JNU जैसे संस्थानों की विशिष्टता विशेष अनुदानों, अनुग्रहों व संसदीय कानूनों की शक्तियों की देन है न कि अर्जित की हुई

  जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की स्थापना करना अच्छा निर्णय था। तत्कालीन प्रधानमंत्री व भारत सरकार की दूरगामी सोच का परिणाम था। JNU की स्थापना करने की मंशा में कोई दुर्भाव नहीं था, वरन् भारत देश की बेहतरी निहित थी। JNU ने विशिष्टता अर्जित नहीं की है। JNU की स्थापना में JNU की स्थापना के क्षण से मिलने वाले विशेष अनुदानों व अनुग्रहों का बहुत बड़ा योगदान है। JNU की… Continue reading

किताब की प्रस्तावना :: देश व समाज का निर्माण मनुष्य का दायित्व है

मनुष्य के बिना देश हो ही नहीं सकता, और जहां कहीं भी मनुष्य होगा वहां देश होगा ही होगा। मनुष्य बड़ा है देश से, क्योंकि मनुष्य बनाता है देश। देश की सत्ता, मूल्य, नियम-कानून, रीति-रिवाज, खानपान, रहन-सहन, भाषा, लिपि, धर्म, धार्मिक कर्मकांड व संस्कृति सभी कुछ मनुष्य ही बनाता व निर्धारित करता है। मनुष्य है तो देश है, बिना मनुष्य के देश का कोई अस्तित्व नहीं। यही सहज सामाजिक तथ्य… Continue reading

सूचना का अधिकार अौर भारतीय सामाजिक क्षेत्र का NGO कारपोरेट

(यह लेख उन लोगों के लिये है जो कि सूचना के अधिकार तथा ब्युरोक्रेटिक एकाउंटेबिलिटी के लिये गंभीर हैं।   यदि अाप इस श्रेणी में अाते हैं तो इसे पढ़े अन्यथा इसे कतई ही ना पढ़ें अौर मुझे क्षमा करने की कृपा करें।) मेरा निवेदन है कि विभिन्न व्यक्तिगत अौर संस्थागत अाग्रहों को परे रख कर इस लेख को समझने का तथा परिष्कृत करने का प्रयास किया जाये, ताकि अभी भी… Continue reading