भारतीय राजनीति का मायालोक

Sanjiv Kumar Sharma [content_container max_width=’500′ align=’center’]स्वीकारोक्ति (डिस्क्लेमर) लेखक को राजनीति का कोई जमीनी ज्ञान नहीं है, जो भी राजनैतिक समझ विकसित की है वह कमरे में बैठ कर किताबें पढ़ते, सूचना तकनीकी का इस्तेमाल करते और विचारते हुए की है|[/content_container] भारत की जनता मायालोक, जादू और तिलिस्म में हमेशा से दिलचस्पी रखती है| एक चमत्कारिक अंगूठी से सारी मुसीबतें दूर हो जाती हैं, एक सुपर फ़ूड एकदम स्वस्थ कर देता… Continue reading

हिंसा के घेरे में शिक्षा

मनुष्य की विकास यात्रा में सबसे महत्वपूर्ण चीज शिक्षा ही रही है| अनेक चुनौतियों से गुजरती, नए-नए पायदान चढ़ती, कभी आगे बढ़ती, कभी भटकती शिक्षा आज एक खास मुकाम पर पहुंची है| लेकिन आज भी बहुत बड़ी आबादी के लिए शिक्षा का मतलब सिर्फ कुछ तथ्यों को रट लेना या कुछ धनराशि कमा लेने का जुगाड़ कर लेना ही है| शिक्षा क्या है, इसका उद्देश्य क्या है, इसके तौर-तरीके क्या हैं… Continue reading

जामनगर बंगलुरु : घुटता, अटकता शहर

संजीव कुमार शर्मा जामनगर भले ही गुजरात में हो लेकिन असली जामनगर तो बेंगलुरु है| वैसे बेंगलुरु का जिक्र आते ही आँखों के सामने एक मनोहारी नजारा घूम जाता है| आँखों को लुभाती हरियाली, देह गुदगुदाती ठंडी हवाएं और शहर से बाहर निकलते ही एक-से-एक नयनाभिराम दृश्य| एक तरफ सिलिकॉन क्रांति का परचम लहराती इलेक्ट्रॉनिक सिटी तो दूसरी तरफ जगह-जगह पर झीलें, बाग़, बगीचे, पेड़ों की कतारों की बीच बनी… Continue reading