदेह बनाने के गंभीर प्रयास हों।
 
लेकिन ऐसा क्यों चाह जाएगा, यदि ऐसा हो गया तो राजनैतिक, प्रशासनिक, धार्मिक व व्यापारिक सत्ताओं द्वारा पुलिस का दुरुपयोग करके आम आदमी का शोषण कैसे किया जा सकेगा।
 
जब तक आम आदमी के प्रति जवाबदेह बनाने की ओर पुलिस-सुधार का साहस न हो तब तक पुलिस-सुधार के नाम पर अधिक अधिकारों व उन्नत खतरनाक हथियारों को देने रूपी पुलिस-सुधार को बिना लाग-लपेट के बकवास कहा जाना चाहिए।
 
Police Line Do Not Cross
.

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More posts