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सेलेब्रिटी एक्टिविज़्म : फेमिनिज़्म का सेफ्टी वाल्व –Apoorva Pratap Singh

Apoorva Pratap Singh

एक साक्षात्कार में स्वरा भास्कर से पूछा गया कि कास्टिंग काउच होता है या नहीं ? वो ढीठ की तरह मुस्कुराते हुए बात को घुमाती रही पर उत्तर नहीं दिया पूछने वाले ने कहा कि सिर्फ यस या नो में उत्तर दे दीजिए पर स्वरा भास्कर जो लम्बी चिट्ठी पत्री या सो कॉल्ड एक्टिविज़्म आउट्रेज करने का समय निकाल लेती हैं उनसे हां या ना, वो भी न हुआ बोलीं कि मेरी फिल्म के बारे में बात कीजिये !!! भंसाली को चिट्ठी लिखना जल में रह कर मगर से बैर नहीं होता लेकिन कास्टिंग काउच पर कुछ कहना यकीनन उनके इंडस्ट्री में निजी हितों को प्रभावित करता !!

स्वरा हिपोक्रेट हैं यह पिछले दो साल से सबको पता है इस तथ्य से जिसको दिक्कत हो उस पर सिर्फ तरस खा सकते हैं । 

ट्रेलर में एक जगह सोनम बॉयफ्रेंड से कह रही है कि "जाके अपनी माँ से ही शादी कर ले, मदर लवर" !!! ये साफ़ साफ़ गालियों का यूफेमिज़्म हैं !! माँ से शादी करने का अर्थ क्या होता है ? 
करीना कपूर एक जगह 'मिस पुरी' से मिसेज़ मल्होत्रा बनने को ले कर घबराई हुईं है जो कि खुद ही करीना कपूर 'खान' बनी बैठी हैं ! इवन इन लोगों की इंटर रिलिजियस शादियों में भी बच्चे का नाम पति के धर्म से ही होता है जैसे कि 'तैमूर' या खुद 'सैफ' ही !!

स्वरा जो 3 महीने पहले योनि मात्र महसूस कर रही थीं अब चूत शब्द गाली की तरह इस्तेमाल कर रहीं हैं !! कंगना जो रजत शर्मा के शो में सलमान की बजरंगी भाईजान ठुकराने के दावे ठोंक रहीं, उन्होंने सलमान की ही 'रेडी' में दो मिनट का ही रोल किया था !!

कंगना ने जब अपनी निजी खुन्नस निकाली थी जिसे यहां लोग क्रांतिकारी और फेमिनिज़्म बता रहे थे तब मैंने अपना पॉइंट उनके एंटी रखा तब कहीं किसी ने मुझे या मेरी जैसी लड़कियों (जो प्रो कंगना नहीं थी) को कहा कि यह औरतें मर्दवादी हैं, आदमियों की जी हुजूरी करती हैं, शातिर हैं वगैरह !!

तो मुझे यह कहना है कि आप लोग इतनी ढिठाई लाते कहां से हैं और आपको किसी को भी झंडाबरदार बनाने की इतनी जल्दी क्यों है ?? आपको आपके पॉइंट या जिसे आप फेमिनिज़्म कहते हैं उस पर/का किसी स्वरा या कंगना को ठप्पा लगवाने की ज़रूरत ही क्या है ? आप को इतना इंफीरियोरिटी कॉम्प्लेक्स क्यों है ? आप को अपने में आत्म विश्वास क्यों नहीं है ? आप के पास खुद का कोई एंगल क्यों नहीं होता ? आप गुटों में 'सोचना' इतना क्यों भाता है ?

समझती हूं कि पोस्ट लिखना ख़ब्त है आपकी और कोई भी सतही मुद्दा जिस पर पोस्ट लिख कर कुछ ऑर्गेज़्म टाइप का मज़ा आ जाता है उस पे आप लिख देते हैं पर इतनी भड़भड़ाहट क्यों हैं तमगे देने की !!! 

शेहला राशिद मत बनिये, वो लिवइन पर du में रैली निकालते हैं जैसे कि यही औरतों की सबसे बड़ी दिक्कत है, इस पर काम हो गया तो औरतें पिटना बन्द हो जाएंगी, उनकी वेजेज़ बराबर हो जाएंगी, वो साक्षर हो जाएंगी वगैरह !!
इस तरह की रैलियां और यह सेलेब्रिटी टाइप एक्टिविस्ट केवल सेफ्टी वाल्व होते हैं जो असल मुद्दे तक पहुंचने नहीं देते न ही इनके लिए इनका कोई मोल है !! पर यहां फेसबुकिये किरान्तिकारियों की आरती उतारनी चाहिए !!

मैं शायद आपसे भी बड़ी मूर्ख हूं क्या पता आपसे भी बड़ी शातिर हूं !! मैं जो भी हूं लेकिन काम की बात यह है कि आप एक नम्बर के मूर्ख हैं या शातिर !!

मुझे स्वरा और कंगनाओं से कोई मतलब नहीं हैं ! लेकिन यहां के जो मसखरे हैं, (स्वरा की भाषा में कहें तो चूतियों से कह सकती हूं लेकिन अभी नहीं कहूँगी)उनसे दो बातें कभी कभी ज़रूरी हो जाती हैं और मैं इन की अपने जैसे लोगों पर लगाये आरोपों को बिलकुल पर्सनली लेती हूं !! आप लोगों को डिमोटिवेट करना इसलिए जरूरी समझती हूं क्योंकि अगर नहीं किया तो आपसे अलग राय रखने वालों का तो आप जनाज़ा निकाल देंगे !

Apoorva Pratap Singh


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