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  • सबसे अश्लील और ‘अंतिम’ कविता

    सबसे अश्लील और ‘अंतिम’ कविता

    Ma Jivan Shaifaly[divider style=’right’]

    यह मेरे जीवन की
    सबसे अश्लील और ‘अंतिम’ कविता है
    जब मैं अपने स्थूल भगोष्ठों पर
    तुम्हारी चेतना के सूक्ष्म स्पर्श को
    अनुभव करते हुए
    ब्रह्माण्डीय प्रेम के
    चरम बिन्दु को छू रही हूँ
    जहाँ दो देहो के मिले बिना
    आत्म मिलन की संतुष्टि की गाथा
    लिखी जाएगी
    कामसूत्र के
    अदृश्य ताम्रपत्रों में
    और उकेरी जाएगी
    खजुराहो मंदिर के गर्भ गृह में
    जहाँ तक कभी उस मंदिर की दीवारों की कला
    भी नहीं पहुँच पाई

    Shaifaly Nayak

    क्योंकि अब हम कला की देहरी को भी
    पार कर चुके हैं
    भंग कर चुके हैं
    साहित्य की सीमा को भी
    अध्यात्म तो हमारी लापरवाही की फूंक भर है..
    क्योंकि मेरे कानों के पीछे
    तुम्हारी एक प्रेम भरी सांस की कल्पना में ही
    मेरी मुक्ति की पूरी गाथा लिखी जा चुकी है