बदली — Hukum Singh Rajput

​हुकुम सिंह राजपूत ​रहती हू———घर नही!भागती हू——-डर नही!उड़ती हू—— –पर नही!देती हू ——- कर नही!आदि से हू —–अमर नही!नारी हू ———–नर नही!बिन मेरे गुजर बसर नही!इस पहेली का अर्थ है ​बदली​ आइये बदली पर प्रकाश डाले: नित्य कहॉ से आती बदली,नित्य कहॉ जाती है बदली!अपना रङ्ग जमाती बदली,सबको नाच नचाती है बदली! झटपट रङ्ग बदल देती बदली,सफेद से लाल काली हो जाती है बदली!तुरन्त आकाश से हट जाती बदली,कभी आकाश पर… Continue reading