सरकारी नौकरी प्रतियोगी परीक्षा के छात्र की कहानी — Er Akhilesh Pradhan

Er Akhilesh Pradhan अगर पाठक भावुक कर देने वाले किसी लेख की उम्मीद में हैं तो आपको इस लेख का पहला पैराग्राफ ही निराश कर सकता है, इसलिए आप यहीं से पढ़ना बंद कर सकते हैं।एक प्रतियोगी परीक्षा का छात्र ग्रेजुएट होने के बाद जिस दिन सरकारी नौकरी की चाह में कोंचिग/ट्यूशन लेना शुरू करता है। पहले दिन से ही उसके भीतर की अभूतपूर्व संभावनाओं का ह्रास होना शुरू हो… Continue reading

ऐसा लगा जैसे मैंने पहाड़ को थोड़ा भी नहीं समझा है

Akhilesh Pradhan   रोज की तरह कल नंदा देवी मंदिर परिसर जाना हुआ। नंदा देवी मंदिर मुनस्यारी के डानाधार क्षेत्र में अवस्थित है। तो जब मैं मंदिर से नीचे उतर रहा था तो मंदिर परिसर के मुख्य द्वार पर एक पोस्टर लगा हुआ था, वह पोस्टर सप्ताह भर पहले हुए किसी इवेंट से संबंधित था। उस पोस्टर को वहाँ चिपका देखकर मेरे मन में दो ख्याल आए, पहला यह कि ये… Continue reading