सौ से अधिक तालाबों के पुनरुद्धार व निर्माण कार्यों में भयंकर भ्रष्टाचार की जांच : जलपुरुष राजेंद्र सिंह राणा थे ब्रांड अम्बेसडर — Ashish Sagar

Ashish Sagar
Environment Representative,
Ground Report India

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार में बुंदेलखंड के 101 तालाबों के पुनरुद्धार-खुदाई कार्यो की वर्तमान भाजपा सरकार ने स्थानीय लोगों द्वारा की गई अनियमितता की जांच की मांग को स्वीकार करते हुए जांच शुरू कराई। महोबा के चंदेलकालीन 56 बड़े तालाबों में 100 करोड़ रुपये से हुआ था मिट्टी निकासी का काम। जलनिगम /सिंचाई विभाग महोबा के अधिशाषी अभियंता समेत तीन अभियंताओं पर कार्यवाही की जा चुकी है।

मुख्यबिंदु

  • तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव ने महोबा के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का ब्रांड अम्बेसडर जलपुरुष राजेंद्र सिंह राणा को बनाया था, मिला था यश भारती सम्मान
  • सम्मान पाने वालों को 50 हजार रुपये मासिक पेंशन दिए जाने का एलान था जिसे मौजूदा सरकार ने बन्द कर दिया है।
  • अखिलेश यादव के कार्यकाल में महोबा सहित बाँदा में सिंचाई प्रखंड / जलनिगम ने टेंडरिंग व्यवस्था कर जेसीबी के द्वारा तालाबों का गहरीकरण कार्य किया गया था।
  • अधिकारियों की सेटिंग से काम पाए कार्यदाई ठेकेदारों ने लाखों रुपये की मिट्टी तालाबों से निकाल कर बेची थी।


सीएम योगी की सरकार में महोबा के चरखारी से बीजेपी नेता गंगाचरण राजपूत ने हाई कोर्ट में पीआईएल दायर की और चरखारी समेत महोबा के 56 तालाबों में मिट्टी खुदाई कार्य की अनियमितता में जांच की मांग की थी। सीएम योगी ने बीते मई माह में पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अंबिका सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच कराई, इसकी रिपोर्ट सीएम को प्रेषित की गई है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 मई-जून माह में 100 करोड़ की लागत से अकेले महोबा में 56 तालाब मसलन शहर के कीरत सागर (पुरातत्व के संरक्षण में), मदन सागर, कल्याण सागर, किराड़ी, कुलपहाड़ तहसील के मोहन तालाब, बड़ा तालाब, बेला सागर, पचपहरा, उर्वरा, सिजहरी, पवा, राजमोहन सिंह तालाब, बिलखी, दाऊपुरा, चरखारी नगर के चंदेल कालीन कोठी ताल, जय सागर, विजय सागर, मलखान सागर, रपट तलैया, गुमान बिहारी सागर, वंशिया, गोला घाट, श्रीनगर तहसील के तालाब में बड़े स्तर पर सिल्ट-गाद हटाने के नाम पर मिट्टी खुदाई का कार्य मशीनों से हुआ था। गौरतलब है तब भी कार्यदाई संस्था जलनिगम -सिंचाई प्रखंड सहित ठेकेदार पर मिट्टी खोदने, मिट्टी बेच लेने के आरोप लगे और शिकायत किसानों ने की थी लेकिन मामला दबाया गया था।

वर्ष 2016 जून में बुंदेलखंड के भयावह सूखा और अखिलेश सरकार के इन तालाबों का पुनरुद्धार कार्य देखने देश के बड़े पत्रकार फील्ड विजिट पर आए थे। रिपोटिंग के वक्त वरिष्ठ पत्रकारों यथा श्री अरबिंद कुमार सिंह (राज्यसभा संवाददाता दिल्ली), बीबीसी हिंदी लखनऊ के रीजनल हेड समीर आत्मज मिश्रा, तत्कालीन समय ओपीनियन पोस्ट की विशेष संवाददाता संध्या द्विवेदी (अब आजतक डिजीटल कार्यरत) ने महोबा के इन तालाबों सहित झाँसी, बाँदा, चित्रकूट के पाठा बीहड़ों, मध्यप्रदेश के पन्ना जनपद में शिवराज सरकार के तालाबों का रिवाइवल कार्य देखा था।

मध्यप्रदेश (एमपी) के ज़िला पन्ना में भी तालाबों की खुदाई मिट्टी निकासी मानव श्रम की बनिस्बत जेसीबी से हुई थी। जबकि शासन की मंशा थी यह कार्य मजदूरों से लिया जाए ताकि सूखा प्रभावित क्षेत्र में जलसंकट समाधान के साथ मौसमी रोजगार भी मिले। कमोवेश जो टेंडरिंग तरीका यूपी बुंदेलखंड के बाँदा, महोबा में हुआ वही मध्यप्रदेश के पन्ना में हुआ।

आज यूपी बुंदेलखंड के यह बे-पानी तालाब एक जनपद महोबा में ही 100 करोड़ रुपये खर्च कर जांच की गिरफ्त में है। बड़ी बात है पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने इन तालाबों पर खर्च धनराशि और बुंदेलखंड को पानीदार बनाने की कवायद को विधानसभा चुनाव के दौरान हर बड़े समाचार पत्रों में जलपुरुष के साथ विज्ञापन देकर चुनावी माहौल बनाया था।

जलपुरुष राजेंद्र सिंह राणा

यहां तक कि स्वयं जलपुरुष ने महोबा के मदन सागर में श्रमदान की प्रतीकात्मक रस्में फावड़ा चलाकर पूरी की थी। समूचे बुंदेलखंड में पानी पिलाने की यह रणनीति लखनऊ से दिल्ली तक कौतूहल का विषय बनी थी। महत्वपूर्ण तथ्य है कि महोबा के कीरत सागर में खुदाई के बाद पौधरोपण कार्य हुआ जो चरखारी में भी किया गया। उरई की संस्था परमार्थ ने यह कार्य तत्कालीन डीएम वीरेश्वर सिंह के साथ किया। यह अलग बात है आज कीरत सागर समेत चरखारी के तालाबों में न पौधों की सलामती रही और न इन सभी तालाबों में एजेंडा प्रोजेक्ट के मुताबिक रौनक ज़िंदा बची।

मुख्यमंत्री योगी ने बुंदेलखंड के 101 तालाबों की जांच रिपोर्ट तलब कर महोबा के कीरत सागर में पुनरुद्धार कार्य मे अनियमितता बरतने वाले तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सिंचाई कार्य मंडल बाँदा डीएस सचान,तत्कालीन अधिशासी अभियंता सिंचाई प्रखंड महोबा विशंभर को निलंबित कर अनुशासनिक कार्यवाही के आदेश दिए है। इनके अतिरिक्त तत्कालीन मुख्य अभियंता (बेतवा) सिंचाई विभाग झाँसी, नवनीत कुमार (सेवानिवृत्त) के विरुद्ध कार्यवाही का आदेश किया है। इन पर परियोजना स्वीकृति लागत 197.76 लाख के सापेक्ष 508.11 लाख की तकनीकी स्वीकृति का बगैर अनुबंध काम कराने का आरोप है। बुंदेलखंड को तत्कालीन समय गोद लेने वाले आज दूसरे अभियान में व्यस्त है और तालाबों पर भ्रस्टाचार की जांच हो रही है।

हकीकत ये कि इस 100 करोड़ के बंदर-बांट की तरह यदि बाँदा के तत्कालीन जिलाधिकारी (डीएम) हीरालाल के 'कुआँ तालाब जियाओ' भूजल बढ़ाओ-पेयजल बचाओ (लिम्का बुक रिकॉर्ड) की भी जांच हो जाये तो पूत के पांव पालने में दिखते है वाली कहावत चरितार्थ हो सकती है। फिलहाल बुंदेलखंड की ये कागजी तालाब रिवाइवल गतिविधि कार्यवाही की जद में हैं।

आशीष सागर, पर्यावरणविद व पत्रकार