रजनी तिलक होने का महत्त्व –Vidya Bhushan Rawat

Vidya Bhushan Rawatरजनी तिलक जी का अचानक चले जाना अम्बेडकरवादी महिलावादी आन्दोलन के लिए गहन धक्का है क्योंकि उन्होंने जीवन प्रयत्न इन सवालों पर कोई समझौता नहीं किया और महिलाओं के अधिकारों के लिए वह संघर्षरत रही. आज ये कठिन दौर में साम्प्रदायिकता और जातिवाद के विरुद्ध सीधे खड़े होने के लिए बहुत वैचारिक निष्ठां चाहिए होती है . रजनी तिलक उन गिने चुने लोगो में थी जो बिना किसी… Continue reading

पुस्तक समीक्षा : सामाजिक क्रांति के लिए आवश्यक सावित्रीबाई फुले के महत्वपूर्ण दस्तावेज –विद्या भूषण रावत

Vidya Bhushan Rawat सावित्री बाई ज्योति बा फुले भारतीय इतिहास में सर्वोत्तम युगल के तौर पर कहे जा सकते है. भारतीय समाज में यदि फुले दम्पति के कार्यो को भली प्रकार से समझ लिया और अपना लिया तो अहिंसात्मक  क्रांति अवस्यम्भावी है. पिछले कुछ वर्षो में ज्योति बा फुले के विचारो के विषय में विभिन्न लोगो ने लिखा है लेकिन सावित्री बाई फुले के विचारो और कार्यो के बारे में बहुत… Continue reading

प्यार पर हमला समाज में जातीय सर्वोच्चता को बनाये रखने की साजिश

Vidya Bhushan Rawat कल अंकित सक्सेना के पिता को टी वी पर देखा जहा एंकर महाशय उनको प्रणाम कर रहे थे लेकिन गुस्सा हो गए के केजरीवाल ने मुसलमानों को तो मौत पर अधिक पैसा दिया और हिन्दुओ के नहीं. सर्व प्रथम बात ये के अंकित को मार डाला गया और ये एक अपराध है और कानून के अनुसार अपराधियों के साथ जो होना चाहिए वो होने चाहिए. पुलिस ईमानदारी से… Continue reading

अमन और मुहोब्बत का पैगाम देता ‘मिया बीवी और वाघा’

Vidya Bhushan Rawat आज बहुत दिनों बाद लाइव परफॉरमेंस देखी. इंडिया हैबिटैट सेण्टर में दुबई से आई गूँज की प्रस्तुति मिया बीवी और वाघा ने हम सभी को एक आइना भी दिखाया जो आजकी मशीनी दुनिया में रिश्तो को मात्र पैसो से जोड़कर देखती है, जहाँ ‘सफलता’ के लिए हम सब जगह जाते हैं, सब प्राप्त करते है लेकिन प्यार से बातचीत के लिए समय नहीं है. आमना खैशगी और एहतेशाम… Continue reading

अन्धविश्वास का राजनीतिक कुचक्र

Vidya Bhushan Rawat डार्विन के सिद्धांतो को माननीय मंत्री जी के ख़ारिज करने के बाद से मानो भूचाल आ गया है. देश के वैज्ञानिको ने कहा के सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए और मंत्री जी के वक्तव्य पर तरह तरह की प्रतिक्रियाये आ रही है लेकिन फिर एक बात कहना चाहता हूँ के क्या मंत्री ने जो कुछ कहा वो अचानक मुंह से निकली कोई बात थी या ये सब… Continue reading

चन्द्र सिंह गढ़वाली :: स्वाधीनता आन्दोलन में सांप्रदायिक सौहार्द की मिशाल पैदा करने वाला का एक नायक

विद्या भूषण रावत अक्टूबर १ को पेशावर काण्ड के नायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली की पुण्य तिथि थी लेकिन सतही तौर पर याद करने के अलावा उनके बारे में बहुत कुछ जानकारी न तो उपलब्ध है और न ही उनके जीते जी उन्हें सत्ताधारी इज्जत दे पाए क्योंकि चन्द्र सिंह हमेशा ही सत्ताधारियो से टकराए. वह आर्य समाजी थे और  गाँधी से भी बहुत प्रभावित थे लेकिन उनके विचार और… Continue reading

अनंत नाग में अमरनाथ तीर्थ यात्रा में आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की जानी चाहिए

Vidya Bhushan Rawat अनंत नाग में अमरनाथ तीर्थ यात्रा में आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की जानी चाहिए. ये भी हकीकत है के ऐसे हमले सीमा पार की शह के बिना पे नहीं हो सकते हैं लेकिन भारत सरकार की कश्मीर निति पूर्णतः असफल हो चुकी है. हम जानते है के इस वक़्त भक्त पत्रकार मामले को सांप्रदायिक रूप देने में व्यस्त होंगे और कई ने ट्वीट करना शुरू किया… Continue reading

ईद के मौके पर बेहतरीन भविष्य की शुभकामनायें

विद्या भूषण रावत ईद के ख़ुशी के मौके पर सभी दोस्तों को बहुत मुबारकबाद. देश के मौजदा हालातो से अफ़सोस तो होता है के जिम्मेदार लोगो की जुबान पर नफ़रत फैलाने वालो के लिए कुछ अल्फाज़ भी नहीं है. अभी अभी दिल्ली पहुंचा हूँ . रास्ते में देख रहा था बच्चे ख़ुशी ख़ुशी, चहकते हुए, महकते हुए ईदगाह की और जा रहे हैं . मन में सोच रहा था के… Continue reading

बहुजन नेतृत्व अम्बेडकरवादी युवाओ की राजनैतिक आकांक्षाओं को समझें

[themify_hr color=”red”]   सहारनपुर के घटना के बाद दलितों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा क्योंकि प्रशासन बजाय प्रभावित लोगो को मदद करने के भीम सेना को एक अपराधिक समूह घोषित करने पर आमादा है. भीम सेना के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद को पुलिस तलाश कर रही है और ये सूचनाएं है के उनके ऊपर रास्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाने के तैय्यारी चल रही है . घायल दलित परिवार अस्पताल… Continue reading

सांड  को आवारा होने से कौन बचाये  .. 

Vidya Bhushan Rawat [themify_hr color=”red”] गाय हमारी माता है, हमको कुछ नहीं आता है, बैल हमारा बाप है, पढ़ना लिखना पाप है। बचपन में ये बहुत सुना था।  गाय और बैल हमारे जीवन का हिस्सा थे।  दो बैलो की जोड़ी कांग्रेस का प्रसिद्ध चुनाव चिन्ह था।  गाय के बछड़ा होने पर लोग उतना दुखी नहीं होते थे जितना आज होते हैं क्योंकि मशीनीकरण ने बैलो की कृषि पर आधारित उपयोगिता… Continue reading