तथाकथित मेट्रो जागरूकता

सामाजिक यायावर

मैं अपनी कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक के बाद निदेशकों के साथ खान मार्केट, नई दिल्ली के जापानी रेस्टोरेन्ट में डिनर करने गया फिर फ्रांसीसी रेस्टोरेन्ट श्रृंखला लोपरा में डेजर्ट खाने गए। खान मार्केट से दो तीन किलोमीटर पर ही मेरा आशियाना है, लेकिन कभी कभार आटो या टैक्सी की जगह मेट्रो की सवारी छोटी दूरी पर भी अच्छी लगती है वह भी तब जब घर जल्दी लौटना चाहें।

स्वयं के अतिरिक्त शेष निदेशक मंडल को विदा करने के बाद मैं मेट्रो से घर वापस हुआ। अपना स्टेशन आते ही मेरा मन किया कि मैं मेट्रो स्मार्ट कार्ड में रुपए टापअप करा लूं। मैंने देखा कि सिर्फ एक युवती ही टापअप की लाइन में खड़ी है, भीड़ न होने के कारण मैंने सोचा कि फटाफट टापअप करा लूँ।

युवती को बताया गया कि उसका कार्ड तकनीकी खराबी रखता है, युवती ने कहा कि उसके कार्ड में काफी रुपए हैं और उसे काफी दूरी पर स्थित मेट्रो स्टेशन के पास अपने घर लौटना है, वह कैसे लौटे, उसको मेट्रो के कारण ऐसी असुविधा झेलनी पड़ रही है, मेट्रो जिम्मेदार है। काउंटर के क्लर्क ने युवती से कहा कि वह नया कार्ड ले सकती है या टोकन ले सकती है और अपने घर जा सकती है। रही बात इस खराब हुए कार्ड की तो वह एक फार्म भर सकती है उसको एक रसीद दी जाएगी और कुछ दिनों बाद उसको खराब हुए कार्ड में पड़े रुपए मिल जाएंगे। क्लर्क ने कहा कि बेहतर कि वह अपने घर के नजदीक के मेट्रो स्टेशन में जाकर फार्म भरे क्योंकि रुपए वापस वहीं से होगें जहां फार्म भरा जाएगा। युवती ने तेज आवाज में चिल्लाते हुए अंग्रेजी बोलना शुरू किया, अंग्रेजी में काऊंटर वाले क्लर्क को बताया कि वह पढ़ी लिखी है, जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए लड़ना जानती है। युवती ने कहा कि मेट्रो के कारण उसको असुविधा हो रही है, उसने पैसे दिए हैं।

मुझे वहां खड़े खड़े लगभग 15 मिनट हो चुके थे, मुझसे इतनी जागरूकता देखी नहीं गई तो मैंने युवती से कहा कि –

मैं मानता हूं कि मेट्रो के कार्ड में तकनीकी खराबी हो जाने के कारण आपको असुविधा हो रही है जबकि आपने मेट्रो को पैसे दिए हैं, कार्ड एक ईलेक्ट्रानिक डिवाइस होता है जो कई सालों तक लगातार प्रयोग किए जाने, पर्स व घर में रखे जाने व प्रयोग किए जाने वाले तौर तरीकों के कारण खराब हो सकता है।

आप मेट्रो द्वारा दी गई असुविधा जो महज कार्ड में हुई तकनीकी खराबी के कारण अनजाने व अनचाहे पैदा हुई है, के प्रति तो जागरूक हैं किंतु पिछले 15 – 20 मिनटों से आप मुझे जो असुविधा दे रहीं हैं, उसका जिम्मेदार कौन है जबकि यह असुविधा आप जानबूझकर दे रहीं हैं क्योंकि आप जानतीं हैं कि मैं आपकी बहस के चक्कर में पिछले 15 -20 मिनटों से लाइन में आपके पीछे खड़ा हूँ।

मैंने कहा कि क्लर्क आपको समाधान बता चुका है, इतनी छोटी पोस्ट पर काम करने वाला इससे अधिक कुछ कर भी नहीं सकता है, उसे तो वह भाषा भी ठीक से नहीं आती होगी जिस भाषा में आप बात कर रहीं हैं। आप यदि अपने अधिकारों के लिए जागरूक हैं और लड़ना चाहतीं हैं तो उचित अधिकारी के पास जाकर लड़िए, किंतु अपनी सुविधा के लिए मुझे असुविधा देने का अधिकार आपको किस जागरूकता या अधिकार ने दिया …..

शायद उस युवती को मेरी छोटी सी बात समझ नहीं आई और वह क्लर्क को अंग्रेजी में चिल्लाकर हड़काती रही। मुझे लगा कि मैं अपने कार्ड का टापअप फिर कभी करा लूंगा जब इस युवती की तरह जागरूक नागरिक स्मार्ट कार्ड के काउंटर की लाइन पर खड़े होकर अपनी जागरूकता का प्रदर्शन न कर रहे हों।

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यह जागरूकता नहीं है और न ही अपने अधिकारों के लिए लड़ना है। आपका अधिकार केवल वहीं तक है जब तक आप दूसरे के अधिकारों का हनन नहीं करते हैं। जागरूकता का मतलब यह है कि दूसरे को असुविधा दिए बिना, दूसरों के अधिकारों का हनन किए बिना अपने अधिकार के लिए लड़ना। जागरूकता व अधिकार पूर्वाग्रह, स्वार्थ, स्वकेंद्रण व अपनी पसंद नापसंद पर आधारित नहीं होते हैं।

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