बस्तर, छत्तीसगढ़ पर आने वाली पुस्तक का प्रस्तावना अध्याय

[themify_hr color=”red” width=”5″] अभी इस विमर्श को छोड़ देते हैं कि बस्तर का माओवाद वहां के आदिवासी समाज के लिए प्रतिबद्ध, ईमानदार व कल्याणकारी है या नहीं, यह भी छोड़ देते हैं कि बस्तर का माओवाद बस्तर के आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व वास्तव में करता है या नहीं, सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण तथ्य कि बस्तर का माओवादी, माओवाद को जानता समझता भी है या नहीं इस विमर्श को भी छोड़… Continue reading

आजाद भारत का अनोखा दिन – सैकड़ों वर्षों तक परित्यक्त रहे क्षेत्र अबुझमाड़ के बच्चों से भारत के राष्ट्रपति मिले और विशिष्ट अतिथियों जैसा आदर व स्नेह देते हुए स्वादिष्ट भोजन कराया

Vivek “सामाजिक यायावर” ढंके की चोट पर पूरी ताकत से कहना चाहता हूं कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह जी के दिशा निर्देशन में बस्तर में चल रहे कान्फ्लिक्ट रिजोलूशन की दिशा में किए जाने वाले दूरदर्शी व जमीनी रचनात्मक कार्यों ने बस्तर का वास्तविक चेहरा बहुत ही अधिक बदला है। इसी कड़ी में अबुझमाड़ जैसे सैकड़ों वर्षों से परित्यक्त क्षेत्र का विकास का युगकालीन इतिहास रचने वाली टामन सिंह सोनवानी… Continue reading