बड़का किस्म के सेलिब्रेटी समाज सेवी लोगों/ मैगसेसे पाने के कुछ बेहतरीन नुस्खे/ टोटके

विवेक उमराव ग्लेंडेनिंग  (भारतीय समाज की सामाजिक क्षेत्र की हकीकतों पर कटाक्ष-व्यंग्य) प्रबुद्ध पाठकों इस लेख में कोई कमी बेसी हो तो जरूर बताईयेगा, मैं भी प्रयास करूंगा कि इस लेख को और परिष्कृत कर पाऊँ ताकि यह व्यंग्य लेख सत्य घटनाओं के आधार पर लिखा होने के बावजूद किसी को सीधी चोट नहीं पहुचाता हुआ नही लगे। हजारों लाखों नौजवान साथियों से अनुरोध हैं कि यदि आप सच में… Continue reading

घूमंतू का पिटारा Nomad’s Hermitage जो बोलता है तो बोलता है”

सामाजिक यायावर घूमंतू यह नही कह सकता कि यह उसका सौभाग्य था या दुर्भाग्य था।  किंतु उसको भूतकाल में कई ऐसे बहुत बड़े किसम वाले सामाजिक लोगों, उनके द्वारा संचालित संस्थाअों अौर उनके सबसे निचले दर्जे के कार्यकर्ताअों के साथ काम करने का बहुत मौका मिला है।   क्या कहा अापने कि ये लोग बड़े कैसे हैं?   बड़ी उम्दा किस्म की बात पूंछी अापने  तो ये बड़े इसलिये माने जाते हैं… Continue reading

गाँधी होना कितना अासान ?

यह लेख उन लोगों के लिये बहुत ही लाभदायक है जो कि गाँधी होना चाहते है, सिर्फ चाहते ही नही हैं, गाँधी होने का प्रमाणपत्र भी चाहते हैं अौर प्रमाणपत्र से प्राप्त होने वाली विभिन्न सुविधाअों का, वाहवाही का भोग भी करना चाहते हैं।  चौंकिये मत ऐसे बहुत दुकानदार हैं भारत में जो गाँधी होने का प्रमाणपत्र देते हैं अौर उनके प्रमाणपत्रों के अाधार पर ही भारत का मीडिया, विदेशी… Continue reading

रेत के कण — Vivek Umrao Glendenning

Vivek Umrao “सामाजिक यायावर”मुख्य संपादक, संस्थापक – ग्राउंड रिपोर्ट इंडियाकैनबरा, आस्ट्रेलिया भाव, विश्वास, सहानुभूति, निश्छल प्रेमनहीं मिला होता जिन्हें जीवन भर,प्रताड़नाएं, कूटनीति, असहयोग, असत्यकपट, घुटन, घृणा छल प्रपंच आदिखिलाए गए हों जिन्हें जीवन भर। सम्पत्ति, पूंजी, पहचान, धरोहरआदि कीभिन्न होती हैं परिभाषाएं उनके लिए,अभिव्यक्ति, मानवता, चेतना, विकासआदिजीवन लक्ष्य होते हैं उनके लिए। प्रारम्भ ही से नितान्त अकेले ऐसे लोगथपेड़ों में चलते रहते हैंगिरकर उठते हुए बिना बैशाखी। जीवन की पूंजी,… Continue reading