मनु, मन्दिर और दलित

ज़िंदगी को देखने-समझने के नज़रिये और अपने अनुभव से गुने मायने ना चाहते हुए भी आपके व्यवहार को प्रभावित करतें ही हैं। शायद मैं अब तक भी इतनी परिपक्व नहीं हो पाई कि उन अनुभवों को किनारे रख निष्पक्ष भाव से व्यवहार कर पाऊँ। यदि जीवन उन अनुभवों के साथ जी रहें हैं तो हिम्मत या समझदारी ज़रूरी नहीं कि काम आ ही जाए। ऐसा ही एक कँपा देने वाला… Continue reading

जातीय दंश, रंगभेद, लिंगभेद और हमारा दोगलापन

वैसे तो लड़कियों के इनबॉक्स में रोज़ तमाम तरह के मैसेज आतें हैं, पर बीते दिनों कुछ लड़कियों के जो मैसेज आए उन्होनें मुझे लिखने पर मजबूर कर दिया। पहाड़ों पर घुमक्कड़ी की कई फ़ोटो के अपलोड के दौरान बहुत से कॉमेंट और मैसेज मिले, लेकिन मेरी लड़की दोस्तों ने जो लिखा वो लगभग कई बहुजन लड़कियों के अतीत-वर्तमान और रोज़मर्रा से जुड़ी प्रेक्टिसेस, उनके सपनों की ऊंचाइयों, समाज की… Continue reading