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देश को गर्त में झोंकने की तथाकथित क्रांति के लिए आप भी उत्तरदायी हैं

सामाजिक यायावर


एक निहायत ही मानसिक विकृत, झूठा व फरेबी आदमी आपके पास आता है। बेहूदा, खोखला व फर्जी दावा ठोंकता है कि उसने दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था का गहरा अध्ययन किया है।

चूंकि आपने कभी जीवन में गहरा अध्ययन किया नहीं, गंभीर लोग आपकी सलाहकार व मित्र मंडलियों में दिखते नहीं। आप काल्पनिक व गढ़े गए इतिहास को वास्तविकता के रूप में प्रायोजित करते हुए जीते दीखते हैं क्योंकि ऐसा करने से अपनी सभ्यता के स्वयंभू महान होने का दंभ पूरा होता है। इसलिए आपने इस मानसिक विकृत, झूठे व फरेबी आदमी के बेहूदे व फिजूल तर्कों को हाथों-हाथ लेकर देश को गर्त में पहुंचाने का कर्मकांड कर डाला।

यह आदमी आपकी इन कमियों को जानता है, सबसे बड़ी बात यह आदमी यह भी जानता है कि आपको स्वयं को ऐतिहासिक क्रांतिकारी पुरुष के रूप में स्थापित करने की सनक है, जिस सनक के लिए आप कुछ भी कर सकते हैं। यह आदमी आपसे कुछ मिनट की औपचारिक मुलाकात करने का समय मांगता है। उसके नेटवर्क ऐसे होते हैं कि उसको आपसे औपचारिक मुलाकात करने का समय मिल जाता है।

यह निहायत ही मानसिक विकृत, झूठा व फरेबी आदमी आपसे मिलता है, आपको देश में आमूलचूल परिवर्तन के सपने हकीकत में बदलते दिखाता है। आप एक तीर से कई शिकार करने की राजनैतिक योजना बनाते हैं। आपने यह समझने का प्रयास नहीं किया कि यह आदमी जो दुनिया के देशों का अर्थशास्त्र समझने का दावा (बिलकुल ही फर्जी दावा) ठोंक रहा है वह भारतीय समाज व यहां के लोगों की मानसिकता को समझता है या नहीं।

चूंकि आपको प्रवचन देने व प्रवचन सुनने के लिए प्रशिक्षित किया गया है इसलिए आपको प्रवचन सुनने के बाद उसको आगे बढ़ाते हुए प्रवचन देने की शीघ्रता रहती है। सो आपने एक मानसिक विकृत, झूठे व फरेबी आदमी का स्वादिष्ट प्रवचन सुना और बिना योग्य, गंभीर व विशेषज्ञ लोगों से परामर्श किए उसके प्रवचन को देश के लोगों को प्रवचन के रूप में सुना दिया।

किंतु यह प्रवचन केवल प्रवचन नहीं था, देश की हजारों वर्षों के ढांचे को तहस-नहस करने की बात थी। अरबों लोगों के विश्वास टूटने की बात थी। अरबों लोगों के सुचारु रूप से चल रहे जीवन में छीछालेदर होने की बात थी।

इस आदमी को की शान में कई मित्रों ने बाकायदा आपके साथ उसकी फोटुओं के साथ साबित करते हुए यह बताया कि यह दुनिया का महान अर्थशास्त्री है जिसके आगे दुनिया के बड़े-बड़े अर्थशास्त्री पनाह मांगते हैं। जबकि मुझे पहले पल से ही यह आदमी मानसिक विकृत, झूठा, फरेबी, लफंगा व लुच्चा आदमी प्रतीत हुआ है।

ये मित्रगण जिनको न तो भारतीय समाज की समझ है, न ही अर्थशास्त्र की, न ही इन्होंने कभी कोई ठोस जमीनी काम ही समाज के लिए किया है, न ही इन्होंने अपनी व्यक्तिगत व पारिवारिक जीवन की प्राथमिकताओं को सामाजिक प्राथमिकताओं के लिए भेंट ही चढ़ाया है। इन मित्रों के द्वारा इस मानसिक विकृत, झूठे व फरेबी आदमी को महान अर्थशास्त्री मानने के पीछे उनके अपने मन के भीतर की ही वे कुंठित मानसिकताएं हैं जिनके कारण वे राजा या सामंत को सबसे योग्य, महान व दैवीय मानते हैं। इसलिए इस मानसिक विकृत, झूठे व फरेबी आदमी की महानता व योग्यता का सबसे बड़ी कसौटी यही है कि आपने इसकी बेहूदी बकवास लगभग दो घंटे तक सुनी, आपने इसकी बेहूदी बकवास पर देश में आमूलचूल परिवर्तित करने वाली ऐतिहासिक क्रांति के बीज खोजे।

यह मानसिक विकृत, झूठा व फरेबी आदमी व इसके दुमछुल्ले मित्र व जानपहचान वाले फायदे में रहे। यह आदमी मीडिया में स्थान पाया, क्रांतिकारी सोच रखने वाले महान चिंतक आदि जैसे होने की फर्जी वाहवाही लूटा। इस आदमी के मित्र व जानपहचान वाले मानसिक विकृति वाले इस दंभ का मजा लिए कि वे इस आदमी के मित्र हैं या इसको जानते हैं। 

लेकिन आपका व देश का क्या हुआ ….. आपके ऊपर सवाल खड़े होना शुरू हुए, आपको अगंभीर पुरुष माना जाने लगा, देश के लोगों की जो हालत है वह यदि आपको सच में ही नहीं पता तो यह अत्यधिक चिंता वाली बात है …..। यदि आप सच में देश के प्रति सहज भाव रखते हैं तो आपको इस आदमी व इस आदमी के मित्रों व जानपहचान वालों जैसे लफंगों, मानसिक विकृत व अधकचरे ज्ञानी लोगों से बचना चाहिए क्योंकि अपने देश का माइंडसेट ऐसा है कि लफंगे ही मौज करते हैं।

जो आपने किया, करने के बाद भी जिस तरीके से हैंडल किया व कर रहे हैं; उससे लोगों को इतना तो स्पष्ट मालूम पड़ता जा ही रहा है कि आपमें देश को लफंगई के माइंडसेट से मुक्त कर पाने की दृष्टि, योग्यता व क्षमता नहीं; आप देश को समझते नहीं। इसलिए देश हित में बेहतर यही है कि केवल आप स्वयं को लुच्चों-लफंगों के स्वादिष्ट व लुभावने प्रस्तावों, दावों व तर्कों आदि के प्रभाव से ही मुक्त रख पाएं ताकि कम से कम देश और अधिक गर्त में तो नहीं पहुंचेगा।

 

चलते-चलते :

 

संभव है कि आपको लगता हो कि कबीलाई सोच व सभ्यता अबतक कि सबसे बेहतरीन सोच व सभ्यता थी। हो सकता हो आपको लगता हो कि चाणक्य का अर्थशास्त्र जो कबीलाई तौर-तरीकों पर आधारित था, वह दुनिया का सबसे बेहतरीन अर्थशास्त्र है। हो सकता हो आपको लगता हो कि देश के लोग मूर्ख हैं, उनको जैसे चाहे वैसे हांका जा सकता है।

 

लेकिन मुझे लगता है कि देश के लोगों ने आप पर विश्वास किया था क्योंकि उनको लगा था कि आप उनके सपनों व कल्पनाओं को साझा करते हैं। आप उनको उनके सपनों व कल्पनाओं का देश बनाकर देंगें। बहुत लोग अब भी ऐसा ही सोचते हैं। लेकिन बहुत लोग ऐसे भी हैं जो अब यह मानने लगे हैं कि आपसे ऐसा संभव नहीं।

 

जिन लोगों ने सिर्फ बैठे-बैठाए अय्याशी करने के लिए आपको ऐशोआराम उपलब्ध करवाने की शक्ति रखने वाला अवतार मानकर आपको बिना सवाल राजपाट सौंप दिया। आपको लगता है कि ऐसे लोग कबीलाई सभ्यता की ओर वापस जाना चाहेंगे। मुझे तो बिलकुल नहीं लगता है। आखिर कब तक लोग आपकी इन बातों पर विश्वास करते रहेंगे कि इतना कष्ट और झेल लो फिर जीवन स्वर्ग जैसा हो जाएगा। आखिर कब तक फर्जी सपनों व कल्पनाओं को देखते हुए लोग सब्र करते रहेंगे।

 

दरअसल यह आदमी जो निहायत ही मानसिक विकृत, झूठा व फरेबी है, की बात मानकर आपने लोगों के मन में गंभीर व चिंतनीय सवाल पैदा कर दिए हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आप केवल सपने दिखाते हैं, उन सपनों को धरातल में उतारने के लिए आप लोगों से कष्ट भोगने व बलिदान करने की मांग के ऊपर मांग प्रस्तुत करते हैं जबकि वास्तव में सपनों को धरातल पर उतार पाने की दृष्टि, सोच, समझ, योग्यता व क्षमता आप में नहीं है। …….

 

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